जाल : भाग 5
जाल : भाग 5
डॉक्टर के जाने के बाद पूजा थोड़ी निराश हो गई । घर में वह निपट अकेली थी । काश ! इस अवसर का फायदा उठा पाती वह ! उसे पता नहीं था कि डॉक्टर इतना डरपोक होगा ! लेकिन अब क्या किया जा सकता है ? वह बुझे मन से घर के काम करने लगी ।
रात हो गई थी । समीर का फोन भी नहीं आया था कि बाबूजी का ऑपरेशन हुआ या नहीं ? वह घर आयेगा या नहीं ? उसने समीर को फोन लगाया तो वह नो रिप्लाई हो गया । उसने एक बार और लगाया लेकिन इस बार भी वह नो रिप्लाई ही हुआ ।
उसने समीर को एक मैसेज छोड़ दिया "ये तो बता दो कि कब आओगे ? तुम्हारे लिए खाना बनाऊं या नहीं" ?
टाइम पास करने के लिए वह टीवी ऑन करके बैठ गई । उसे "क्राइम पेट्रोल" और ऐसे धारावाहिक बहुत पसंद थे । इन धारावाहिकों में स्त्रियां अवैध संबंध बनाने के लिए अपने घरवालों से क्या क्या बहाने बनाती हैं , ये ज्ञात हो जाता था । साथ ही यह भी कि यदि पकड़े भी जाओ तब क्या क्या इल्ज़ाम किस किस पर लगाने हैं , यह भी पता चल जाता था । वह तल्लीनता के साथ क्राइम पेट्रोल देखने लगी ।
इतने में डोरबेल बज उठी ।
"कौन हो सकता है इस वक्त" ? पूजा के दिमाग में यह प्रश्न कौंधने लगा । शायद समीर होगा । अचानक उसे याद आया कि उसने समीर को एक मैसेज भेजा था , उस पर समीर ने क्या जवाब दिया , वह यह जानना चाहती थी । उसने मैसेज देखा लेकिन समीर का कोई मैसेज नहीं था । समीर ने तो वह मैसेज अभी तक पढ़ा भी नहीं था । वह एक बार और निराश हुईं । दरवाजा खोलने के लिए वह धीरे-धीरे उठी । दरवाजा खोलने पर उसने देखा कि दरवाजे पर कोई नहीं था । वह दरवाजे से बाहर निकली और आसपास चारों ओर देखा , मगर वहां कोई नहीं था ।
"लगता है कि उसके कान बजने लगे हैं" उसने अपने सिर पर एक हल्की सी चपत लगाते हुए मन ही मन कहा । उसने दरवाजा फिर बंद किया और क्राइम पेट्रोल देखने में व्यस्त हो गई ।
इस घटना के लगभग 10 मिनट पश्चात डोरबेल फिर से बज गई । इस बार पूजा फुर्ती से उठी और फटाक से दरवाजा खोल दिया । इस बार भी दरवाजे पर कोई नहीं था । उसने आंखें फ़ाड़ फ़ाड़ कर चारों ओर देखा पर उसे कोई नजर नहीं आया । वह दरवाजा बंद करने ही वाली थी कि उसे हंसने की आवाज सुनाई दी । पर यह आवाज घर के अंदर से आ रही थी । यह आवाज कुछ जानी पहचानी सी लग रही थी पूजा को । उसने जल्दी से दरवाजा बंद किया और दरवाजे से सिर टिका कर खड़ी हो गई ।
"क्यों बहू ! मेरा एक्सीडेंट करवा कर बहुत खुश हैं ना तू" ?
पूजा उस आवाज को पहचान कर डर गई । यह आवाज तो बाबूजी की है और वे तो अस्पताल में भर्ती हैं । समीर अभी अभी ऑपरेशन के लिए पैसे लेकर गये हैं । फिर वे घर कब आये" ? पूजा सोचने लगी और डरने भी लगी । पहले कभी ऐसी घटनाएं नहीं हुई थीं ।
उसने आवाज की दिशा में देखा तो वहां कोई नहीं था । अब वह थोड़ी चिंतित हो गई थी । वह धारावाहिक देखने जा ही रही थी कि बाबूजी की आवाज आई
"मुझे क्यों मरवाना चाहती थी तू ? आखिर मैंने तेरा क्या बिगाड़ा था" ? कहते कहते बाबूजी की आवाज भीग गई । वे रोने लगे ।
पूजा अब बहुत डर गई थी । बाबूजी यहां कैसे आए और इन्हें कैसे पता चला कि मैंने ही वह एक्सीडेंट करवाया था ! वह धम्म से वहीं पर बैठ गई ।
"बैठने से काम नहीं चलेगा । पहले यह बता कि तू मुझे मरवाना क्यों चाहती थी" ? बाबूजी इस बार कड़क कर बोले ।
बाबूजी की दमदार आवाज से पूजा विक्षिप्त सी हो गई और वह जोर जोर से रोने लगी । फर्श पर हाथ पैर पटकने लगी ।
"रोने से काम नहीं चलेगा । तुझे बताना पड़ेगा कि तू मुझे मरवाना क्यों चाहती थी ? समीर को बताऊंगा मैं , जब तू मानेगी" ।
जैसे तैसे पूजा रोते हुए बोली "ये क्या कह रहे हो बाबूजी ! मैं भला आपको क्यों मरवाना चाहूंगी" ?
"मुझे सब पता है । तूने ही मेरे सरल को घर से निकलवा दिया था । बेचारे पर ऐसा घृणित इल्जाम लगाया कि मैं बता भी नहीं सकता हूं । पहले सरल को निकलवाया फिर मुझे मरवाया । अब तेरा रास्ता बिल्कुल क्लीयर हो गया । अब खूब गुलछर्रे उड़ा सकती है उस डॉक्टर के साथ" ।
पूजा को काटो तो खून नहीं । "बाबूजी तो सब कुछ जानते हैं । हे भगवान ! अब मेरा क्या होगा" ? पूजा बहुत बड़ी मुसीबत में फंसे गई थी ।
"तू क्या समझती है कि मुझे कुछ पता नहीं है ? बेवकूफ लड़की । डॉक्टर से तेरा याराना जब से चल रहा है , तब से मुझे पता है" ।
पूजा कुछ बोलती इससे पहले फिर से डोरबेल बज उठी । वह डर के मारे कांपने लगी । एक तो बाबूजी को सब पता है और वे इसी घर में बैठे हुए हैं । उधर कोई दरवाजे पर खड़ा खड़ा डोरबेल बजा रहा है । वह बुझे मन से उठ खड़ी हुई और उसने दरवाजा खोल दिया ।
"मैडम ! आपके नाम यह कोरियर आया है । यहां दस्तखत कर दीजिए ।
कोरियर का नाम सुनकर पूजा को तसल्ली हुई । "किसने भेजा है यह कोरियर" ? उसने प्रेषक का नाम देखा तो उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई थी । वहां पर सरल लिखा था । पूजा की घिग्घी बंध गई । दरवाजा बंद करके वह अपने कमरे में आ गई ।
"इसे खोलना मत ! इसमें से जिन्न निकलेगा । समझ गई ना । मेरी बात कान खोलकर सुन ले और मैं जैसा कहता हूं वैसा कर ले इसी में तेरी भलाई है" बाबूजी अट्टहास करने लगे ।
पूजा ने बाबूजी की अवहेलना करते हुए वह लिफाफा खोला लिया । उसमें कुछ फोटोग्राफ थे । उन्हें देखकर वह जोर से चीख पड़ी । बाबूजी के फिर से अट्टहास करने की आवाज सुनाई देने लगी । "मैंने कहा था न कि इसे मत खोलना ! पर तू मानी ? नहीं ना ! अब भुगत" !
वे फोटोग्राफ्स आज के ही थे । पूजा और डॉक्टर के अंतरग पलों के फोटोग्राफ्स । दोनों बिल्कुल प्राकृतिक अवस्था में थे । उन फोटोग्राफ्स को देखकर पूजा थर थर कांपने लगी ।
"पाप करते समय तुझे डर नहीं लगा और अब तू थर थर कांप रही है" । बाबूजी ने एक जोर की घुड़की मारी । पूजा फर्श पर लोटकर डकराने लगी । वह आंसुओं में डूब गई । उसने अपना सिर अपने घुटनों में दे दिया और रोने लगी ।
इतने में फिर से डोरबेल घनघना उठी । अबकी बार पूजा सहम गई । पता नहीं कौन है वहां ? क्या पता कोई ब्लैकमेलर हो ? वह चुपचाप बैठी रही ।
"पूजा ! दरवाजा खोलो पूजा" ! समीर की आवाज सुनकर पूजा को लकवा मार गया । "ये यहां कैसे आ गये ? इन्हें तो ऑपरेशन के समय अस्पताल में ही रहना चाहिए था । अरे ! ये फोटोग्राफ्स ! इनका क्या करूं ? कहीं समीर ने देख लिये तो" ?
वह चुपके से उठी और अपनी वार्डरोब में अपने कपड़ों के बीच में उन्हें छुपा आई और सिंक का बटन दबाकर फ्लश की आवाज निकालकर पूजा ने दरवाजा खोल दिया ।
"इतनी देर से क्या कर रही थी" ? समीर की आवाज में रोष था
"टॉयलेट में थी" पूजा ने शांत स्वर में कहा
"ओह ! मैं तो डर ही गया था"
"आप इतनी जल्दी कैसे आ गये" ?
"दरअसल बाबूजी को होश आ गया और डॉक्टर ने फिलहाल ऑपरेशन टाल दिया है । अब कल उनकी हालत देखकर निर्णय लेंगे । इसलिए मैं यहां आ गया ।
"ओह ! ये तो बड़ा अच्छा समाचार है" । पूजा मन ही मन दांत पीसती हुई बोली
"अच्छा , मेरे लिए खाना बना दो । बहुत जोर से भूख लगी है" ।
"जी, अभी बनाती हूं" ।
"अरे ! ये छिनाल क्या खाना बनायेगी ? कुलटा कहीं की" । बाबूजी ने ताना मारते हुए कहा
"शट अप" । पूजा बुरी तरह चीख पड़ी
"क्या हुआ पूजा ! तुम किसे शट अप कह रही थीं" ? समीर आश्चर्य से बोला
"तुम्हारे ठरकी बाप को , और किसे" ? चिल्लाते हुए पूजा ने कहा
"लेकिन बाबूजी यहां कहां हैं" ?
"अभी तो उन्होंने मुझे बहुत सी गाली दीं थीं । क्या आपने नहीं सुनी" ?
"नहीं ! बिल्कुल नहीं । मुझे तो आश्चर्य हो रहा है कि तुम जैसी पढ़ी लिखी लड़की ऐसा कैसे सोच सकती है" ?
"बाबूजी यहीं पर हैं और वे सब देखकर बातें कर रहे हैं" । पूजा राज खोलते हुए बोली
"पागल हो गई हो क्या ? मैं अभी उन्हें अस्पताल में ही छोड़कर आया हूं । यहां कैसे हो सकते हैं वे" ?
अब पूजा को भी लगा कि समीर सही कह रहा है । ये उसका भ्रम था शायद । उसने कन्फर्म करने के लिए पूछा
"क्या तुमने बाबूजी की आवाज बिल्कुल नहीं सुनी" ?
"हां , नहीं सुनी" । समीर अभी भी पूजा को आश्चर्यचकित होकर देख रहा था ।
"थैंक गॉड ! मैं फ़ालतू ही घबरा गई थी" । और पूजा एक प्यारी सी स्माइल के साथ समीर से लिपट गई
"तुम्हें क्या पता कि मैं अकेले में कितना घबरा जाती हूं । मुझे अकेले रहने की आदत नहीं है ना । प्लीज़ ! मुझे अकेले मत छोड़ना कभी" । पूजा ने त्रिया चरित्र दिखाने में महारथ हासिल कर रखी थी । वह समीर से कसकर लिपट गई ।
शेष अगले अंक में

