प्यार एक दर्द
प्यार एक दर्द
चाहती हूँ मैं भी ज़ोर से खिलखिला कर हँसना, एक परिन्दे की तरह आसमानों में उड़ान भरना, एक बच्ची की तरह जिद्द करना जोर-जोर से रोना !
कोई हो जो हँसे मेरे साथ, भागें हम दूर तक फिर थककर बैठ जायें, जिद्द करूँ तो मना ले गलतियों पर डाँट ले, किन्तु
ये सब तो बस काश ! में ही सिमट गए !
कुछ चाहने की उम्र गई काफ़ी तो छिना उसने जिस लोग देने वाला कहते हैं ओर कुछ गहरे दर्द कुछ लोगों ने दिया जिसके ज़ख्म शायद जिंदगी के साथ ही जाएँ !
जिंदगी ने दिया क्या ? खोखली हँसी, ख़ुश रहने का नाटक इस नाटक में ही जीवन कट ही जायेगा !
सबक लिया क्या जीवन से ख़ुद से प्यार करना सीखो ,अपने से ज्यादा किसी को प्यार मत करो वरना वो बहुत दर्द देगा !
जितना ज्यादा प्यार उतना ज्यादा दुःख !!
