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Dr. Kusum Joshi

Drama

3  

Dr. Kusum Joshi

Drama

कुछ कहना था

कुछ कहना था

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      हां है तो वही ..पच्चीस साल का अंतराल..पर मेरी आंखें धोखा नही खा सकती.., साकेत मन ही मन बुदबुदाया , थोड़ी मोटी हो गई है,परिवार और मातृत्व का सुख झलकता है चेहरे पर.. नाम.. ? कैसे भूल सकता हूं...सर में हल्की सी चपत लगाई साकेत ने...चारु.. हां...हां..चारु,

  "चारुऊऊ"... साकेत अनायास ही आवाज लगा बैठा ,वही होगी तो कन्फर्म हो जायेगा , उसके मन ने भी उसको समर्थन दिया,

   नाम सुनते ही 'वो' पीछे मुड़ी..उसकी आंखों में आश्चर्य और अजनबीपन भरा था, कुछ क्षण आवाक नजरों से आवाज लगाने वाले अजनबी को देखती रही...धीरे धीरे आंखों का अजनबीपन आश्चर्य में तब्दील हो रहा था , होंठ हिले "ओह साकेत.. तुम..यहां...इतने सालों बाद..अटक अटक के बोलती चारु अपना आत्मविश्वास जमाने लगी ।

  "मैं सही था" साकेत ने मन ही मन अपनी यादाश्त का शुक्रिया अदा किया, "कैसी हो चारु"?

  "मैं तो ठीक हूं ..पर तुम यहां दिल्ली में कैसे? इतने सालों बाद..." ,चारु हैरान सी बोली।

  "कुछ ऑफिशियल काम के सिलसिले में आया था , फ्लाइट रात नौ बजे की है, तो आज शाम तक फुरसत में था सोचा कनाट प्लेस में तफरी कर ली जाय,..तुम दिल्ली वाले भी अकेले निकल आते हो तफरी के लिये।

  चारु धीरे से मुस्कुराई , "कितने साल गुजर गये..लगभग पच्चीस साल ,अब मुलाकात हुई तुमसे ,मैं तो हर साल मुम्बई आती हूं पर तुम कभी मिले नहीं ..",न कोई खबर..,

  उदासी भरी आवाज दूर से आती महसूस हो रही थी साकेत को , लगा सालों पहले मेरी तरह शायद उसे भी कुछ कहना था ..वो कह नहीं पाई । अपने मनोभावों को पलभर में झटकते हुये बोला "मैं असल में जर्मनी में हूं , छुटका विनय मुम्बई में ही है,उससे ही मिलने जा रहा हूं"।

   शाम को घर आ जाओ..लोधी कॉम्पेक्स में है हमारा बसेरा ,सौरभ से भी मुलाकात हो जायेगी,खूब सारी बातें करेगें।

   अरे नही , आज तो सम्भव नही होगा, नेक्स्ट टाईम जब भी आना होगा,

  "चलो नल्ली तक, बेटी की सगाई है अगले हफ्ते ,साड़ी तैयार करने को दी थी, फिर कही चाय कॉफी लेते हैं" चारु भी वर्तमान में लौटते हुये बोली।

  "अरे वाह बधाई ! समय का घोड़ा सच में सरपट भागता है", तो पहले चलो बरिस्ता में ग्रीन एप्पल लेमोनेड की चुस्की ली जाय", 

   "अरे अभी तक भी याद है" , "चलो मैं पिलाती हूं तुम्हारी फेवरेट कोल्ड कॉफी बरिस्ता ब्लास्ट", चारु हंसते हुये बोली,

  "अब कुछ नही अब तो बस नीबू पानी विदाउट शुगर साल्ट"साकेत उदास हंसी हंसते बोला।

  "तो फिर रहने ही दिया जाय ,पहले बिटिया के काम करने जरुरी है", चारु कुछ आगे निकलते हुये बोली।

    

   "हां सही कहा चारु.....अब यही जरूरी है , वैसे भी वक्त तो कभी मेरी मुठ्ठी में था ही नहीं ...अब भी नहीं ...अब नसीब में कॉफी भी नहीं ", और जोर से हंस पड़ा साकेत , मुझे भी होटल लौटना चाहिये , सामान भी समेटना है, समय रहते एयर पोर्ट निकल लूगां।

  नमस्कार में जुड़े हाथों के साथ ही दोनों अपने गंतव्य की और निकल गये।



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