किस्मत का खेल
किस्मत का खेल
रोज़ की तरह आज भी मिस्टर गुप्ता सुबह-सुबह अखबार लेकर बैठे और एक सरसरी निगाह उन्होंने सारे पन्नों पर डाली ही थी कि अचानक एक आकर्षक वैवाहिक विज्ञापन पर उनकी नजर ठहर गई जिज्ञासा के साथ एक साँस में ही वो उसे पढ़ते चले गए! और फ़िर अंत में उन्होंने एक शब्द ही कहा - "अविश्वसनीय "
तभी उन्हें चाय देते हुए पत्नी ने कहा - " ऐसी क्या आश्चर्यजनक ख़बर पढ़ ली आपने ?"
तो वो उत्साहित होकर बोले - "अरे एक वैवाहिक विज्ञापन है सुनो !"
एक कन्या उम्र 23 वर्ष, कद 5 फुट 6 इंच है, रंग गोरा,
छरहरी शिक्षा एम बी ए के लिए एक आकर्षक युवक जिसका कद 6 फुट के आसपास हो, रंग सांवला हो तो भी चलेगा, परन्तु उच्च शिक्षित हो और बेरोजगार हो इच्छुक युवा शीघ्र अति शीघ्र दिए गए फोन नंबर पर संपर्क करें और विज्ञापन के नीचे पता भी दिया हुआ है l
ये सुनकर उनकी पत्नी ने कहा - " सचमुच ऐसा तो कभी सुना ही नहीं था हमने !"
तो गुप्ता जी उत्सुकता से बोले "लड़की इसी शहर की है तो हाथ कंगन को आरसी क्या! तो चलो अभी इस संबंध में पूरी जानकारी ले ही लेते हैं!"
उत्साहित वो इसलिये भी हो गये क्योंकि उनका अपना बेटा भी एम टेक के बाद अच्छी नौकरी की तलाश में था! और ख़ूबसूरत तो वो है ही एक नौकरी के अलावा सारी खूबियां तो उनके बेटे में थी ही चूँकि दिये गये पते के अनुसार संयोग से गुप्ता जी के मित्र भी उसी कॉलोनी के ही निकले इसलिये बग़ैर एक पल रुके तुरंत ही उन्होंने अपने मित्र मित्तल जी को फोन लगा कर उनसे सारी जानकारी लेने लगे तो वो बोले कि - "ख़बर सही हैयार, मि बजाज की लड़की तो अच्छी है इतने बड़े व्यवसायी की बेटी होकर भी किसी तरह के ऐब के बारे में तो कभी किसी ने नहीं सुना हाँबस इतना सुना है कि उनकी अकेली सन्तान है इसलिये मि बजाज एक खानदानी पढ़े लिखे बेरोज़गार को अपना घर जमाई बनाना चाहते हैं! वैसे एक बात कहूँ तो ये पूरा का पूरा खेल क़िस्मत का है जो जीता वही सिकंदर बनेगा! " ये कहकर वो ज़ोरदार ठहाका लगाने लगे !
चल ठीक है कहकर गुप्ता जी ने अपना फ़ोन रख दिया और अब तो वो स्वयं भी मानसिक रूप से अपनी कमर कसते हुए अपने बेटे की क़िस्मत आज़माने की तैयारी करने लगे !
