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Sukhwinder Singh Rai

Thriller

4  

Sukhwinder Singh Rai

Thriller

कांच का चक्रव्यूह

कांच का चक्रव्यूह

7 mins
3

ग्लोबल सिंडिकेट इंक' की साठवीं मंजिल की हवा में एक अजीब सी ठंडक थी, वो ठंडक जो एयर कंडीशनर से नहीं, बल्कि वहां मौजूद बेहिसाब पैसे के गुरूर और सन्नाटे से आती थी। नीले रंग के विशाल इटैलियन कांच से पूरा शहर एक बिसात जैसा लग रहा था। आर्यन ने अपनी टाई की नॉट को हल्का सा कसा और अपनी डेस्क पर रखा कॉफ़ी का मग पकड़ा। कॉफी से उठती भाप के पार उसकी नज़रें स्क्रीन पर जमी थीं। आज बतौर 'सीनियर रिस्क एनालिस्ट' उसका पहला दिन था, लेकिन उसकी आँखों में किसी नए कर्मचारी वाली घबराहट नहीं, बल्कि एक शिकारी जैसी खामोशी थी। ​महोगनी की महंगी लकड़ी से बने केबिन का दरवाज़ा बिना आवाज़ के खुला। एमडी मिस्टर सिंघानिया अंदर दाखिल हुआ। उसके महंगे क्यूबन सिगार का तीखा धुआं केबिन की साफ हवा में घुलने लगा। सिंघानिया ने अपनी चमचमाती रोलेक्स घड़ी पर एक नज़र डाली और एक लाल रंग की एन्क्रिप्टेड हार्ड-ड्राइव आर्यन की टेबल पर सरका दी। ​"आर्यन, तुम्हारा दिमाग बहुत तेज़ है, तुम्हारी फाइल देखी है मैंने। इसीलिए तुम आज इस कुर्सी पर हो।" सिंघानिया के होंठों पर एक नपी-तुली व्यावसायिक मुस्कान थी। "इस ड्राइव में 'प्रोजेक्ट ओमेगा' का रॉ डेटा है। तुम्हें बस इसे अपने सिस्टम से ऑथराइज़ करके हमारे स्विस सर्वर पर अपलोड करना है। जैसे ही प्रोग्रेस बार सौ प्रतिशत होगा, तुम्हारे अकाउंट में पांच करोड़ का जॉइनिंग बोनस फ्लैश हो जाएगा।" ​सिंघानिया बिना कोई और बात किए पलट कर चला गया। उसके जूतों की खट-खट भारी कारपेट में दब गई। ​आर्यन ने ड्राइव को हाथ में लिया। लाल रंग की उस छोटी सी डिवाइस में प्लास्टिक से ज्यादा किसी गहरे राज़ का वज़न महसूस हो रहा था। उसने ड्राइव को अपने लैपटॉप के पोर्ट में धकेला। स्क्रीन पर कंपनी का हाई-सिक्योरिटी फायरवॉल ब्लिंक करने लगा। आर्यन की उंगलियां कीबोर्ड पर किसी सधे हुए पियानिस्ट की तरह दौड़ने लगीं। उसने सीधे अपलोड कमांड देने की बजाय डेटा की बैकग्राउंड कोडिंग को 'डिक्रिप्ट' करना शुरू किया। काली स्क्रीन पर हरे रंग के कोड्स बारिश की तरह गिरने लगे। ​कुछ ही सेकंड में जो सच स्क्रीन पर उतरा, उसने आर्यन की नसों में दौड़ते खून को बर्फ कर दिया। ​हजारों करोड़ों के टर्नओवर का वो कांच का महल दरअसल एक बहुत बड़ा 'डार्क वेब' नेटवर्क था। 'प्रोजेक्ट ओमेगा' कोई इन्वेस्टमेंट प्लान नहीं, बल्कि मासूम लोगों के हैक किए गए बैंक अकाउंट्स से पैसा निकालकर विदेशी हथियार तस्करों को सप्लाई करने का एक डिजिटल सिंडिकेट था। और सबसे खौफनाक बात उस स्क्रीन के निचले कोने में चमक रही थी—इस पूरे गैरकानूनी लेन-देन को पास करने के लिए जिस ऑडिटर के 'डिजिटल सिग्नेचर' इस्तेमाल हो रहे थे, वो कोई और नहीं, बल्कि इसी फ्लोर पर काम करने वाली रिया थी। रिया को एक 'बलि का बकरा' बनाया गया था। अगर कभी सिस्टम क्रैश होता या पुलिस तक बात पहुँचती, तो सारे सुराग सिर्फ रिया तक जाते। ​तभी आर्यन के केबिन का कांच का दरवाज़ा तेज़ी से खुला। रिया अंदर खड़ी थी। उसके चेहरे का रंग कागज़ की तरह सफेद था और सांसें बुरी तरह उखड़ी हुई थीं। उसने दरवाज़ा लॉक किया और आर्यन की डेस्क के पास आकर कांपती आवाज़ में फुसफुसाई, "आर्यन... वो ड्राइव सिस्टम से निकाल दो। तुम नहीं जानते ये लोग कौन हैं! मैं पिछले छह महीने से यहाँ फंसी हूँ। मेरे फोन, मेरे मेल्स सब ट्रैक्ड हैं। अगर तुमने वो अप्रूव कर दिया, तो तुम भी इस मौत के कुएं में..." ​रिया की आँखों से आंसू छलक कर डेस्क पर गिर गए। आर्यन ने स्क्रीन से नज़रें नहीं हटाईं। उसके चेहरे की मांसपेशियां तन गई थीं। उसने बिना रिया की तरफ देखे बेहद शांत, लेकिन बर्फीली आवाज़ में पूछा, "तुम्हारे एडमिन पोर्टल का एक्सेस कोड क्या है?" ​"क्या...?" रिया हड़बड़ाई। "आर्यन, तुम समझ नहीं रहे हो, बाहर सिंघानिया के आदमी..." ​"कोड, रिया! सिर्फ कोड बताओ। हमारे पास सिर्फ साठ सेकंड हैं।" आर्यन की आवाज़ में एक ऐसा अधिकार था जिसने रिया को सुन्न कर दिया। ​रिया ने कांपते होंठों से आठ अंकों का कोड बता दिया। आर्यन की उंगलियां फिर से कीबोर्ड पर नाचीं। पलक झपकते ही उसने रिया के सिस्टम का एक्सेस अपने सर्वर पर लिया और पिछले छह महीनों के सारे जाली डिजिटल सिग्नेचर एक मास्टर कमांड से हमेशा के लिए डिलीट कर दिए। रिया का नाम उस काले डेटाबेस से मिट चुका था। ​अचानक केबिन का दरवाज़ा इतनी ज़ोर से खुला कि उसका हैंडल दीवार से टकराया। सिंघानिया अपने तीन भारी-भरकम और हथियारबंद बाउंसरों के साथ चौखट पर खड़ा था। उसका सिगार अब उसके हाथ में नहीं था, और आँखों का गुरूर एक खूंखार गुस्से में बदल चुका था। ​"अपलोड प्रोग्रेस ज़ीरो क्यों दिखा रही है, आर्यन?" सिंघानिया की दहाड़ पूरे फ्लोर पर गूंज गई। बाकी केबिनों के दरवाज़े बंद होने लगे। बाउंसर धीरे-धीरे आर्यन की डेस्क की तरफ बढ़ने लगे। रिया डर के मारे आर्यन की कुर्सी के पीछे छुप गई। ​आर्यन की आँखों में रत्ती भर भी खौफ नहीं था। उसने बहुत इत्मीनान से माउस पर आख़िरी क्लिक किया, लैपटॉप की स्क्रीन बंद की और अपनी कुर्सी पीछे धकेल कर खड़ा हो गया। उसने अपने सूट का सामने वाला बटन लगाया और सिंघानिया की सुलगती आँखों में सीधा देखते हुए कहा, "डेटा अपलोड हो चुका है मिस्टर सिंघानिया... बस लोकेशन थोड़ी बदल गई है।" ​सिंघानिया के माथे पर सिलवटें पड़ गईं। उसके बाउंसरों के कदम ठिठक गए। ​आर्यन ने अपनी पैंट की जेब से अपना स्मार्टफोन निकाला। स्क्रीन पर एक लाल रंग का टाइमर चल रहा था—00:45... 00:44... 00:43... ​"पिछले चार मिनट में मैंने आपका पूरा 'प्रोजेक्ट ओमेगा' हैक कर लिया है। आपके सारे काले कारनामों का सबूत, बैंक के गुप्त खाते और हथियारों की शिपमेंट की डिटेल्स... सब कुछ मेरे इस फोन के एक 'डेड-मैन स्विच' से जुड़ा हुआ है।" आर्यन का लहज़ा इतना सर्द और धारदार था कि सिंघानिया के चेहरे पर पहली बार पसीने की बूंदें चमकने लगीं। ​"तुम्हारी हिम्मत..." सिंघानिया गुर्राते हुए आगे बढ़ा। ​"हिम्मत की बात आप मत कीजिए सिंघानिया," आर्यन ने फोन को हल्का सा हवा में उछाला और वापस कैच किया। "ये फोन मेरे दिल की धड़कन से सिंक (Sync) है। अगर अगले दो मिनट में मैं और रिया इस इमारत के मेन गेट से सही-सलामत बाहर नहीं निकले... या किसी ने मेरे शरीर को छूने की कोशिश की और मेरी पल्स रेट गिरी... तो ये टाइमर ज़ीरो हो जाएगा। और आपका सारा कच्चा-चिट्ठा सीबीआई, इंटरपोल और देश के टॉप दस न्यूज़ चैनल्स के मेन सर्वर पर फ्लैश हो जाएगा।" ​पूरे केबिन में श्मशान जैसा सन्नाटा छा गया। सिर्फ फोन से आ रही हल्की सी 'टिक-टिक' की आवाज़ हवा में गूंज रही थी—00:20... 00:19... ​हजारों करोड़ों का सिंडिकेट चलाने वाला माफिया बॉस आज अपने ही कांच के महल में, पहले ही दिन नौकरी पर आए एक लड़के के सामने घुटनों पर आ गया था। सिंघानिया के होंठ कांप रहे थे। उसने अपने बाउंसरों को पीछे हटने का इशारा किया। उसका पूरा साम्राज्य एक बटन की दूरी पर खड़ा था। ​आर्यन ने रिया का कांपता हुआ हाथ अपने हाथ में पकड़ा। "चलो," उसने बस एक शब्द कहा। ​दोनों सीना तानकर सिंघानिया और उसके बाउंसरों के बीच से गुज़रे। कोई उन्हें रोकने की हिम्मत नहीं कर सका। लिफ्ट से ग्राउंड फ्लोर तक का सफर खामोशी में तय हुआ। कांच के उस विशाल चक्रव्यूह के मेन गेट से बाहर कदम रखते ही शहर की ताज़ा हवा ने उनके चेहरों को छुआ। सूरज की धूप अब चुभ नहीं रही थी। ​सड़क किनारे पहुँचकर आर्यन ने अपना फोन ज़मीन पर फेंका और अपने जूते की एड़ी से उसे कुचल कर चकनाचूर कर दिया। ​रिया की आँखें फटी रह गईं। "ये तुमने क्या किया आर्यन? वो टाइमर..." ​आर्यन के चेहरे पर पहली बार एक हल्की सी मुस्कान आई। उसने अपनी जेब से हाथ बाहर निकाला। "टाइमर तो बस डराने के लिए था रिया। डेटा तो मैं केबिन से निकलने से पहले ही इंटरपोल को मेल कर चुका था। खेल तो ऊपर ही खत्म हो चुका था।" ​दूर से पुलिस की सायरन की आवाज़ें उस कांच की इमारत की तरफ बढ़ रही थीं। आर्यन ने अपनी कॉलर ठीक की और भीड़ भरे रास्ते पर आगे बढ़ गया। ​ताकत और रुतबे की इमारतें चाहे कितनी भी ऊंची क्यों न हों, सच की एक खामोश क्लिक उन्हें ज़मींदोज़ करने के लिए काफी होती है। — सुखविंदर की कलम से


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