Dr. Saroj Acharya

Abstract


2.6  

Dr. Saroj Acharya

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कोरोना और जिंदगी का बदलता नज़रिया - एक डॉक्टर की नज़र से ......

कोरोना और जिंदगी का बदलता नज़रिया - एक डॉक्टर की नज़र से ......

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हेलो...

आशीष, तुम जनरल मेडिसिन रख लेना, मैंने specific मेडिसिन रखली हैं...ये ही बहुत ज्यादा हो गयी हैं।

हां, रख ली सब don't worry ... Innova बुक हो गयी?

yesss, बुक हो गयी है। हम लोग 22 की सुबह चल देंगे, तुम बेटे के पास रह लेना, मैं तो अपनी सिस्टर के यहां रुकूँगी।

अब तो ....24 मार्च को सुबह 5 बजे एयरपोर्ट पर मिलेंगे ।

Done... आशीष ने कहा और फोन बंद कर दिया...।

बहुत enthusiasm था...australia and NZ trip का । क्यों न होता....? पिछले 6 महीनों से प्लानिंग चल रही थी। सब डिटेल्स चेक कर ली थी । बस पैकिंग का लास्ट फेज और हम चले......

दोस्तों के साथ 15 दिन का ट्रिप... मौज मस्ती, मिज़ाज़ में भी तारी थी ।

BOOM.....

20 march को लॉक डाउन की घोषणा, कोरोना वायरस,चीन से निकल कर यहां आ पहुंचा ।

OMG....... Another call from SOTC .....Mam....सॉरी .... we r cancelling this trip till we have further information on corona...सॉरी अगेन.....Bye....डिटेल mail से पहुँच जायेगी.......Thanks

उफ्फ्फ .....एक दूसरे को तस्सली दी, कोई न यार lock-down के बाद चलेंगे....!!

Lock-down के बाद??????

एक और lock-down, फिर एक और....

फिर एक और....

कोरोना से बचना है,तो बस यही lockdown बचाएगा । ये तो खत्म ही न हो रहा। मार्च से जून आ गया,ताली भी बजा ली, थाली भी बजा ली,दिए भी जल गए,पर कोरोना कुछ मेरी ही तरह का ढीठ निकला, जाकर ही न दे रहा। ।

अंदर से कोई बाहर न जा सके

बाहर से कोई अंदर न आ सके

लीजिये सोसाइटी के गेट बंद!

अकेले रहने वाले क्या करे?

एक सूरत बाई की.....जैसी भी थी.......दिखती तो थी । वो भी गयी ।।

धन्य हो BJP......I mean बर्तन झाड़ू पोंछा। 

सब अपने घरों में ऐसे बन्द थे मानो, दरवाजा खुला देखा.......तो कोरोना घुस आएगा। । क्या करें दिन भर

किसी दोस्त को फ़ोन लगा लो,.....बस यही बात,सब एक ही बात करते, कोरोना या उसकी लेटेस्ट टैली की..... 

यहां ये हुआ, वहां वो हुआ ।

अक्सर सोचा अगर कोरोना न रहा, तो हम किस बारे में बात करेंगे?

क्या हमारे बीच बातचीत करने के टॉपिक ही न रहे?

इतने मेन्टल और इमोशनल लेवल पर हावी हो गया कोरोना ।

पेपर, टीवी कुछ और माध्यम हो सकते थे टाइम पास के, वो भी कोरोना के रंग ही में रंग गए। हर दिन नए प्रोटोकॉल !!

हमारे Alumani ‘72 का हाल और भी बुरा, मोदी भक्तों और कुछ opposition वालों में तलवारें सी खींचने लगी, अब इसे भी क्या पढ़े,क्या कमेंट करें...!!!

I love books,  पर वो भी कितनी देर पढें?

ये इल्म का सौदा, ये रिसालें, ये किताबें..

एक शख्स(कोरोना) की यादों को भुलाने के लिए हैं।

भागवत,विष्णु पुराण, शिव पुराण सब ही पढ़ डाले, बस अब तो लगा कि कोई हमारे लिए गरूड़ पुराण ही बांचेगा ।

दिन लंबे से लंबे और राते unending.... होती चली गयीं । जो समय कटता नहीं, बहुत काटता है । अकेले रहना और अकेलापन महसूस करना, मुख़्तलिफ़ बातें हैं ।

दर्द हल्का है साँस भारी है..

जिये जाने की रस्म जारी है

कुछ depression सा भी हो चला था, मन खीज़ से भरा था । इस समय तक तो हर साल US चली जाती थी अपने बेटे का पास, वो भी गया , वहां तो और तबाही थी। । US कॉल भी कई instruction के साथ ही पूरी होती, कहीं न जाना, आपकी immunity compromised है, take good care..... आदि आदि.....It sucks when u need to talk to someone और .... no body is there...!!!

Hospital जाना भी बंद हो गया, मरीज़ भी फ़ोन पर  बात कर के, दवा पूछ लेते , इन्वेस्टीगेशन सारे व्हाट्स एप्प पर आ जाते ।

पेशेंट्स भी जाने कहाँ गए? क्या delivery भी घर पर कर रहें हैं?

रोज बदलते प्रोटोकॉल की बातें, नॉन विज़िबल वैक्सीन की बातें, थका गयी अंदर तक।

मेरा status  है....

Socially.....Cut off 

Emotionally.....Weak

Professionally.....Down 

...नज़र नमाज़ नज़रिया,सब कुछ बदल गया

एक रोज कोरोना आया और मेरा खुदा बदल गया.....


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