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Anshuman Mishra

Abstract

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Anshuman Mishra

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रक्षाबंधन

रक्षाबंधन

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कोई बचपन की याद ?वह रिपोर्टर उनकी ओर मुखातिब होकर कहने लगा । शिव प्रसाद जी कई वर्षों से एक कंपनी में काम कर रहे थे । यह कुछ समय पहले की बात है कि उन्हें लगा जैसे सामाजिक गतिविधियों की ओर उनका ध्यान आकर्षित हो रहा है। तभी उन्होने इस यूट्यूब चैनल को खोलने का निर्णय लिया । आज उनके जीवन के इस नए दौर को सफल बनाने का सुनहरा अवसर है ,क्योंकि आज उनके साथ, शीला देवी इस पॉडकास्ट में आई हैं। जी, वही शीला देवी , जो आजकल खबरों में हैं । सब कहते हैं कि उनका मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। आज शिव प्रसाद जी उनके देश-प्रसिद्ध पुत्र के विषय में प्रश्न पूछने आए हैं । शीला देवी ने बताना शुरू किया। पहले प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, कई बातें हैं। उसका पढ़ाई में जी नहीं लगता था। वह विद्यालय केवल मित्रों के साथ खेलने और हंसी-मज़ाक करने जाता था ।उसका अनुशासन से कोई लेना-देना नहीं था । जब खाना खाता था ,या कहूं गिराता था ,तब जो कुछ टिफिन में बचता ,मित्रों को खिला देता था । यह किस्सा किस कक्षा का है ? शिव प्रसाद जी ने उत्सुकता से पूछा ।उत्तर मिला 'यही कुछ पहली- दूसरी कक्षा का '| 

शीला देवी आगे कहती हैं ,' उसका संपूर्ण बचपन ऐसा ही था | एक बार कक्षा में अध्यापक एक कविता पढ़ा रहे थे , उन्हें समझ आ गया था कि उसका ध्यान पुस्तक में नहीं था ।अध्यापक ने उसे उस कविता का अर्थ समझाने को कहा ,अब दूर श्रीलंका में चल रही सिविल वॉर से उसका ध्यान इतनी जल्दी कक्षा में वापस कहां आने वाला था ।उसने उस समय कुछ बोलना आवश्यक नहीं समझा । तो अध्यापक ने डांटना शुरू किया ' तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता '। उसने तुरंत उत्तर दिया ,आप जैसों का कुछ हो गया तो हमारा भी हो ही जाएगा ।'कक्षा में कुछ बच्चे हूटिंग करने लगे और गुस्से में अध्यापक ने मुझे फोन लगाया और कहने लगे ' संभालिए ,लड़का हाथ से निकल जाएगा '। अब उन्हें कौन समझाए कभी हाथ ही नहीं लगता ,निकलेगा क्या ! जब खेलते समय पढ़ने को बुला लो तो अंदर का मिल्खा सिंह ही बाहर आ जाता है । एक बार किसी शिक्षक ने डांटा ।मित्रों के साथ योजना बनी- 'इस पप्पू की ज़ुबान ज्यादा चलने लगी है (अध्यापक का निकनेम रखना और आदर न देना, विद्यालय के शरारती बच्चों के लिए आम बात है ) ,इसे सबक सिखाना चाहिए ', अंतिम फैसला हुआ ,जिस चूहे को वे कूड़ेदान में पाल रहे थे ,मौका देखकर उसे इनपर छोड़ दिया जाए ,परंतु वे योजना में सफल नहीं हुए क्योंकि चूहा स्टाफ रूम में उत्तर पुस्तिका कुतरने में व्यस्त हो गया । 

शिव प्रसाद जी घड़ी की ओर देख रहे थे ,जैसे सोच रहे हों ,-कहां फंस गए | बात को समाप्त करने का प्रयास करते हुए उन्होंने अगला प्रश्न किया '- उसने पढ़ाई की ओर ध्यान देना कब प्रारंभ किया' ? उत्तर मिला ' यही करीब सातवीं -आठवीं कक्षा में , उसने एक फिल्म देखी जिससे उसके मन में देश की सुरक्षा करने की भावना जागृत हुई । असल में बचपन से कंप्यूटर पर हिंसक खेल खेलने के कारण उसके अंदर यह प्रतिभा हमेशा से थी | उसे यह भी समझ आ गया था कि यह पढ़े बिना संभव नहीं ,परंतु कभी भी उसने बहुत मेहनत नहीं की।
 वह हमेशा 70- 75 अंक लाने का प्रयास करता था क्योंकि इतने अंक ध्यान से परीक्षा के कुछ ही दिन पूर्व पढ़ना शुरू करके लाए जा सकते थे ,स्मार्ट वर्क करके । 

शिव प्रसाद जी इस बात को जानते थे कि बात को समाप्त करने के लिए वे अपने प्रश्न कम नहीं कर सकते ,क्या पता कब ये औरत क्या करे !आखिर इस बात से तो वे भी अवगत थे कि कई बार पहले भी इन्होंने पत्रकारों के प्रश्न का उत्तर हिंसक अंदाज में दिया है। उन्होंने अगला प्रश्न किया ' -क्या पुलिस- परीक्षा में उसको सफलता पहली बार में मिल गई '? नहीं ,पहली बार सफलता मिलने के बावजूद पेपर लीक होने के कारण सरकार ने री- एग्जाम करवाने का आदेश दे दिया ,री- एग्जाम का पेपर कठिन था और उसे सफलता नहीं मिली ,परंतु उसने बहुत परिश्रम किया और अंततः तीसरे प्रयास में सफल हुआ ।

शिव प्रसाद जी ने अगला प्रश्न पूछा ,' अब आप हमें उस हिंसा के बारे में बताएं ,उसका कारण बताएं..'
। शिव प्रसाद का प्रश्न खत्म होने से पहले ही शीला देवी जी की बेटी रमा वहां आ गई।शीला देवी जी ने उत्तर देते हुए बताया ,'चौक पर एक हनुमान मंदिर, मस्जिद के बगल में बनाया गया और लाउडस्पीकर पर पूजा भी होने लगी जिससे नमाज अदा करने में समस्या आने लगी और दोनों गुटों में झगड़ा हो गया ,और यह बात तो सब जानते ही हैं ,कैसे मेरे बेटे और उसके साथियों ने दोनों हो गुटों को शांत किया , कई लोग मुझसे कह रहे थे कि पत्थरबाज़ी में एक भी पुलिसवाला नहीं बच पाया ,पर मुझे विश्वास है ,मेरा बेटा अवश्य ही बच निकला होगा ।कुछ दिन बाद वह रक्षा बंधन पर रमा से राखी बंधवाने आएगा तभी सब मुझपर विश्वास करेंगे' |रमा की आंखों में आंसू आ गए शिवप्रसाद जी के इशारे पर कैमरामैन ने कैमरा रमा की ओर फोकस किया और शिवप्रसाद जी दबी हुई आवाज़ में कहने लगे 'आपके मोबाइल स्क्रीन पर अभी शहीद विजय सिंह की बहन रमा हैं ,धन्यवाद '।


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