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Satyaprakash Panigrahi

Abstract Romance

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Satyaprakash Panigrahi

Abstract Romance

कोन है वो चाँद !!

कोन है वो चाँद !!

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 ये रात् के अंधेरों पे जब में खुले आसमान को देखता हूँ

 तब मेरे मन में एक खयाल आता है 


 अगर् ये जिंदगी वो रातों को खुले आसमान हो

तो आसमान के वो अगणित तारों की तरह ये जिंदगी के रास्ते पे चलते चलते भिन्न भिन्न परिस्थितियों पे , भिन्न भिन्न समय पे,भिन्न भिन्न रुप में हम अगणित मनुष्यों से मिलते है जो उन तारों की तरह थोड़ा बहुत करके ये जिंदगी के अँधेरे को दूर तो करते हैं , पर वो आसमान पे एक चाँद ही हे जो रात की अंधेरों को अपनी उज्ज्वलता से एक पल् में मिटा देता है।।

  

इसी तरह हमारे जिंदगी में जितने भी लोग आयें सब उन तारों की तरह थोड़े बहुत ये अँधेरा को दूर कर सकते हैं, लेकिन हमारे जिंदगी में एक ऐसी  चाँद  हे जो अकेले ही ये जिंदगी के अँधेरों को मिटा कर रौशनी फैला देती है।।

 

 जैसे चाँद की बिना रातों की वो चमक नहीं रहती , उसी तरह हमारे जिंदगी की वो चाँद के बिना ये जिंदगी अधूरी रह जाती है।। 

  

 इसीलिए तो कहते हैं , जिंदगी में तारे गिनते गिनते कभी चाँद को मत खो देना।।



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