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Neetu Lahoty

Drama

4.3  

Neetu Lahoty

Drama

साझा दर्द

साझा दर्द

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"मेमसाहब, आज फिर साहब से झगड़ा हो क्या ?

ये, मरद लोग कभी भी औरत की भावनाओं को नहीं समझ सकते !"

"अब आप आँसू पोंछो मैं आपके लिये बढ़िया सी चाय बनाती हूँ। "

"कजली, तेरी पीठ पर ये नील का निशान कैसा ??क्या आज फिर राजू ने."

" छोड़ो न मेमसाहब, ये तो रोज की बात है !कजली, सुन एक कप चाय तेरे लिये भी बना लेना !"

खौलती चाय ने दोनों के साझा दर्द महसूस कर लिये थे.....


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