Akanksha Gupta

Drama Crime Thriller


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कातिल (हू नेवर मर्डरड) भाग-7

कातिल (हू नेवर मर्डरड) भाग-7

8 mins 300 8 mins 300

अगले ही दिन अर्जुन और प्रिया शैलेश के फ्लैट पर उसके बेजान हो चुके शरीर से अपने सवालों के जवाब मांग रहे थे। माधवी भी वहां विधान के साथ पंहुची थीं। उसका शरीर डर और घबराहट की वजह से कांप रहा था। उसके लिए यकीन करना मुश्किल हो रहा था कि शैलेश अब इस दुनिया मे नही है। उसकी बॉडी देखकर लग रहा था कि उसकी मौत बहुत ही तकलीफदेह रही होगी। 

एक हवलदार शैलेश के कपड़ों की तलाशी ले रहा था। उसके कोट की जेब में से उसका आई कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और दो मोबाइल फोन्स मिले थे। एक फोन उसका था और दूसरा फोन पुरषोत्तम का था जिसकी कॉल डिटेल्स में लास्ट नम्बर के.के.शर्मा के नाम से फीड था। ये नम्बर देखते ही अर्जुन माधवी से मुखातिब होते हुए बोला- माधवी जी क्या आप वाकई में किसी के.के.शर्मा को नही जानती हैं ? थोड़ा सोच समझ कर जवाब दीजियेगा।

माधवी ने अर्जुन को घूरते हुए कहा- “तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है एसीपी, मैं तुम्हें पहले ही बता चुकी हूँ कि मैं किसी के.के.शर्मा नाम के इंसान को नही जानती लेकिन तुम्हें भूलने की बीमारी है शायद या तुम मेरी बात सुनना चाहते ही नहीं हो।” माधवी की बात सुनकर अर्जुन को हँसी आ गई। फिर उसने पुरषोत्तम का फोन दूर से ही माधवी को दिखाया और पूछा- “क्या अब भी आप यही कहना चाहती हैं माधवी जी।” अर्जुन के चेहरे पर व्यंग्य भरी मुस्कान थी।

पुरषोत्तम के फोन पर वो नाम देखकर माधवी के होश उड़ गए। उसके मुंह से निकला- “यह कैसे हो सकता है ? ये तो.....।” माधवी कुछ कहते-कहते रुक गई। 

“क्या कैसे हो सकता है माधवी जी ?” लगता हैं आपको कुछ याद आ गया है।” अर्जुन ने कुछ इस तरह कहा जैसे उसे कुछ पता हो।

माधवी भूल ही गई थी कि वहां पर एसीपी अर्जुन और उसकी टीम मौजूद है। अर्जुन की आवाज सुनकर माधवी को होश आया और वो हड़बड़ाते हुए बोली- “कोई कैसे कर सकता हैं, शैलेश को कोई कैसे मार सकता हैं ?” माधवी ने बात बदल दी। 

“क्या आपको लगता हैं माधवी जी कि डॉक्टर शैलेश की हत्या की गई हैं ? आपको किसी पर शक है ?” अर्जुन ने माधवी की चोरी पकड़ते हुए पूछा तो माधवी को एहसास हुआ कि वो जल्दबाजी में कुछ ज्यादा ही बोल गई।

“नही नही एसीपी मेरे कहने का मतलब यह नही था। मैं तो बस इतना कह रही थी कि पुरषोत्तम के बाद शैलेश, ऐसा नहीं होना चाहिए था।” माधवी ने बात संभालते हुए कहा।

“जी मैं समझ सकता हूँ कि ऐसा नही होना चाहिये था लेकिन हम अभी तहकीकात कर रहे हैं। आप चिंता ना करें, कातिल जल्द ही पकड़ा जाएगा।” अर्जुन ने बात बढ़ाना ठीक नहीं समझा। उसके दिमाग में कुछ और ही उलझन चल रही थी। 

शैलेश की बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद अर्जुन प्रिया के साथ अपने ऑफिस पहुँचता हैं। प्रिया उसके लिए कॉफी का ऑर्डर देने के बाद किसी लड़के को अंदर बुलाती हैं जिसे देखकर अर्जुन के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उसी लड़के के पीछे पीछे डॉक्टर सिद्धार्थ भी अर्जुन के ऑफिस पहुँच चुका था।

“क्या हुआ अर्जुन तुमने मुझे इतना अर्जेंटली क्यो बुलाया ? क्या तुम्हें मिस्टर सिंघानिया के कातिल का पता चल गया ?” डॉक्टर सिद्धार्थ ने कुर्सी पर बैठते हुए पूछा।

“डोंट बी पैनिक डॉक्टर सिद्धार्थ, अभी आपको सब पता चल जाएगा पर फिलहाल पहले इनसे मिलिए, यह है 'प्रियांशु गोयल' जो जहरीले पेड़ पौधों पर रिसर्च करते है और इंसान के शरीर पर पड़ने वाले इनके असर को लेकर लगातार कुछ ना कुछ नया पता लगाते ही रहते हैं।” अर्जुन ने उस लड़के को बैठने का इशारा करते हुए कहा। तब तक अर्जुन के लिए कॉफी और बाकी सभी के लिए चाय रखकर चपरासी जा चुका था।

आपस में प्रियांशु से अपना परिचय करवाने और उसका हालचाल लेने के बाद सिद्धार्थ ने अर्जुन से पूछा- “बात क्या है अब बता भी दो, क्यो पिक्चर के क्लाइमेक्स की तरह बात को लंबा खींच रहे हो।” उनसे इंतजार नही हो रहा था।

तब अर्जुन ने अपनी जैकेट की जेब मे से एक छोटा सा पैकेट निकाल कर मेज पर रखा जिसमें कुछ सूखी हुई पत्तियाँ रखी हुई थी। उसने डॉक्टर सिद्धार्थ की तरफ देखकर पूछा- “क्या आप बता सकते है डॉक्टर सिद्धार्थ कि यह क्या है ?”

डॉक्टर सिद्धार्थ झल्लाते हुए बोले- “अरे भई सूखी हुई पत्तियाँ है और क्या। देखो अर्जुन अगर तुमने मुझे यहां अपनी बेतुकी बातों से परेशान करने के लिए बुलाया हैं तो आई एम वेरी सॉरी टू डिसपॉइंट यू लेकिन मेरे पास टाइमपास करने के अलावा भी बहुत जरुरी काम है।” इतना कहकर डॉक्टर सिद्धार्थ अपनी जगह से उठकर वहां से जाने लगते हैं। उनके दरवाजे की तरफ मुड़ते ही अर्जुन कहता है- “अगर मैं यह कहूँ कि ये सूखी पत्तियां मर्डर का एक सुराग है तो क्या तब भी आप नहीं रूकेंगे डॉक्टर सिद्धार्थ ?”

इतना सुनते ही डॉक्टर सिद्धार्थ के उठते हुए कदम वहीं रुक गए। उन्होंने मुड़कर अर्जुन की ओर देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थीं। यह देखकर डॉक्टर सिद्धार्थ को और झल्लाहट हुई और वो कुर्सी पर बैठते हुए बोल उठे- “मतलब तुम हमें यहां पर रोकने के लिए कुछ भी कह सकते हो। कल को तुम कहोगे कि बर्फ पानी से नहीं आग से जमाई जाती हैं तो हम ये मान ले कि हम जो बर्फ आज तक खाते आये हैं वो पानी की नहीं बल्कि आग से बनी हुई होती हैं, क्यों हैं ना।” इतना कहकर उन्होंने अपना सिर झटका।

डॉक्टर सिद्धार्थ की बात सुनकर अर्जुन को हँसी आ गई। उसने कहा- “देखिए डॉक्टर सिद्धार्थ अब इस बात को तो आप ही बेहतर जानते होंगे कि बर्फ आग की होती है या पानी की लेकिन मिस्टर सिंघानिया का मर्डर तो इन्हीं पत्तियों से जुड़ा है। अगर आपको मेरी बात पर यकीन नहीं हैं तो आप प्रियांशु से पूछ लीजिए।” अर्जुन ने कहा और प्रियांशु की ओर देखा।

फिर प्रियांशु ने कहना शुरू किया- “ये सही कह रहे हैं सर, मिस्टर सिंघानिया को उसी पेड़ का कोई फल खिलाया गया हैं जिसकी पत्तियां इस वक्त यहाँ पर है। यह एक ऐसा जहरीला फल हैं जो किसी भी इंसान के शरीर को पैरालिसिस कर सकता हैं और फिर धीरे धीरे उसकी मौत हो जाती हैं।” 

“अगर ऐसा है तो फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का पता क्यो नही चला।” डॉक्टर सिद्धार्थ हैरान रह गए।

“क्योंकि कुछ फल ऐसे होते है जो खून में मिलने के बाद अपने रूप को इस तरह बदल लेते हैं कि किसी भी तरह के ब्लड टेस्ट में उन्हें रिकोनाइज करना इंपॉसिबल हैं।” प्रियांशु ने बताया।

“हह..... लेकिन ये पत्तियां तुम्हें मिली कहाँ से ?” डॉक्टर सिद्धार्थ को कुछ याद आया।

“मिस्टर सिंघानिया की कार की बैक सीट के नीचे। तभी तो मुझे शक हुआ था कि इनका मिस्टर सिंघानिया की मौत में कोई ना कोई रोल तो है ही। इसलिए मुझे उनकी हत्या का शक था जो कि सही साबित हुआ।” अर्जुन ने कहा।

“फिर तो यह इस केस से जुड़ा एक इम्पोर्टेन्ट एविडेंस हैं और तुमने किसी को इस बारे मे बताना जरूरी नहीं समझा। जानते हो ना तुमने एक इनलीगल काम किया है। अगर हाई अथॉरिटी को पता चल गया तो तुम्हारी नौकरी खतरे में पड़ सकती हैं।” डॉक्टर सिद्धार्थ ने उसे डांटते हुए याद दिलाया।

“मुजरिम तक पहुंचने के लिए मैं सही गलत की परवाह नही करता। वैसे भी जब आपको यकीन नहीं हुआ तो कमिश्नर साहब कैसे यकीन कर सकते थे।” अर्जुन ने वजह बताते हुए कहा।

डॉक्टर सिद्धार्थ कुछ कहने ही वाले थे कि उनका फोन बज उठा। उनके हॉस्पिटल में कोई इमरजेंसी आ गई थी तो उन्हें बीच मे ही उठकर जाना पड़ा। उनके जाने के बाद प्रियांशु ने अर्जुन से पूछा- “लेकिन जीजू मिस्टर सिंघानिया को इस तरह का जहरीला फल कौन खिला सकता है ? क्या डॉक्टर शैलेश ने......।”

“नही वो यह नही कर सकता। उसकी तो खुद किसी ने हत्या कर दी और उसे उसके घर पर फेंक दिया।” अर्जुन ने प्रियांशु की बात काटते हुए कहा तो प्रिया को हैरानी हुई।

“मुझे तो लगा था उसने सुसाइड किया है और तुम कह रहे हो कि किसी ने उसकी हत्या की है। उसके पास मिस्टर सिंघानिया का मोबाइल फोन भी मिला है ” प्रिया का सवाल था।

“उसके हाथ पैरो पर रस्सियों के निशान थे और जूतों पर मिट्टी लगी थी लेकिन घर का फर्श एकदम साफ था। सुसाइड करने वाले लोगों के हाथ आगे की ओर होते है पीछे की ओर नहीं और पैर सीधे होते हैं मुड़े हुए नहीं। और रही बात फोन की तो उसे तो मरने के बाद भी जेब में रखा जा सकता है।” अर्जुन ने पूरा मामला समझाया लेकिन प्रिया के दिमाग मे एक सवाल फिर मचल गया।

“तो फिर वो हो कौन सकता हैं जो मिस्टर सिंघानिया के क्लोज फ्रेंड को मार सकता हैं ?” प्रिया ने पूछा।

“यह वही हैं जिसने मिस्टर सिंघानिया का मर्डर किया है क्योंकि वहाँ पर भी मुझे यहीं पत्तियां मिली है।” अर्जुन ने बताया।

इससे पहले कि प्रिया कुछ कहती प्रियांशु बोला- “दीदी तुम्हें याद है तीन साल पहले जब तुम्हारी ट्रेनिंग चल रही थी तो वहाँ पर दो पुलिस वालों की मौत हुई थी।”

“हाँ वहीं जिन्होंने ‘पंचनेर विला’ केस सॉल्व किया था। अरे कुछ नही दोनों एक्सट्रीम अल्कोहलिक थे। पी कर गाड़ी चला रहे थे तो एक्सीडेंट करवा बैठे।” प्रिया ने सिर झटका।

“दी तुम समझ नही रही। तुम भूल गई क्या उनकी बॉडीज के पास भी पुलिस को यही पत्तियाँ मिली थी।” प्रियांशु ने याद दिलाया।

“तो तुम कहना क्या चाहते हो कि यह केस उन दोनों की मौत से भी जुड़ा हो सकता हैं ?” प्रिया हैरान हो कर रह गई।

“हाँ शायद। मुझे अचानक ही याद आ गया। लेकिन कोई ये पत्तियाँ मर्डर स्पॉट पर क्यो छोड़ेगा। या तो वो कोई पागल हैं या फिर अपने आप को कुछ ज्यादा ही होशियार समझता है।” प्रियांशु ने हंसते हुए कहा।

“या फिर कोई पुलिस की काबिलियत को चुनौती देना चाहता है कि अगर तुममें हिम्मत हैं तो मुझे पकड़ कर दिखाओ।” अर्जुन ने कहा। अब उसके दिमाग मे एक नई रूपरेखा तैयार हो रही थीं।


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