STORYMIRROR

Life Education

Abstract

3  

Life Education

Abstract

कन्या का महत्व

कन्या का महत्व

2 mins
368

आज दुर्गा अष्टमी का दिन हैं। सभी अपने अपने काम मे व्यस्त हैं। दादी माँ जो पूजा में लगी हैं। उसे लड़कियों से सख्त नफरत हैं। अभी एक महीने पहले ही उन्होंने अपनी पौत्रवधु रीना का गर्भपात करवाया था। क्योंकि उसकी कोख में एक लड़की थी। लेकिन दुर्गा अष्टमी के दिन वह माँ दुर्गा की पूजा में लीन रहती हैं। इस दिन लड़कियों का खूब मान - सम्मान करती हैं।

(अचानक से आवाज आती हैं।) बहु ! ओ बहु ! जाओ और कन्याओं को बुला लाइये।

कन्या पूजन करके उन्हें भोजन कराना हैं। आदेश सुनकर उसकी बहु रोशनी पड़ोस से लड़कियां लाने चली जाती हैं। तभी संतोष (पड़ोसन) ने लड़की का हाथ पकड़ते हुए । कही नही जाएगी मेरी बेटी ! जब नवरात्रे आते हैं, तब तो बहुत कद्र करना सीख जाते हो लड़कियों की और वैसे इनको माथे मारते हो। अरे आप भी अपने माँ-बाप की बेटी थी। आपको किसने माथे मारा था। क्यों सुनकर बुरा लगा ? 

बहू रोती हुई दादी माँ के पास आती हैं। और फुट - फुटकर रोने लगती हैं। आज दादी माँ की आँखें खुल चुकी हैं। तथा उन्हें कन्या का महत्व समझ में आ गया हैं। अब वह मातारानी के आगे सिर पटक पटक कर अपनी भूल की क्षमा मांगती हैं । और कह रही हैं। "हे माँ मुझे अगर देना हो तो इस बार पोती के रूप में एक लड़की ही देना। तभी मेरे पापों का प्रायश्चित हो सकता हैं।"


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Abstract