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संजय कुमार

Abstract


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संजय कुमार

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झोपड़ी से महल तक

झोपड़ी से महल तक

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माता पिता कि बहुत बार रोकने के बाद भी रोहन घर से भागने का प्रयास करता है माता पिता कि यही इच्छा होती है कि हमारा बेटा हमारे पास ही रहे। रोहन एक दिन आँगन में बैठा होता है, और चारो तरफ घूम कर अपने घर को देख उसके आंखों में आँसू आ जाते हैं। क्योंकि रोहन के घर की ऐसी हालत होती है कि घर में एक भी दीवार नहीं होती दीवार भी होती है,तो बस चारो तरफ पराली,बांस कि फर्चों की दीवारें होती हैं। और छप्पर का घर बना होता है, और जब भी बारिश यानी, आषाढ़, सावन का महीना आता है,जोरों से बारिश होती है, तो पराली से बने हुए छप्पर से पानी की बूंदे ऐसी टपकती हैं मानों छप्पर केवल देखने के लिए बना हो। बारिश होती है तो अंदर पानी भर जाता है। पराली से बनी दीवारें गिरती रहती हैं, और रोहन का परिवार पराली से बनी दीवारों को खड़े करते रहते हैं। खाना बनता रहता है,और पानी की बूंदे चूल्हे पर गिरती रहती हैं। बड़ी मुश्किल से खाना बन पाता है। दिन में तो किसी तरह रोहन का परिवार अपने पड़ोसी के घर जाके गुजर बसर कर लेते हैं ,लेकिन जब रात होती है तो पड़ोसी भी अपने घर से भगा देता है। रोहन के परिवार को बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ता है। मानों भगवान ने पूरे संसार के दुःख रोहन के परिवार को ही दे दिया हो।रोहन के घर में केवल एक छोटी सी जगह होती है,जहां पर केवल खड़े हो सकें।

वहीं रोहन का पूरा परिवार खड़े खड़े पूरी रात काट देते हैं। बारिश होती रहती है, रोहन का परिवार खड़ा रहता है।रोहन यह सब देख बड़ा दुःखी होता है, और अपने माता पिता के रोकने के बाद भी शहर जानें का मन बना लेता है। रोहन कभी शहर नहीं गया। केवल उसने सुना था कि लोग शहर में जाकर अच्छा खासा पैसा कमा लेते हैं। एक दिन रोहन का सारा परिवार एक साथ बैठ कर खाना खाता रहता है,और रोहन अपने माता पिता से शहर जानें के बारे में बात करता है,लेकिन रोहन के माता पिता रोहन को शहर भेजने के पक्ष में नहीं होते। और रोहन को शहर जानें से मना कर देते हैं।क्योंकि रोहन इससे पहले शहर कभी गया ही नहीं होता। इसीलिए रोहन के माता पिता को डर लगता रहता है। खाना खाने के बाद सभी लोग सो जाते हैं, लेकिन रोहन को नींद नहीं आती वह जागता रहता है, और अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में सोचता रहता है। ऐसी स्थिति के बारे में सोच कर देखकर उसके आंखो में आंसू आते रहते हैं। पूरी रात सोचता रहता है कि अचानक शहर जानें का मन बनता है और वो चल पड़ता है। पूरी रात वो पैदल ही चलता रहता है। चलते चलते सुबह हो जाती है। इधर सुबह होते ही रोहन के घर पर न होने से रोहन के घर वाले रोहन को ढूढ़ने निकल पड़ते है। पूरा दिन पूरी रात ढूढते है, लेकिन रोहन का कही भी पता नहीं चलता। रोहन के माता पिता परेशान हो जाते हैं। पूरा गाँव पूरा मोहल्ला ढूढ़ ढूढ़ कर थक जाते है, परेशान हो जाते हैं लेकिन रोहन का कहीं भी पता नहीं चलता। रोहन के चले जाने की चिंता में रोहन के पिता को दिल का दौड़ा पड़ता है, और रोहन के पिता की मृत्यु हो जाती है। थोड़े दिन बाद थोड़ा थोड़ा कर के रोहन का घर गिर जाता है। और रोहन की माँ के पास रहने को कुछ नहीं बचता। वह गली गली भटकती रहती है।  

उधर रोहन चलते चलते गाँव से बहुत दूर चला जाता है। एक बस स्टॉप पर पहुंचता है, कन्डेक्टर से शहर जानें के लिए बोलता है, लेकिन पैसे न होने के कारण कंडेक्टर बस में नहीं बैठने देता। ऐसी कई बसें आती हैं। रोहन सभी से बोलता है कि वह बहुत गरीब है उसके पास एक भी पैसा नहीं है। कोई भी रोहन की बातों पर विस्वास नहीं करता। और पैसे न होने के कारण रोहन को कोई भी कंडक्टर बस में नहीं बैठाता। रोहन को बस स्टॉप पर शाम हो जाती है। रोहन बहुत परेशान हो जाता है। देखते ही देखते एक ट्रक शहर की ओर जाता रहता है। रोहन ट्रक के पीछे लटक जाता है, और उसी ट्रक से वह शहर पहुंच जाता है।अब रोहन किसी तरह से शहर तो पहुंच जाता है। लेकिन किसी से जान पहचान न होने के कारण कहाँ जाए। रोहन को भूख भी लगी रहती है। खाने की तलाश करते करते वह एक होटल में पहुंचता है। वह होटल में जाकर खाना मांगता है,और बताता है कि उसके पास एक भी पैसा नहीं है, लेकिन होटल वालों को उस पर विश्वास नहीं होता और उसे खाना न देकर उसे वहाँ से भगा देते हैं। रोहन होटल के पास से चला जाता है और होटल से थोड़ी दूर पर होटल के सामने ही सारा दिन बैठा रहता है। रोहन को सारा दिन बैठा देख होटल वाले उसको बुलाते हैं और रोहन को खाना खिलाते हैं। और उसके बारे में पूछते हैं। रोहन अपनी पूरी कहानी सुनाता है। रोहन की पूरी कहानी सुनने के बाद रोहन की कहानी होटल मालिक को बताते हैं। होटल मालिक रोहन की कहानी सुनने के बाद होटल मालिक बहुत भावुक हो जाता है।

रोहन को अपने होटल में नौकरी के लिए ऑफर देता है। रोहन काम करने के लिए हाँ कह देता है। रोहन होटल में काम करने लगता। रोहन होटल में कई वर्षों तक काम करता है। एक दिन होटल में बैठ कर लोगों की भीड़ देख कर उसके भी मन में होटल खोलने का विचार बनता है। जब वह अपने साथी को होटल खोलने के बारे में बताता है। उसका साथी ये विचार भूल जाने को कहता है क्योंकी इसमें पैसा बहुत लगता है।लेकिन रोहन हमेशा होटल खोलने के बारे में ही सोचता रहता है। अब वह मेहनत कर पैसा इकट्ठा करने करने लगता है। दिन में होटल में काम करने के साथ साथ रात में दूसरा काम भी करने लगता है। धीरे ऐसे ही काम करता रहता है। थोड़ा पैसा इकट्ठा हो जाने के बाद नौकरी छोड़ कर एक छोटा सा ढाबा खोल लेता है।धीरे धीरे पैसा कमाता और ढाबा में लगाता जाता। ताकि ढाबा को बड़ा कर सके। धीरे धीरे इसके ढाबे का काम बढ़ने लगता। काम बढ़ जानें के बाद रोहन एक दो हेल्फर रख लेता है। धीरे धीरे और बढ़ता चला जाता है।रोहन बहुत ही अच्छा खाना बनाता है इसी से इसके ढाबे का खाना पूरे शहर में मशहूर हो जाता है। रोहन के पास जो भी पैसा आता वह कर्मचारियों को देने के बाद जो भी पैसा बचता ढाबे में लगा देता। ऐसे में धीरे धीरे करके उसका धाबा होटल में बदल जाता है। खाना स्वादिष्ट,मशहूर होने के कारण बहुत दूर दूर से ऑर्डर आने लगते हैं। रोहन इतनी तरक्की कर जाता है कि कुछ ही वर्षों में वह उस शहर का सबसे अमीर व्यक्ति बन जाता है उस तरक्की को देख रोहन बहुत ही खुश होता है। वह अब अपने माता पिता को लाने की सोचता है।

वह अपने माता पिता को लाने के लिए सबसे महंगी कार खरीदता है। और उसी कार से अपने गांव अपने माता पिता को लाने के लिए जाता है। गांव में जैसे ही पहुंचता है गांव के लोग उसकी कार को देख हैरान हो जाते हैं।और सोचने लगते हैं कि इतनी बड़ी कार में कौन आया है। रोहन अपने घर के पास पहुंचता है और जैसे ही कार से निकलता है गांव वाले देखकर हैरान के हैरान रह जाते हैं। रोहन गाड़ी से जैसे ही निकलता है देखता है कि उसके घर का नाम निशान नहीं केवल जमीन ही नजर आ रही है। रोहन बड़ा दुःखी होता है, और गाँव वालों से अपने माता पिता के बारे मे पुछता है। पूरी कहानी सुनने के बाद रोहन के आंखों में आसूं आ जाते है। और अपनी मां को खोजने लगता है। खोजते खोजते पूछते पूछते पता चलता है, की रोहन कि मां एक वृद्धाश्रम में रहती है रोहन वृद्धाश्रम जाता है वहां अपनी मां की हालत देख बहुत रोता है। रोहन की मां भी रोहन को देख बहुत रोती है।रोहन अपनी मां को वहां से ले आता है। रोहन गरबों के लिए एक और आश्रम खोलने की सोचता है। कुछ दिन बाद रोहन आश्रम खोलवा देता है और आश्रम का सारा खर्च रोहन उठाता है। रोहन की मां रोहन के साथ शहर आकर रोहन की तरक्की देख बहुत खुश होती हैं। लेकिन दुख यही होता है कि रोहन अपने पिता को खो देता है।


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