माँ -भाग ३
माँ -भाग ३
कुछ दिनों बाद जब कुतिया के बच्चे बड़े हो गए तो एक दिन माँ के साथ कहीं और चले गए। अंकित को अब पशुओं और पक्षिओं को देखने और उनका व्यवहार जानने में बड़ी दिलचस्पी हो गयी और वो पशु पक्षिओं के फोटो और वीडियो बनाने में काफी मशगूल रहता।
एक दिन जब अंकित ऑफिस से घर आया तो काफी थका हुआ था। मधु को भी दो तीन दिन से बुखार चल रहा था और वो अपने कमरे में ही लेटी हुई थी। इतने में विशु अपने कमरे से आया और अंकित से आइसक्रीम दिलवाने के लिए बाजार ले जाने की जिद करने लगा। अंकित इतना थका हुआ था कि उसने साफ़ इंकार कर दिया। विशु मुँह बनाकर माँ के कमरे में चला गया। अंकित सोफे पर बैठा बैठा ही सो गया। जब उसकी आँख खुली तो विशु आइसक्रीम खा रहा था। वो समझ गया कि मधु ही बाजार जाकर आइसक्रीम लेकर आई है। वो मधु के कमरे में गया और उससे कहने लगा कि वो बीमारी में बाजार क्यों गयी उससे ही कह देती। पर मधु ने बहाना बना दिया कि आप सो रहे थे और ये बहुत जिद कर रहा था तो मैं ले आई। मुझे वैसे भी कोई परेशानी नहीं हुई, दो दिन से बिस्तर पर लेटे लेटे वैसे भी बोर हो रही थी। पर अंकित जानता था कि मधु एक माँ है और माँ अपने बच्चे के लिए अपनी असुविधा नहीं देखती।
कुछ दिन बाद जब मधु ठीक हो गयी तो सुबह सुबह वो विशु को बाहर सड़क पर साइकिल चलाना सिखा रही थी। अंकित ने जब देखा तो उसे अपने गांव के दिन याद आ गए जब वो भी सात आठ बर्ष का था और उसका माँ भी उसे साइकिल चलना सिखाती थी। उस समय गांव की सड़कें भी बहुत उब्बड़ खाबड़ होती थी और वो साइकिल से रोज दो तीन बार तो वो गिर ही जाता था। तब उसकी माँ उसे ये कहकर दिलासा दे देती थी कि चींटी मर गयी और एक फूँक मार देती थी। उसी से ही उसका दर्द चला जाता था।
कुछ दिन बाद एक बिल्ली ने उनके गैराज में बच्चे दे दिए। अंकित ने जब गैराज में पहली बार उन्हें देखा तो बिल्ली गुर्राने लगी पर जब अंकित ने उसे दूध डाल दिया तो वो बिना किसी हिचक के अंकित के पास आने लगी। दिन में तीन बार वो दरवाजे पर आ कर मयायूं म्याऊं करती और अंकित उसे दूध डाल देता। दूध पीकर वो चली जाती और फिर अपने बच्चों को दूध पिलाती। एक दिन जब वो दूध के लिए आई तो बच्चे भी उसके साथ थे। अंकित ने बर्तन में दूध डाल दिया। बिल्ली पीछे हट गयी और बच्चों को पहले दूध पीने दिया और बाद में बचा खुचा दूध खुद पी लिया। अंकित को मधु की बातें याद आने लगीं कि कैसे जब कोई विशु की पसंद की सब्जी बनती है तो मधु पहले उसे दे देती है ताकि अगर उसे अच्छी लगे तो पहले वो भर पेट खा ले और उसके बाद की वो बची हुई सब्जी खाती।
बिल्ली और बच्चे गैराज में आठ दस दिन रहे। इस दौरान अंकित ने देखा कि कैसे माँ अपने बच्चों को दीवार पर चढ़ना सिखाती है और एक बार तो वो उन्हें पक्षिओं को पकड़ना भी सिखा रही थी। बच्चे उसकी नक़ल करके खेल खेल में सब सीख रहे थे। अंकित अब जानवरों और पक्षी माँ के व्यवहार की मनुष्य के व्यवहार से तुलना करता और उसे दोनों तरह की माँ एक सी लगतीं। वो अब जानता था के माँ कोई भी हो आप भूखी रह कर भी बच्चे को पहले देती है।
