कागज़ के टुकड़े और अकल का दिवालियापन
कागज़ के टुकड़े और अकल का दिवालियापन
शहर के सबसे महँगे कैफे के बाहर आर्यन अपनी नई डेढ़ लाख की बाइक पर पूरे स्वैग में बैठा था। उसके एक हाथ में एक लाख का नया आईफोन था और आँखों पर महँगा चश्मा। वो बस इसी इंतज़ार में था कि कब रिया आए और वो अपना ये नया 'भौकाल' उसे दिखाए। तभी रिया वहाँ आई। आर्यन ने तुरंत चश्मा उतारा और फोन हवा में घुमाते हुए बोला, "कैसी लग रही है मेरी नई जान? कल ही शोरूम से निकाली है। और ये फोन देख, लेटेस्ट मॉडल है! अब आएगा ना शहर में अपना रुतबा!" रिया ने बाइक को देखा, फोन को देखा, और फिर आर्यन के चेहरे पर छाई उस झूठी और खोखली ख़ुशी को देखा। उसके चेहरे पर आर्यन के लिए कोई तारीफ नहीं, बल्कि एक गहरी निराशा थी। रिया (शांत लेकिन चुभती हुई आवाज़ में): "रुतबा? आर्यन, इसे रुतबा नहीं, बेवकूफी और 'बाप के पैसों की बर्बादी' कहते हैं। ये डेढ़ लाख की बाइक और ये लाख रुपये का फोन... क्या ये तुझे कोई कमाई लाकर देंगे? आज तूने इसे ख़रीदा है, कल शोरूम से बाहर निकलते ही इसकी कीमत आधी हो गई। इन लोहे के डिब्बों और काँच के टुकड़ों ने आज तक किसे उम्र भर की रोटी दी है?" आर्यन का मुस्कुराता हुआ चेहरा एकदम से बुझ गया। उसे रिया से इस कड़वे जवाब की उम्मीद नहीं थी। आर्यन (झल्लाते हुए): "अरे यार! पैसा है तो उड़ाने के लिए ही तो होता है। इंसान अपनी शौक पूरे ना करे तो क्या करे?" रिया (उसकी आँखों में आँखें डालकर): "पैसा तेरा नहीं, तेरे बाप के खून-पसीने का है आर्यन! अपने बाप के जोड़ों के दर्द और उनके पसीने की कमाई पर हवा में उड़ना बहुत आसान होता है। तुझे अकल ही नहीं है कि पैसे का इस्तेमाल कैसे करते हैं! कभी ये खरीद लिया, कभी वो खरीद लिया... और आख़िर में मिला क्या? सिर्फ एक झूठा दिखावा।" रिया ने आर्यन का हाथ पकड़ा और उसे कैफे के कोने में बैठे एक बूढ़े आदमी की तरफ दिखाया, जो चाय के जूठे बर्तन उठा रहा था। उस आदमी के कपड़े फटे हुए थे और आँखों में एक अजीब सी लाचारी थी। रिया (गले में अटकते हुए दर्द के साथ): "उस आदमी को देख आर्यन। उसके ऊपर दुनिया भर के दुख हैं। घर में उसकी पत्नी बीमार पड़ी है, पर उसके पास दवा के लिए सौ रुपये नहीं हैं। वो बेचारा पैसे की असली अहमियत समझता है, क्योंकि उसने गरीबी की मार झेली है। उसे पता है कि एक-एक रुपये की कीमत क्या होती है। और एक तुम जैसे लोग हो... जिनके पास पैसा है, पर अकल कौड़ी भर की नहीं। जिन लोगों को पैसे को इस्तेमाल करने की अकल थी ना आर्यन... वो आज आसमान की ऊँचाइयों पर बैठे हैं। उन्होंने पैसे को दिखावे में नहीं उड़ाया, बल्कि ऐसी जगह लगाया जहाँ से उन्हें 'लाइफ-टाइम' की कमाई और इज़्ज़त मिले।" रिया की हर एक बात आर्यन के सीने में तीर की तरह चुभ रही थी। रिया (आख़िरी वार करते हुए): "पैसे को वहाँ लगाओ जहाँ से तुम्हारा भविष्य बने। कोई कारोबार खड़ा करो, कुछ ऐसा बनाओ जो कल को तुम्हारे काम आए। ये जो फुकरी में तूने आज लाखों उड़ाए हैं ना, कल जब बुरा वक़्त आएगा, तो ये तेरा फोन और ये बाइक तुझे रोटी नहीं देंगे। दिखावे की उम्र बहुत छोटी होती है आर्यन, पर हकीकत की जंग उम्र भर चलती है।" आर्यन के हाथ से वो नया फोन जैसे फिसलने लगा। उसका सारा 'भौकाल', सारा 'स्वैग' एक पल में चकनाचूर हो गया था। उसे उस बूढ़े आदमी की आँखों में अपनी वो बेवकूफी साफ़ नज़र आ रही थी। उसे एहसास हो गया कि वो अब तक सिर्फ हवा में उड़ रहा था, जबकि ज़मीन बहुत नीचे और बहुत कठोर थी। सुखविंदर की कलम से: "आजकल के युवाओं ने 'फुकरापंती' को ही अपनी ज़िंदगी का मकसद बना लिया है। अपने बाप की गाढ़ी कमाई पर हवा में उड़ने वाले ये भूल जाते हैं कि महँगी गाड़ियाँ और मोबाइल कभी ज़िंदगी भर की रोटी नहीं देते। वो बस आपका पैसा सोखते हैं। ज़रा उस गरीब से पूछ कर देखो जिसके सिर पर दुखों का पहाड़ है, उसे पता है पैसे की कीमत क्या है! पैसा उड़ाने के लिए नहीं, बल्कि अपना कल सुधारने के लिए होता है। इसे उन चीज़ों में लगाओ जो तुम्हें ज़िंदगी भर का फायदा दें, कुछ अपना खड़ा करो। वरना लोहे और प्लास्टिक के इन खिलौनों को खरीदते-खरीदते एक दिन तुम्हारी अपनी ज़िंदगी कबाड़ बन जाएगी। पैसे को इस्तेमाल करने की अकल सीखो, दिखावा करने की नहीं।"
