Babita Kushwaha

Drama


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Babita Kushwaha

Drama


लॉकडाउन डे 18

लॉकडाउन डे 18

2 mins 159 2 mins 159

डियर डायरी,


जब भी देश में कोई बदलाव होता है अरे देश में ही क्यों किसी के जीवन में कुछ भी बदलाव आया नही की अफवाह उड़ने लगती है। कई बार यह अफवाहें गंभीर रूप भी ले लेती है। ऐसी ही एक अफवाह जो मेरे करीबी रिश्तेदार के साथ हुई मैं अपनी डायरी में लिख रही हुं।


मेरे चाचाजी जो कुछ दिन पहले ऑफिस के काम से ग्वालियर गए हुए थे। तभी लॉकडाउन लग गया और वो वही फस गए। किसी तरह वहाँ से सागर अपने घर आने के लिए कलेक्टर से परमिशन मिली।


ऑफिस वालो ने उन्हें लेने के लिए गाड़ी भी भिजवा दी। आज के समय में देश मे जो हालात है उसमें सतर्कता और बचाव ही इलाज है यह सोचकर चाचाजी ने हॉस्पिटल जा कर एक बार चेकअप करवाना उचित समझा।


हॉस्पिटल स्टाफ को जब पता चला कि वह 10 दिनों तक ग्वालियर रह कर आये है तो उन्होंने सतर्कता के तौर पर जब तक टेस्ट रिपोर्ट न जाये तब तक उन्हें हॉस्पिटल में ही क्वारंटाइन कर लिया। इसी बीच किसी ने अफवाह फैला दी कि उन्हें कोरोना वायरस हो गया है इसलिए हॉस्पिटल में रोका गया है जबकि ऐसा कुछ नही था।


अफवाह आग की तरह इतनी फैली की रिश्तेदारों और दोस्तों के फोन आने शुरू हो गए। रिश्तेदार कभी चाचाजी को फ़ोन करते कभी उनके परिवार वालो को। सब अपने अपने स्तर पर सलाह और सांत्वना दे रहे थे जैसे उन्होंने खुद हॉस्पिटल आ कर कोई गुनाह कर दिया हो।


चाचाजी इस सब से बहुत ज्यादा परेशान हो गए अब तो उन्हें भी डर सताने लगा की सच में मुझे वायरस तो नही हो गया। आखिर मजबूर हो कर उन्हें अपना फ़ोन बंद करना पड़ा। दो दिन बाद उनकी सारी रिपोर्ट्स नॉर्मल आई फिर भी डॉक्टर ने कुछ दिनों तक उन्हें होम आइसोलेशन में ही रहने की सलाह दी। जब घर पहुँचे तो पड़ोसी उन्हें अपनी खिड़कियों से ऐसी नजरो से देख रहे थे जैसे वो बहुत बडा अपराध कर के आये है भले ही वो एकदम स्वस्थ है लेकिन अब कोई मानने को तैयार नही है।


अपनी जलन दुश्मनी या बदले की भावना या मनोरंजन के लिए कुछ लोग इतना गिर जाते है की किसी इंसान के चरित्र, छवि या उसे व्यक्तिगत रूप को भी नुकसान पहुँचा देते है। सिर्फ अफवाहें फैलाने वाला ही गुनहगार नही होता, उसके झुठ को सह देने वाले भी उतने ही दोषी होते है।


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