STORYMIRROR

Bharat Thacker

Abstract Tragedy

4  

Bharat Thacker

Abstract Tragedy

मुंह मीठा

मुंह मीठा

2 mins
272

अरे बेटा, हर्षद, मुंबई से कब आए? तुम्हारी कोई खबर ही नहीं थी। हमने सुना कि तुम्हारी शादी हो गई है। बेटा, तुमने तो शादी का मुंह भी मीठा नहीं कराया !

मोहन अंकल, इतनी बातें कर रहे थे कि, हर्षद को समझ नहीं आ रहा था, कहां से शुरू करें? मोहन अंकल के चेहरे पर मीठा खाने की ललक, झलक रही थी।

कुछ असमंजस में हर्षद ने झोले से पैकेट निकाला और मोहन अंकल के हाथ में थमा दिया।

हर्षद करीब डेढ़ साल के बाद, अपने होमटाउन लौटा था ! उसकी पत्नी हर्षा, उनके जीवन में तूफान की तरह आई और आंधी की तरह चली गईं।

विवाह के तुरंत बाद, बहुत जलदी एहसास हुआ कि दोनों में किसी तरह का मेल नही है, दोनों का रहन-सहन एसा था की दोनो एक दुसरे को सहन नहीं कर पाते थे! दोनों एक-दूसरे से इतने तंग आ गए थे कि जिंदगी जंग सी हो गई थी! कुछ ही समय में दोनों तलाक के लिये आगे बढ गयें।

ईश्वर में कम आस्था रखने वाले हर्षद ने, मनत ले ली कि, अगर मैं इस यातना को पार पा गया तो, मैं क्षेत्रपाल दादा के पास पैदल दर्शन करने आउंगा और मिठाई चढ़ाऊंगा। उनके तलाक का आदेश हो गया था! इसलिए वह क्षेत्रपाल दादा के दर्शन के लिए आए और मिठाई का चढावा दे के एक पैकेट अपने लिए रख लिया ताकि कुछ समय बाद वे मिठाई के असली स्वाद का आनंद ले सकें।

लेकिन, मोहन अंकल ने जब शादी की मिठाई मांगी, तो अनायास ही वह पैकेट उन्हें दे दिया! मोहन काका को क्या पता था कि, उन्हें जो मीठा मुंह मिला है वह शादी का नहीं, तलाक का है।

कहीं ये गीत चल रहा था

तुझसे नाराज नहीं जिंदगी, हैरान हुं मै

तेरे मासुम सवालों से परेशान हुं मै


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Abstract