हॉस्टल के वो घंटे [भाग-2]
हॉस्टल के वो घंटे [भाग-2]
भाग-1 बताया गया है कि सारी सहेलियां हॉस्टल से स्कूल वाले महल में जाने का प्लान बनाती है।रूही और इरम को कल का इंतजार रहता है
अब आगे....
रूही और ईरम अपने अपने घर पर ही कहती है कि उन्हें अपनी फ्रेंडस के साथ प्रोजेक्ट बनाना है और घूमने जाना है। वो दोनों स्कूल की छुट्टी होने के बाद मुस्कान और वो सब लड़कियां जो उनके साथ जाने वाली थी, उनके हॉस्टल के रूम मे चली जाती है वहां छुप जाती है ताकि टीचर उन्हें न देख सके।
शाम के 6 बजे, हॉस्टल के और स्कूल के सारे कमरे बंद कर दिये जाते हैं । टीचर आशा जो कि हॉस्टल को लड़कियो को संभालती थी उन्होंने 6 बजे सारे कमरे बंद कर दिये और लड़कियों के कमरों मे खाना व जरूरत की चीजे रखवाकर अपने कमरे में चली गई। तभी मुस्कान, आरजू, रूही, ईरम और बाकी सब लड़कियां ग्रूप बनाकर बैठ जाती हैं। तभी आरजू कहती है कल स्कूल की छुट्टी है और हम कल सुबह 9 बजे चलेंगे। मेम ने दरवाजा बंद कर दिया हैं। हम खिड़की से चलेंगे। हमारे रूम की दो लड़कियां नहीं जा रही है तो ये खिड़की खोल व बंद कर देंगी।
रात को सब लोग सो जाते हैं। रूही और ईरम को टिक - टिक की आवाज़े इधर- उधर भागने की आवाजे आती है। मुस्कान कहती है तुम दोनो सो जाओ, यह बिल्ली, चूहो के भागने की आवाजे होगी। मुस्कान उन्हें समझा-बुझाकर सोने के लिये कहती हैं। मगर वो दोनो कहा सोने वाली थी। रात भर डरते हुए आवाज़े सुनती रहीं।
अगली सुबह सब 7 बजे उठ गई। आठ बजे तक नाश्ता करने के बाद मुस्कान ने कहा कि सब अपना अपना सामान रख लो। रूही और ईरम ने टॉर्च रख ली | आरजू ने अपने साथ रक्षा धागा ले लिया। मुस्कान ने चिप्स ले ली! सीमा और अलीना ने आग जलाने के लिए माचिस और लाइटर ले लिया और डंडा और उस पर बांधने के लिए कपड़ा ले लिया। तो सजा ने झाडू रखली ! सोनू और रूमी चंचल स्वभाव की थी तो उन्होंने सबको डराने के लिये सामान रख लिया ! ठीक 9 बजे मुस्कान ने खिड़की खोली, और सब वहां से कूद कर हॉस्टल वाली जगह से थोड़ी दूर एक कमरे के बाहर खड़े हो गये। मुस्कान ने कहा हमारे पास 5 घंटे है। हमें 2 बजे तक वापस चलना हैं। तभी अलीना ने उछलते हुए कहा! हमारा पहला घंटा शुरू होता है, अब ! "सबसे पहले हम कहां चले! रूही कहती है वो तुमने छत वाले कमरे में झूमर देखा था ना वहां चलते हैं।"
तभी ईरम कहती है न"हीं-नहीं हम तीसरी मंजिल वाली गुफा मे चलते हैं।" यह कहकर दोनो लड़ने लगती है। तभी अलीना चिल्लाते हुए कहती है। "चुप हो जाओ !"
हमे चुपचाप चलना है। ये हमारा पहला घंटा है तो हम एक-एक जगह चलेंगे सबसे पहले गुफा वाले कमरे मे चलते हैं। सात 'से आठ कमरो को छोड़कर वो कमरा था ! सब उस कमरे मे गये। आरजू और मुस्कान ले उस कमरे की खिड़की को खोला वहां भी एक कमरा था। मुस्कान ने कहा सब एक एक करके अन्दर कूद जाते है और खिड़की खुली ही छोड़ देते हैं।
मुस्कान, आरजू से कहती है पहले तुम कूदो ! आरजू कहती है नहीं पहले तुम। ये कहकर दोनो बहस करती है। तभी सोनू कहती है, पहले में कूदती हूँ फिर तुम सब आना। सभी एक- एक करके अन्दर कूद जाती है। सब आगे बढ़ती है तभी वो गुफा आ जाती है। अलीना टार्च जलाती हैं। उन्हें गुफा मे सिर्फ अधेरे के सिवा कुछ नही दिखता। सब गुफा के अन्दर जाने का सोचती है तभी आरंजू सबको टोकती हुई कहती हैं सब कैप और मास्क पहन लो। अन्दर चिमगादड़ हो सकते हैं। सब कैप और मास्क पहनती है। और अन्दर चलती हैं। तभी गुफा मे एक दरवाजा दिखता है। सीमा और मुस्कान दरवाजा खोलने की कोशिश करती है। तभी पीछे से उन्हें टिक-टिक की आवाजे आने लगती हैं। सब डर से एक- दूसरे का हाथ पकड़ लेती है। तभी मुस्कान डरती हुई आवाज मे कहती है - तु तु तुम सब डरो मत, य य हाँ चमगादड़ होगे! यह कहकर मुस्कान दरवाजा खोलने लगती है।
दरवाजा खुलते ही उसमें से धूल आने लगती है सब बुरी खासती हुई अन्दर जाती है। तभी सब जब सामने देखती है तो उन्हें मटके रखे हुए दिखते है जिस पर काले-काले निशान हो रहे थे। तभी शीना की नजर एक मटके पर जाती है जो हिल रहा होता है वो चिल्लाने लग जाती है। और भागती है
सब एक दूसरे का हाथ पकड़ कर इधर-उधर भागने लग जाती है तब शीना और ईरम भागते- भागते एक गैलरी मे आ जाती हैं।
और पीछे मुड़कर देखती है तो वह पाती है कि वह सबसे अलग थी। गैलरी में दूर आ चुकी है। तभी शीना इरम से कहती है कि "चलो हम आगे चलते हैं वो सब हमे मिल जाएगी!"
शीना ऊपर की गैलरी मे पहुच गयी थी गैलरी मे भी कई पेंटिंग्स लगी हुई थी अचानक से शीना ने सोचा की ईरम कुछ बोल क्यों नही रही है तो उसने पीछे मुड़कर देखा तो ईरम उसके पीछे ही खड़ा हुई थी तो शीना ने बोला "क्या बात है ऐसे चुप क्यों है डर लग रहा है क्या?"
ईरम ने कुछ नही बोला बस अपनी गर्दन न मे हिला दी शीना को थोडा अजीब तो लगा पर फिर उसने सोचा की ईरम शायद थोड़ी डरी हुई है फिर वो दोनों आगे बढ़ने लगी के लास्ट मे एक कमरा था जिस का दरवाजा जला हुआ थ शीना ने कहा ये दरवाजा ऐसे जला हुआ क्यों है चलो अन्दर चलके देखते है
जैसे ही शीना दरवाजे को छूने वाली थी दरवाजा अपने आप खुल गया ये देखकर शीना थोडा डर गई बहार से ही शीना ने टोर्च की रौशनी अन्दर डाली तो अन्दर की हालत खराब थी अन्दर बहुत सी चीजे जली हुई थी
शीना ने कहा- "अन्दर जाना सही नही होगा चलो वापिस चलते हैं। "
यह कहकर जैसे ही शीना पीछे पलटने को हुइ उस वक़्त किसी ने शीना को अन्दर उस कमरे मे धक्का दे दिया. शीना गुस्से से पलटी और ईरम को कुछ कहने ही वाली थी की अचानक शीना के टोर्च की रौशनी ईरम के चेहरे पर पड़ी तो शीना एक दम से सन्न हो गयी
उसके मुह से एक आवाज भी नही निकल रही थी ईरम का चेहरा इस वक़्त बेहद डरावना था और उसके चेहरे पर एक डरावनी मुस्कान थी अचानक से वो दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया और पुरे कमरे मे एक डरावनी हसी गूंजने लगी शीना बहुत चीखी चिल्लायी पर उसकी आवाज उसी कमरे मे दबके रह गयी.
आपकी आवाज सुनकर इरम भी भागने लगी और भागते भागते नीचे आ गई।नीचे जब ईरम ने सामने देखा तो सामने तो कोई था ही नही शीना तो कबका ऊपर जा चूकी थी ईरम भी धीरे धीरे ऊपर की और जाने लगी और शीना को आवाज भी दे रही थी
जैसे ही ईरम ऊपर पंहुची तो ईरम के सामने एक दम से कोई आ गया तो ईरम थोडा हडबडा गयी लेकिन जब उसने टोर्च की लाइट उसके चेहरे पर मारी तो उसने देखा अरे ये तो शीना है , तो ईरम ने कहा - अ"रे यार कहा चली गयी थी मे तो डर ही गयी थी"
लेकिन शीना ने कुछ नही कहा और वो वापिस मुड़कर गैलरी मे जाने लगी ईरम को थोडा अजीब लगा लेकिन वो भी उसके पीछे हो लि ईरम देख रही थी यहाँ भी दीवारों पर कई पेंटिंग्स लगी हुई है पेंटिंग्स देखते देखते वो लोग गैलरी के आखिर मे आ गये थे और शीना उसी दरवाजे के सामने जाकर खड़ा हो गई. ईरम ने जब उस दरवाजे को देखा तो वो जला हुआ था ईरम कुछ कहती उससे पहले ही शीना उस दरवाजे के अन्दर जा चूकी थी तो ईरम भी उसके पीछे जाने लगी लेकिन जैसे ही ईरम उस कमरे की तरफ बढ़ने वाली थी की तभी उसे गैलरी के दुसरे तरफ जहा से वो लोग आये थे वहा से एक आवाज आई
"ईरम रुक जा उस दरवाजे के अन्दर मत जाना "
जैसे ही ईरम ने ये आवाज सुनी तो वो समझ गयी की ये तो शीना की आवाज है जब उसने टोर्च की लाइट दूसरी तरफ की तो सामने खड़ी थी .
ईरम तो एक दम से चौक गयी उसने सोचा अगर शीना यहाँ है तो दरवाजे के अन्दर कौन है जब ईरम ने दरवाजे के अन्दर वापिस लाइट मारी तो अन्दर भी एक शीना खड़ी थी जो उसे अन्दर आने का इशारा कर रही थी
और दूसरी तरफ गैलरी वाली शीना उसे अन्दर जाने से मना कर रही थी. ईरम को समझ नही आ रहा था की वो क्या करे और किसकी सुने इतना तो वो समझ गयी थी की दोनों मे से एक जरूर छलावा है जो उसके दोस्त का रूप लेकर उसे छल रहा है.
ईरम को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह किस तरफ जाए। कौन सी शीना है और कौन सा इसमें छलावा है वो बुरी तरह से फँस गयी थी वो आरजू रूही और अपने बाकी दोस्तों को ढूँढना चाहती थी तभी उसके हाथ से घड़ी नीचे गिरती है घड़ी में 10:00 बज रहे थे तभी आवाज आई दूसरा घंटा शुरू। अब क्या होगा क्या ईरम समझ पायेगी असली शीना कौन है।
ईरम वहाँ से कैसे बच पायेगी देखते है भाग -3 में

