नव्या एक रहस्य
नव्या एक रहस्य
राजस्थान
खंडाला डिस्ट्रिक,
आमेर विश्विद्यालय,,
वर्तमान समय 2025
सभी स्टूडेंट्स क्लासों में बैठे हुए थे तभी अचानक कॉलेज की प्रध्याय मिस साक्षी क्लास रूम में आई
सभी स्टूडेंट्स: गुड मॉर्निंग मेंम
मिस साक्षी: वेरी गुड मॉर्निंग
आल स्टूडेट्स आज आपकी हिस्ट्री की क्लास में लूंगी
एक विद्यार्थी: मेंम आप हिस्ट्री में हमें कया टॉपिक पढ़ाएंगी,
मिस साक्षी: में हमारे महाविध्यालय का इतिहास आपको पढ़ाऊगी
दूसरा विद्यार्थी: महाविद्यालय का इतिहास पढ़ाएंगी वो कैसे मेंम,
मिस साक्षी: ऑल स्टूडेंट्स इन स्टेंडप,
और मेरे साथ चलो,
सभी बच्चो को मिस साक्षी एक बड़े से हॉल में लें गईं
हॉल में बहुत सारी तस्वीरें लगी हुई थी और उन तस्वीरों के नीचे नाम लिखे हुए थे
विद्यार्थी: मेंम इतनी सारी तस्वीरें यह सभी कोन है,
मिस साक्षी: यह सभी इस महाविध्यालय के पूर्व व सफल स्टूडेंटस है,
इनमे से कई ips, IAS, vakil, writer, आदि है,
मिस साक्षी एक एक करके सभी तस्वीरों के बारे में बताने लगी,
एक तस्वीर को छोड़कर उसने सभी तस्वीरों के बारे में बता दिया,
एक विद्यार्थी: (उस तस्वीर की ओर इशारा करते हुए) मेंम इनके बारे में हमें आपने नहीं बताया यह कोन है,
मिस साक्षी: यह है आ,,,
तभी अचानक फोन की रिंग बजी मिस साक्षी बोली
हेलो,
आगे से आवाज़ आई साक्षी में आनंद,
साक्षी एक पल के लिए मोन हो गई,
फिर बोली हेलो आनंद,,,,,,
आगे से आवाज़ आई हा साक्षी में आनंद में आ रहा हूं कल खंडाला,
आनंद इतना ही बोला था तभी कॉल कट गया,
एक विद्यार्थी: मेंम आप हमें इनके बारे में कुछ बता रही थी , कोन है यह ?
मिस साक्षी: इस तस्वीर में जो हैं वो कल हमारी कॉलेज में आ रहें हैं उन्हें ही पूछ लेना जो तुम्हें पूछना है,।
अगले दिन सभी स्टूडेंट्स कॉलेज हॉल में उपस्थित होकर एक ऐसे व्यक्ति का इंतजार करने लगें जिसे वो जानते भी नहीं थे,
आचनक मिस साक्षी के साथ एक व्यक्ति आता हुआ दिखाई दिया,
मिस साक्षी क्लास में आई और आनंद को संबोधित करते हुए बोली यह है इस महाविध्यालय के पूर्व छात्र व मेरे एक अच्छे मित्र मिस्टर आनंद,
सभी छात्रो ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया,
फिर एक एक कर उनसे मिलने लगें, तभी एक स्टूडेंट बोला
स्टुडेंट: सर आपने ऐसा क्या किया था इस महाविद्यालय व इस क्षेत्र खंडाला के लिए की आप यहां के लोगों के दिलो में राज करने लगें,
सभी आपको अपना भगवान मानते हैं।
दूसरा स्टुडेंट: हा सर और आप ना ही कोई ips ya IAS हो फिर भी आपकी इतनी बड़ी तस्वीर आपकी यूनिफॉर्म यहां क्यू लगाई गईं है,
तीसरा स्टुडेंट: इसके साथ ही सर महाविद्यालय ने आपनी जीवनी भी प्रकाशित की है,
आनंद: रुको रुको मुझे पहले साक्षी से कुछ बात करनी है बाद में मैं आप सभी के सवालों के जवाब दूंगा,
साक्षी: हा बोलो आनंद क्या कहना है तुम्हें,
आनंद: साक्षी वो वापिस आने वालीं है
साक्षी: (आश्चर्य में) क्या कैसे तुमने तो उसे आज़ाद कर दिया था ना
आनंद: मुझे मालूम है तुम सभी के मन में बहुत सवाल उठ रहे हैं
अगर आपको इन सभी सवालों के जवाब चाहिए तो आपको सब शुरु से जानना होगा,
यह कहानी शुरु होती है आमेर विश्वविद्यालय से,
जो राजस्थान के खंडाला डिस्ट्रिक में स्थित है।
प्रथम चरण: 2012,
बात हैं 2012 की जब मैं स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद
बी ए हेतु खंडाला के आमेर विश्विद्यालय मैं पहुंचा,
यहा आने के बाद मुझे पता चला की पूरा खंडाला ही अंधविस्वासो से भरा पढ़ा था, यहां शिक्षा से लेकर साधना तक हर चीज अंधविश्वास से पूर्ण थीं,
कॉलेज में मेरी मुलाकात हुई राहुल,रवी, धरम और साक्षी से
यह थे कॉलेज के चार अलग नमूने।
चारो में अपना अलग टेलेंट था, राहुल अपने सौंदर्य से,
रवी अपनी आबाज से, धरम अपने नाम ही की तरह अपनी धार्मिकता से और साक्षी अपने दिमाग़ से सारी कॉलेज में प्रसिद्ध थे,।
में इनसे दोस्ती कर इनके फ्रेंड ग्रुप में शामिल हो गया,।
जैसे जैसे दिन गुजरते गए वैसे वैसे में इस कालेज और क्षेत्र को जानता गया।
यह कहानी नव्या की हैं, जिसका आरंभ मूझसे ही हुआ था, में पुण रूप से अंधविश्वास का विरोधी था, मुझे रूहानी शक्तियों पे विस्वास नहीं था लेकीन जब मेरा सामना नव्या से हुआ तब
मुझे इन सब को मानने पर मजबूर होना पड़ा।
यह कहानी कोई काल्पनिक नही एक सच्ची घटना है जो मेरे साथ हुई थीं
मेरा जब नव्या से सामना हुआ था वो तारीख थी 11 मार्च 2012 इस दिन को में कभी भी नहीं भूल सकता
सुबह का वक्त था हम सभी हिस्ट्री की क्लास ले रहे थे अचानक मोसम बदल गया , तभी साक्षी बोली
साक्षी: यार इतनी जल्दी मोसम कैसे बदल सकता है,
रवी: यार यह राजस्थान है यहां मोसम का क्या भरोसा कभी भी बदल सकता है।
हम सभी मौसम को देखने लगे हमने देखा की आसमान काला हो गया है और चारो ओर एक धूल भरा तूफान उड़ रहा है,
सभी अपनी अपनी क्लासो में घुस गए में खिड़की की ओर रुख करके खड़ा था तभी मेने देखा की उस तूफान में काले वस्त्र पहनें हुए एक लड़की भाग रही है और उसके पीछे कुछ लडके भाग रहे हैं मेरी उन्हें देखकर चीख निकल गईं और में उसके पीछे दौड़ा,
मुझे घबराकर दौड़ते हुए देखकर सभी साथी मेरे पीछे दौड़े
मेने देखा
की जो लड़के उस लङकी के पिछे भाग रहे थे वो अचानक कही गायब हो गय है वो लडकी दौड़ते हुए गिर गई है में उसके पास गया और मेने कहां की तुम कोन हो
उसका सिर जमीन की तरफ था तथा वो एक अलग भाषा में कुछ बोल रही थी उसकी एक ही बात मुझे समझ आई थीं
ओर वो थीं तुम सभी मरने वाले हो.
में आ रही हु वापस।
हम सभी ने उस लङकी को देखने की कोशिश की ,लेकीन हम उसकी लाल आंखो के सिवा कुछ देखते तभी एक तेज हवा का झोका आया और वो लड़की कही गायब हो गईं
सभी लोग उसकी बात सुनकर घबरा गए,
मुझको धरम ने बताया कि हर सो साल में एक बार चंदर अमावस्या आती है इस दोरान खंडाला पूर्ण रूप से खाली होता है। क्युकी यहां की मान्यता है की इस समय में एक रुह आज़ाद होती है जो सभी को मारने लगती हैं। ओर मुझे लगता हैं की यह लड़की वही है,
धरम की बात सुनकर मेरा रोमांच बढ़ गया में उस रूह के बारे में जानना चाहता था लेकिन मेरे पास कोई साधन नहीं था उसके बारे में जानने हेतु।
तभी मुझे हमारे कॉलेज बोचमैन से पता चला की हमारी कॉलेज लाइबरी में एक क़िताब हैं जिसमें इस रूह के बारे में सब कुछ लिखा हुआ है।
मुझे क्या किसी को भी मालुम नही था कि कॉलेज में कोई लाइबरी है यह लाइबरी कॉलेज के पिछे थीं
में अपने दोस्तो के साथ उस लाइबरी में पहुंच गया वो लाइबेरी बहूत सालो से बन्द थी हम सभी लाइबरी के अंदर पहुंचे और उस किताब को खोजने लगे, लाइबरी पूरी तरह खडहर बन चुकीं थीं चारो ओर मकड़ी के जाले लगे हुए थे किताब को खोजते हुए में बुक चेयर से टकरा गया और एक किताब नीचे गिर गई में उसे खोलने ही वाला था तभी साक्षी की आवाज़
साक्षी: आनंद जल्दी आओ किताब मिल गईं मुझे ,
हम दौड़कर उसके पास गय और उस क़िताब को देखने लगे
राहुल ने कहा भाई इसे देख क्या रहे हों जल्दी खोलो और पढ़ो इसमें क्या लिखा हुआ है।
मैने किताब खोली ओर पढ़ने लगा उसमे लिखा था
(फ्लैशबैक)
मैं भैरव सहारन गांव के सरपंच का लड़का,
इस गांव को और आने वाली पीढ़ियों को एक ऐसी रूह से बचाने के लिए यह क़िताब लिख रहा हूं जिसका कोई अंत ही नहीं है,
यह बात है सहारन की रहस्यमई हत्याओ की
16 वी सदी का दौर था समाज में शिक्षा का आगमन तो हो गया था लेकीन महिलाओं में इसका कोई पर्चलन नहीं था
शिक्षा पुरुषो तक ही सीमित थीं शिक्षा के बढ़ते प्रभाव ने महिलाओं को भी अपनी ओर आकर्षित करना शुरु कर दिया
नव्या हमारे गांव की पहली ऐसी लड़की थी जिसने शिक्षा प्राप्त करने के लिए अपना क़दम आगे बड़ाया,
इस दौर में समाज पूर्ण रूप से धार्मिक था समाज में अनेक प्रथाएं फैली हुई थीं जिसमे जाती प्रथा, बाल विवाह प्रथा, सती प्रथा, दहेज प्रथा आदि प्रमूख थीं गांव में हिंदी भाषा का प्रभाव कम था तथा हमारे गांव की भाषा लिपात्त़मक थीं पाढशाला मे भी हिंदी को कम महत्त्व दिया जाता था लीपात्तमक भाषा ही अधिक पढ़ाई जाती थी
नव्या पढ़ाई में सक्षम थी और अपनी मनोहिक स्थिति से शिक्षा प्राप्त करती थी
गांव का एक लड़का "अभी" जो नव्या के साथ ही पढ़ता था पढ़ाई में हमेशा नव्या की सहरान्ना होती थीं जिस कारण अभी उससे जलने लगा था एक दिन जब नव्या पाढशाला से लोट रही थीं तभी अभी ने उसे रोक लिया
ओर उसे धमकाने लगा थी तुम पढ़ाई छोड़ दो
लेकीन नव्या ने उसे अनदेखा कर कर वहा से चली गई,
अभी ने गांव में यह अफवाह फैला दी की नव्या एक चरित्र हीन लड़की है जिसे देखकर बाकी लड़कियां भी गलत राह पर चल रही है गांव की पंचायत हुई, पूरा गांव इकठ्ठा हुआ,
पंचायत ने नव्या को दोषी करार दीया,
गांव वालो ने एक साथ कहां की इस लड़की को एसी सजा दो की ऐसी गलती कोई ना कर सके ।
गांव के सभी पचों ने काफी समय तक बार्तलाब की और फैसला लिया की इस लड़की को सारे गांव में वस्त्र उतारकर फिरना होगा ताकि ऐसी हरकत कोई और ना कर सके,।
नव्या और उसके माता पिता ने बहुत कोशिश की अपने आप को निर्दोष साबित करने की लेकीन उनकी बात किसी ने नहीं मानी।
नव्या को बेजत करके पूरे गांव में घुमाया गया,
इस सदमे को उसके माता पिता सह नहीं पाए ओर दोनो ने गांव के कुए में डूबकर आत्म्हत्या कर ली,
नव्या अंदर से पूरी तरह टूट चुकीं थीं उसके अंदर बदले की ज्वाला भड़क रही थीं नव्या ने सभी गांव वालों से कहा की में इस गांव को बर्बाद कर दुंगी में वापिस जरूर आऊंगी और इसी आक्रोश में उसने गांव के पीपल पर लटक कर आत्महत्या कर ली,।
उसकी मौत के कुछ ही दिन बाद अभी की लास उसी पीपल पर लटकी मिली
तथा गांव में धीरे धीरे लोगो की अघात मौते होने लगी थीं
गांव में अचानक मोते होने से चारो ओर भय फैल चुका था
सभी को पता चल गया था की नव्या वापिस आ चुकी है और वही यह मौते कर रहीं हैं
नव्या ने लगभग आधे गांव को शमशान बना दिया था
नव्या से बचने के लिए सभी गांव वाले गांव के तांत्रिक के पास गये, और उसे सारी बात बताई,
तांत्रिक ने अपनी शक्तियों से नव्या को अपने वस में कर लिया और हमेशा के लिए केद कर दीया नव्या ने तांत्रिक को सारी बात बताई की किस तरह गांव वालों ने उसे सभी के सामने अपवित्र करके उसकी मौत का कारण बने।
तांत्रिक ने कहा कि मैं अपनी बात वापस तो नही ले सकता लेकीन में तुम्हें वरदान देता हू की तुम हर सौ साल में एक बार
चंद्रमा ग्रहण से लेकर अमावस्या तक 15 दिनों के लिए आजाद हो पाओगी।
और इतना कह कर नव्या को उसी पीपल में कैद कर दिया जहां नव्या ने आत्महत्या की थी
गांव के सरपंच ने तांत्रिक से कहा की नव्या से गांव वाले तो बच गए लेकीन भविष्य में आने वाली पीढ़ियो को भी इसका सामना करना पड़ेगा आप ही इसका कोई उपाय बताइए जिससे हम हमारी आने वाली पीढ़ियों को बचा सके।
तांत्रिक ने नव्या से बचने का तरीका बताया उन्होंने कहा कि
उससे बचने के लिए ब्रह्म विधि,,,,,
(वर्तमान समय)
अरे यार यहां तो आगे के पेंच ही नहीं है यहां के पेंच तो फटे हुए हैं,।
रवि: बीच के पेंच फटे हुए है ना उस के आगे के तो पढ़ो।
आंनद: हां।
इस विधि से नव्या पूर्ण रूप से पवित्र हो जाएगी और
इस संसार से आज़ाद हो जाएंगी,।
रवि: आनंद यह ब्रह्म विधि क्या हैं और फटे हुए पनो में क्या लिखा होगा
धर्म: अब हमें कोई नहीं बचा सकता खंडाला अब समशान बनने वाला है।
साक्षी: यार तुम चुप रहो, कोई नहीं मरेगा।
खंडाला को अब हम बचायेंगे,।
आनंद: लेकिन साक्षी कैसे, तांत्रिक ने जो तरीका बताया था
वो तरीका तो किताब में है नही।
साक्षी: लेकिन उस तरीके का एक सबूत तो है ना यह ब्रह्म विधि इसी से बता चल ही जाएगा।
राहुल : में एक ऐसे व्यक्ति को जानता हूं जो इस ब्रह्म विधि के बारे में हमे कुछ बता सकता है।
आनंद: कोन।
राहुल: हिस्ट्री प्रोफेसर डॉ मोहन,
चलो हम उनसे मिलते हैं।
हम सभी प्रोफेसर के पास गए और उन्हें ब्रह्म विधि के बारे में पूछा,
उन्होंने हमे बताया की किसी व्यक्ति द्वारा अपनी ही बली देने के तरीके को ब्रह्म विधि कहा जाता हैं।
मेने कहा की इस विधि को करने का पूरा तरीका क्या है
तो प्रोफेसर ने बताया की जो तुम्हे काम करना है उस काम की जगह तुम्हे पहले यह मंत्र तीन बार पढ़ना होगा
" अस्वम ब्रह्म विधियम"
"नव्य अपार शक्तियम"
"विधि उक्त रकतम "
"भरण मरण जलाल मुकतम "
और बाद में अपनी बली देनी होगी,
तथा किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा लाश को जलाना होगा इसके बाद ही यह विधि पूर्ण होगी,
शहर में मौतो का खेल आरंभ हो चुका था लगभग 10 दिनों में
बहुत सी हत्याएं हो चुकी थी,
मुझे मालूम था की अपने प्राण त्याग कर गांव को कोई नहीं बचाने वाला।
मैने अपने दोस्तो से कहा की वो विधि करने में जाऊंगा
सभी ने एक साथ कहा की नहीं तुम भी नही जाओगे
मैने कहा कि में संभाल लुगा मुझे जाने दो इतना कह कर मेने साक्षी के कानो में कुछ कहा,,,,,,,,
ओर विधि की तयारी करने चला गया,
वैसे तो आज अमवस्या थी नव्या के कैद होने की रात लेकिन मुझे उसे पवित्रता देकर इस संसार से मुक्ती देनी थी शाम हों चुकी थी में खंडाला के बीचों बीच पहुंच गया।
सारे खंडाला में यह सूचना पहुंचा दी गईं थी की कोई भी अपने घर से बाहर नहीं निकलेगा,
में पीपल के नीचे गया और जोर जोर से वो मंत्र बोलने लगा
" अस्वम ब्रह्म विधियम"
"नव्य अपार शक्तियम"
"विधि उक्त रकतम "
"भरण मरण जलाल मुकतम"
और ज़ोर से अपने गले पर बार किया साक्षी दौड़कर मेरे पास आई और मेरे शरीर को जला दीया,,।
तथा बहा से भाग गईं,
अचानक एक काला धुआं आकाश में उड़ने लगा
और एक स्त्री में बदल गया वो ज़ोर से बोली
में आज़ाद हो गईं हूं अब में इस जगह को बर्बाद कर दू की।
विधि के द्वारा उत्पन्न होने वाली शक्तियों को अपने अंदर समाने के लिऐ उसने अपने दोनो हाथ फैलाए,,
लेकिन एक भी शक्ति उसके अंदर नहीं समाई तथा इसके विपरित पीपल से एक रोशनी निकली और नव्या को अपने अन्दर समाने लगी नव्या जोर जोर से चिलाने गली
मैने उसके साथ छल किया था मुझे डर था की कुछ गड़बड़ ना हो जाए उसी दिन मैने खंडाला छोड़ दिया ,,
लेकिन उसकी अंतिम बात मुझे आज भी याद है
उसने कहा था
मैं वापिस जरुर आऊंगी ।
(The end )
The end लिखने से यह मत समझना की कहानी खत्म हो गईं है यह तो बस एक छोटी सी शुरुआत थी कहानी अभी बाकी है।

