प्रेम की प्रथम अभिव्यक्ति
प्रेम की प्रथम अभिव्यक्ति
प्रेम कब हो जाये, कुछ पता नहीं। लड़कपन के प्रेम की बात ही कुछ निराली होती है। बात तब की है जब हम स्कूल में पढते थे। स्कूल में पढने वाली लड़कियां अक्सर मेरे इर्द-गिर्द मंडराती थीं पर तब हम यह नहीं जानते थे कि इसके पीछे प्रेम नामक बीमारी है। हम शुरू से ही बड़े सीधे सादे थे। लड़कियों से थोड़ा दूर ही रहते थे। पर लडकियां दूर नहीं रहती थीं। वे येन केन प्रकारेण नजदीक आ ही जाती थी। साथ पढते थे और इंटरवेल में साथ साथ खेलते भी थे।
एक दिन हम लोग पकड़म पकड़ाई का खेल रहे थे और एक लड़की जिसका नाम शर्मीली था, वह दाम दे रही थी यानि पकड़ने वाली थी। एक समय ऐसा आया जब हम उसकी पकड़ के दायरे में थे मगर उसने हमें नहीं पकड़ा, बल्कि उसने किसी अन्य छात्र को पकड़ लिया। हम आश्चर्य से उसे देखते रह गये। शर्म से उसने अपनी नजरें नीची कर ली। सब बच्चे आपस में "कानाफूसी" करने लगे। उन्होंने दबी जुबान में पता नहीं क्या कहा ?
अगले दिन हमारे एक खास दोस्त ने कहा कि वह लड़की शर्मीली मुझे चाहती है। मैंने उसकी बात को इगनोर कर दिया। तब उसने एक दो उदाहरण और दिये कि उस दिन उसने मेरे साथ ऐसा किया, वैसा किया। मेरे दोस्त का कहना था कि वैसे तो और भी लडकियां हैं जो मुझे चाहती हैं पर शर्मीली सबसे ज्यादा चाहती है। मेरे मन में उथल पुथल होने लगी और पढने से मन उचटने लगा।
एक दिन हम दोनों (मैं और शर्मीली) पैदल पैदल स्कूल जा रहे थे। शर्मीली मुझसे थोड़ा आगे थी। अचानक जोर की बारिश आ गई। मैं दौड़कर एक शेड के नीचे खड़ा हो गया और शर्मीली को भी डरते डरते वहां बुला लिया। वह भी लजाती लजाती शेड में आ गई। थोड़ी देर तक हम दोनों खामोश खड़े रहे। मैंने एक निगाह उस पर डाली पर उसने अपनी निगाह जमीन में गड़ा रखी थी।
मैं कांपते हुए उसके नजदीक गया और धीरे से पूछा "उस दिन आपने मुझे पकड़ा क्यों नहीं" ?
इस बात पर वह लजा गई और अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा छुपा लिया। मैंने देखा कि वह बीच बीच में अपनी उंगलियों के बीच से मुझे देख लेती थी। मैंने उसके हाथों पर अपने हाथ रख दिये। उसने घबरा कर मुझे देखा और कहा "ये क्या कर रहे हो" ?
मैंने भी कांपते हुए कह दिया "हाथ पकड़ रहा हूं"।
वह एकदम से चुप हो गई और फिर बोली "क्या हमेशा के लिए" ?
मैंने घबराकर उसके हाथ छोड़ दिये। वह इससे और भी घबरा गई और रोने लग गई। तब मैंने आगे बढ़कर उसका हाथ थामकर कहा "हां, सदा के लिए"।
फिर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। पर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। सीनियर क्लास पास करते ही मैं इंजीनियरिंग की पढाई करने दूसरे शहर चला गया और इस तरह हमारा फिर कभी मिलन नहीं हुआ। पहले प्रेम की अभिव्यक्ति हमेशा याद रहती है मुझे।

