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Aniruddhsinh Zala

Abstract Romance Inspirational

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Aniruddhsinh Zala

Abstract Romance Inspirational

रेगिस्तान की अनोखी प्रेमकथा

रेगिस्तान की अनोखी प्रेमकथा

5 mins
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         नयन अपने परिवार के साथ दर्शन करके जल्दी से हाइवे तक पहुंचने के लिए शाम के समय वीरान रेगिस्तान के छोटे रास्ते से गुजर रहा था। अचानक से रेगिस्तान का वातावरण पलट गया। भयंकर आंधी आयी। आगे कुछ भी नहीं दिख रहा था। 

रेगिस्तान का अनुभव न होने के कारण नयन गाड़ी की लाइट ऑन करके हिम्मत जुटाकर गाड़ी चलाता रहा। माता मयूरी और पिता महेशवर बहुत चिंतित हो गए थे। शहर में वैभवी बंगले में रहने वाले लोगों को थोड़ी सी मुश्किल भी ज्यादा लगती है।

       आंधी मे नयन कब रास्ते से भटक गया उसे पता भी नहीं चला और अब तो मोबाईल सिग्नल भी नहीं मिल रहा था। सूरज भी रेगिस्तान मे समाते हुए दिखा और अंधेरा होने लगा था। आंधी थोड़ी शांत होते ही गाड़ी रोककर मोहन निचे उतरा तो चारो और अंतहीन रेगिस्तान दीखता था। कोई रास्ता दिखाने वाला भी नहीं था।

     दूर से एक साइकिल आती दिखी। नजदीक आते हुए देखा तो नयन को आश्चर्य हुआ । एक साइकिल पर तीन लोग और पानी के बड़े केरबा भी दोनों तरफ लटके हुए थे. एक लड़की साईकिल चला रही थी.

    माता मयूरी ने लड़की को रोका तो लड़की बोली,

  " रास्ता भटक गईं है ना आप चलिए मेरी झोपडी पर सुबह ही रास्ता मिलेगा।"


    कोई दूसरा उपाय नहीं था। सब चुपचाप उसके पीछे चले। बहुत दूर एक छोटी सी झोपड़ी थी। लड़की ने पहुंचते ही अपनी माँ को कुछ कहा तो उसकी मा ने भी सामने आकर स्वागत किया.

    खटिया बिछकर तीनो को बिठाया और पानी का लोटा दिया.

 "बेटा तेरा नाम क्या है.? और यहां रेगिस्तान मे क्या करते हो आप? मयूरि ने उत्सुक होकर पूछा।

  "हमे अगरीया कहते है। हम यहां नमक की खेती करते है। आप बैठिये मे चाय बनाकर लाती हु।" घूंघट मे रहकर बोलकर उसकी मा चली गईं।

    दूर खेत मे वो लड़की अपने छोटे भाईओ के साथ नमक मे काम कर रही थी। पूनम की रात को चाँद भी जमकर रौशनी दे रहा था। नयन वहा गया उसे यह निस्वार्थ मदद करने वाली लड़की बहुत पसंद आयी। उसने उससे पूछा,

 आपका नाम क्या है.?

"काजल नाम है मेरा पर सब मुझे काजूडी कहते है।" 

  "बहुत सुंदर है आप। "नयन की आंखें मिली और काजल को भी नयन अच्छा लगा। चाँद के नीचे बिना बोले मुहब्बत की कहानी शुरू हुई।

  मां के पुकारते ही काजूडी दौड़ी और झोंपड़ी में जाकर चूल्हे पर चाय बनाकर लाई. बिना दूध की काली चाय पीकर भी सभी को ख़ुशी मिली।

    काजल की मा संतु ने बाहर चूल्हे पर भोजन बनाना शरू किया और बोली,

  "ये मेरी बेटी दिन रात मजदूरी करती है और यहां सभी गरीब झोपडे के बच्चो को पढ़ाती भी है। उसके पिता आज देर से आएंगे।"

काजल ने नयन को रेगिस्तान के नमक के बारे में सब दिखाकर समझाया। नयन बोला,

  "तुम पढ़ी लिखी लगती हो।"

"नहीं साहब गांव में दसवीं तक पढ़ी हूँ। आगे मजदूरी करने यहां आ गईं।"

 "तुम शहर में घूमना चाहती हो? " नयन ने बीच में पूछा तो दर्द से छलकती काजू बोली,

  "हमारे ऐसे नशीब कहा? हम तो रेगिस्तान के गरीब लोग है।"

   "तुम मुझे पसंद करती हो? सच बताना मैं तुझे बहुत पसंद करने लगा हूँ।"

   काजल गुस्से में बोली,

  "शहर के लड़के ऐसे ही होते है लड़की को पसंद करके घुमाकर छोड़ देते है।" काजल के भोलेपन पर नयन फ़िदा हो गया था वो बोला, 

 "सब ऐसे होंगे पर मैं वैसा नहीं हूँ। मैं तुझसे शादी करके दिल में सजाकर रखूंगा। "

  "मत करो ऐसा मजाक। पढ़ते समय ये सब सपने देखे थे पर हमारी हालत को देखकर कोई मुझे प्यार करे यह यकीन नहीं होता। तुम पढ़े लिखें हो हजारों लड़की तुम पर मरती होंगी।" काजल दुखी होकर बोली।

   "पर मैं सिर्फ तुम पे मरने लगा हूँ। ये चाँद गवाह है मेरे प्यार का। अगर तुझे मैं पसंद नहीं तो मना कर सकती हो।"

   "पागल हो तुम।" कहकर काजल शरमाकर भाग गईं।

   माता मयूरी और महेशवर रेगिस्तान के लोगो की मेहमान नवाजी देखकर बहुत प्रसन्न थे। नयन ने जाकर मयूरी के कान मे कुछ कहा तो मयूरी ने पति महेशवर के कान मे कुछ कहा और फिर दोनों नयन के सामने देखकर खुश होकर बोले।

   "प्यार को होने ही दो।"

काजल और संतु को आश्चर्य हुवा। मयूरी बोली,

  "हम अपने बेटे नयन के लिए आपकी बेटी काजल का हाथ मांगते है। प्लीज आप मना मत करियेगा।"

      "पर हम तो बहुत गरीब लोग।" बीच में रोककर मयूरी बोली,


"प्यार में गरीब अमीर का भेदभाव नहीं होता. मेरे बेटे को मैंने यही संस्कार दिए है। मेरे बेटे की पसंद हमारी पसंद। अब आप अगर हमारे बेटे को नापसंद करती है तो हम जबरदस्ती नहीं करेंगे।"


 "नहीं बहन..! अपनी बेटी सुखी हो रही हो तो एक मां कैसे मना कर सकती है पर हम दूसरों की तरह दहेज नहीं दे सकेंगे तो जरा उसके पिता को पूछना पड़ेगा"


     "अरे बहन कहा तो आपको आपसे हम एक रूपया भी नहीं ले सकते। " मयूरी बोली तो संतु ने खुशी में दूर खड़ी काजू की ओर देखा तो वह शरमाकर भाग गईं।

      नयन ने अकेले में दूर खड़ी काजल के पास जाकर उसके पैरो में झुककर कहा,

  "अब तो मुझे पसंद कर लो प्लीज। "

काजल उसके पास नीचे बैठकर नयन के पैर छूकर बोली,

  "तुम इंसान नहीं भगवान हो मेरे लिए। पर सच बताओं मुझ मे ऐसा क्या देखा जो मुझे इतना पसंद करते हो?"

  काजल की आंखे ख़ुशी मे चमक रही थी उसमे दिखती शर्म की छाया उसे और सुंदरता प्रदान कर रही थी।


   "तेरी सूरत पे नहीं हम तो तेरी सादगी, भोलेपन पर मरते है।" नयन का गाना रेगिस्तान मे गूंज उठा।

काजल बोली,

"सच मे प्यार इतना सुंदर और महान होता है।"

नयन उसके झुके हुवे मुखकमल को हाथो से उठाते हुए बोला,

  "अरे अभी तो थोडा प्यार को और हो जाने दो ये रेगिस्तान भी खिल जायेगा।"

   काजल ने आंखे बंद कर ली और नयन ने भी उसको अपने सीने से लगाकर सच्चा प्यार पाने की खुशि मे आंखे बंद कर ली।

       काजल के पिता मोहन के घर आते ही संतु ने सारी बात बताई की बेटी शहर मे शादी करके खुश रहेगी ये सुनकर उसने भी हा कह दी।

सभी के ह्दय ख़ुशीओ से छलक गए।

 मयूरी भागकर नयन काजल के चाँद के निचे हो रहे मिलन को देखकर जोर से बोली,

  " मोहब्बत को हो जाने दो। "

दोनों लज्जित होकर मयूरि के पैरो में झुक गए।

काजल और नयन के प्रेमरंग से सारा रेगिस्तान खिल गया।



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