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Abhishek Misra

Fantasy

4  

Abhishek Misra

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जगमोहन

जगमोहन

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जगमोहन दिन रात काम कर कर थक गया है।  वो अपने गाँव लौट जाना चाहता है।   लेकिन कहाँ है उसका गाँव ? गाँव से तो वो कई साल पहले ही भाग आया था।  अब कहाँ कैसा गाँव ? बार बार यही सवाल उसे उलझाता रहता है।  ये शहर की सड़कों से तो उसे अब हबकी आती है।  इन सड़कों पे कोई आत्मा नहीं रची बसी।  सब मरा हुआ।  शरीर आत्माएँ सब मरा हुआ।  वो आदमी के इतने रूप इस शहर में देख  चुका है की अब जी उठ गया है आदमी से।   सब चोर मक्कार मौकापरस्त।  अब उसको ये सब रास नहीं आता है।  सारे दरवाज़े ध्वस्त हुए नज़र आते हैं।  दोस्त यार सब उसी के चिट्ठे बट्टठे।  उसका गाँव अलग अलग रूपों में उसके सामने आता है। उसके सपने में कभी एक बड़ा आम का पेड़ बनके जिसके नाम था मलदहवा।  उसपे कभी सबसे ज़्यादा आम आया करते थे। तो कभी उसके बाबा का सपना उसे आता है।    खैर जगमोहन का नाम भी उसके बाबा ने ही रखा था।   उसका भाई भी यहाँ आ गया था।  सुबह से दोनों इस पार्क में बैठे कुछ काम मिल जाने का इन्तज़ार करते।  उसका भाई एक फ़ोन खोलके उसको पटक रहा है।  उसका display लगता है चला गया है।  जगमोहन उसके पीछे सो रहा है।   यहाँ पास में लड़के लड़कियाँ सिगरेट पीने आते हैं।  वो धुएँ से चिढ़ता है पर कौन रोके उनको।   यहाँ शहर में आदमी जितना चमकीला कपड़ा पहनता है उतना ही नीच होता है।  दोगला, फूहड़, सड़ा हुआ आलू जैसा।  उसकी आत्मा से घिन आती है।   फिर उसे सपना आता है कि वो अपना खेत गोड़ रहा है।  उसके पास कुल ९ बिगहा खेत हैं।  लेकिन यहाँ चले आने के बाद वो जा नहीं पाता।  खेत ऐसे ही पड़े हैं। कभी कभार बटईया दे देता है पर कुछ मिलता नहीं। तो सपने में वो अपने खेत में सरसों उगा रहा है।  हलकी बयार चल रही है। और उसका भाई अभी घर से खाना लेकर आ रहा है।  कुछ बीज भी लाया है सरसों के। अच्छी फसल होनी चाहिए। फिर सपने में सरसों के फूल उग आये हैं।और उसे Van Gogh दिखाई देते हैं उन पीले फूलों के बीच दौड़ते।   शायद अगर Van Gogh उसके इन पीले सरसों के फूलों को देख लेते तो शायद उनको फिर से प्रेरणा मिल जाती चित्र बनाने की और वो अपने आपको गोली न मारते।  उसे Van Gogh बहुत पसन्द हैं। उसने Art History की पढ़ाई भी की थी। पर आगे चलकर वो दुनिया उसे जमी नहीं। वही दोगलापन। पर Van Gogh उसके सपने में आते रहते हैं और वो सोचता रहता है कि ऐसा वो क्या कर देता कि Van Gogh अपने को गोली न मारते। कभी कभी तो वो अपने आपको Van Gogh समझ बैठता है और अपने भाई को Theo. Van Gogh का भाई जो एक Art Gallery में काम करता था और Van को कुछ पैसे भेजा करता था। Van Gogh ने Theo को बहुत पत्र लिखे। वो अपने भाई को बहुत चाहते थे।  दरअसल जगमोहन भी अपने भाई को बहुत चाहता है । अब दोनों यहाँ पार्क में बैठे कुछ काम मिल जाने का इंतज़ार करते। और लड़के लड़कियाँ निरंतर सिगरेट पी पी कर पार्क में गन्दगी, प्रदूषण, पैसे की बर्बादी सब एक साथ कर रहे हैं।   वो आखिरकार उस लड़को लड़कियों के पास जाता है।  और उनके मुँह से उड़ते धुएँ से एक चित्र बनाने लगता है हवा में। वो लड़के लड़कियाँ हँसने लगते हैं। वो कहता है मेरे गाँव में जब शाम को चूल्हा जलता है तो ऐसे ही कण्डे का धुआँ उठता है। पर वो सोंधी खुशबू लिए होता है।  उससे कलेजा नहीं जलता जैसे इस सिगरेट के धुएँ से।  देखो वो गिलहरी भी इधर उधर भाग रही है।कोई लगता है उसका घर जला रहा है। बच्चे सिगरेट फ़ेंक कर चले जाते हैं और वो अपने भाई को उठाता है। चल टिकट कराते हैं। घर चलते हैं। सरसों उगाएँगे। 


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