हॉस्टल के वो घंटे [भाग-1]
हॉस्टल के वो घंटे [भाग-1]
रूही आठवी कक्षा में पढ़ती थी, वो हर बात में बहुत सवाल करती थी ! क्या ? क्यू ? कैसे ?
वो एक पुराने काल के स्कूल मे पढ़ती थी वो स्कूल दिखने मे जितना आकर्षक था उतना ही रहस्यमय और बड़ा था !
लोग स्कूल के बारे में कई अनगिनत बातें कहा करते थे, जैसे कि इसका केवल एक चौथाई हिस्सा खुला हुआ है, बाकी तीन चौथाई हिस्सा कई वर्षों से बंद है क्योंकि वहां भूत प्रेत का वास है !
लोग कहा करते थे ,कि इस स्कूल का तीन चौथाई हिस्सा रात 12 :00 बजे के बाद लाल रंग का हो जाता है !
रूही को जब कोई भी स्कूल के बारे में यह सब बातें बताता था तो वो हमेशा ही यह सवाल करती थी ! यह क्यूँ है ? और यह कैसे है ?
स्कूल को उसके मैदान से देखने पर वो चार मंजिला बना हुआ था ! तीन मंजिलो कें कुछ कमरो पर कक्षाए लगा करती थी। तीसरी मंजिल में एक तरफ हॉस्टल था।
रूही की दोस्त आरजू हॉस्टल में रहा करती थी ! स्कूल के विद्यार्थी हॉस्टल में फ्री में रह सकते थे ! परन्तु वहां खुद की सुविधा के लिए प्रत्येकं सामान स्वयं ही लाना होता था !
आरजू और ईरम नाम की लड़किये एक-दिन लंच टाइम में आपस में बाते कर रही थी। तभी रूही वहां आई, रूही ने उन्हें स्कूल को लेकर बातें करते हुए सुना !
ईरम ने आरजू से पूछा तुम हास्टल में ही रहती हो ना, तो क्या वाकई में इसका तीन-चौथाई हिस्सा रात को लाल हो जाता हैं।
और यहां रात को इरावनी आवाजे आती हैं।
तभी रूही ने बीच में बोलते हुए कहा- हा - हा आरजू
मुझे भी बताओ ना ऐसा क्या है ?और क्यूं है ?
तभी रूहीं और ईरम, आरजू से ढेर सारे सवाल करने लगी।
तभी आरजू ने उन दोनो को चुप करते हुए कहा कि अरे। रुको
मैं क्या यहा की गॉर्ड हूँ जो मुझे सब कुछ पता होगा। लेकिन मैं यहां पिछले एक साल से हॉस्टल में रह रही हूँ। मुझे जो मेरी साथ वाली लड़कियों से पता चला है तो मैं तुम दोनों को बताती हूँ !
ये स्कूल एक पुराना राजा रानी का महल है। तुम इसके लड़की के दरवानो, खिड़कियों को ध्यान से देखना ! तुम्हे - पता चल जाएगा।
राजा-रानी की यहां पत्थर की मूर्ति हुआ करती थी तो भूत प्रेत उन मूर्तियो को तोड़कर उन्हें मारकर वहां रख दिया।
यहां पर पुराना राजा-रानी का सामान भी है, सुना है वो इतना आकर्षक है कि बस उसे ही देखते रहो !
और मैने सुना है यहां पर एक ऐसा कमरा है
जहां पर कई मूल्यवान व खूबसूरत चीज़े है लेकिन
वहां कोई जा नहीं सकता।
यहां पर कई गुफाएँ भी है जो कई सालो से बंद है !
तभी आरज़ू छटकते हुए कहती है लेकिन मैने तो यहां एक ही गुफा देखी हैं।
तभी ईरम ने पूछा, कौनसी गुफा !
तभी आरजू ने कहा वो जो खम्भे के पास वाला
कमरा है जिसमें, हम खेलते है वहां कि खिड़की से
कूदकर एक कमरा है !
फिर वहां पर एक गुफा
का रास्ता हैं।
लेकिन सुना है वहां पर कई सारे चमगादड़ है, इसलिए हम आगे नहीं गए।
रूही ने पूछा-
कि तुम यहां रात को रहती हो, यहां
पर रात को कुछ होता है, क्या आरजू ने कहा, हम रात को कमरे से बाहर नहीं जाते। लेकिन हमें कई टिक-टिक की, इधर-उधर भागने की आवाजे आती हैं।
लेकिन हमारी टीचर कहती है कि ये आवाजे चमगादड़ की, चूहे- बिल्ली की व कीडे - मकोड़ो की हैं।
तभी वहां आरजू के साथ हॉस्टल में रहने वाली एक लड़की आती है। और उसका नाम मुस्कान रहता हैं !
जब मुस्कान उन्हें स्कूल के बारे में बातें करता हुआ देखती है तो वो कहती है। हम एक बार छत पर भी गये थे। वहाँ जब हम एक दीवार को कूदकर आगे गये तो वहां एक बड़ा-सा हॉल बना हुआ था, जिसमें एक झूमर और कई सारे खम्भे थे।
लेकिन मेरी डरपोक सहेलिया चिल्लाने लगी, कि यहाँ से चलो। इसलिए, हम वापस आ गये।
तभी लंच खत्म होने की बेल बजती है और सब अपनी-अपनी क्लासो में चली जाती हैं। लेकिन रूही और ईरम आश्चर्य से एक दूसरे देखती ही रहती है। और छुट्टी मे रूही, ईरम से कहती है- क्यूँ ना हम भी स्कूल की छत और उस गुफा में चलें। मुझे भी वहां का झूमर और आकर्षक चीजे देखनी हैं।
ईरम भी कई देर से यही सोच रही थी, कि उन्हें
भी वो सब देखने जाना चाहिए।
लेकिन तभी ईरम कहती है कि हम दोनों अकेले नहीं चल सकते। हमें कम से कम दस लोगो को चलना चाहिए।
तभी वो दोनों आरजू के पास जाती है, आरजू उन्हे मना करती हैं।
तभी मुस्कान पीछे से आकर कहती है, जो पहले से ही वहां जाने के लिये उत्सुक थी। कि हम सब को चलना चाहिए। हमारे हास्टल में ऐसी कई लड़कियाँ है जो जाना चाहती हैं।
तभी मुस्कान उन दोनों को अपने हॉस्टल वाले कमरे में ले जाती है और अपनी फ्रेंडस सीमा, अलीना, शीना, सोनू, रूमी को बुलाती है।
और वो सब वहां पर चलने का प्लान बनाने लगती है।
तभी आरजू कहती है. हमे वहाँ नही चलना चाहिए ! वो डरावनी जगह हैं। मुस्कान उसे घूरते हुए कहती है तुझे नहीं चलना तो ठीक है हम लोग वैसे भी 8 हो गए। हम लोग चले जायेगे। आरजू को वहां जाने का डर तो था ही लेकिन सब कुछ देखने की इच्छा भी थी, इसलिए वो हाँ कर देती है।
मुस्कान और सारी लड़कियाँ मिलकर परसो जाने का प्लान बनाती हैं। मुस्कान कहती है, कल दो बजे स्कूल बंद हो जाएगा, लेकिन हम 2 बजे बाद जाएंगे तो हमे शाम हो जाएगी। परसो स्कूल की छुट्टी है। हम उस दिन सुबह दस बजे चलेंगे।
रूही और ईरम कहती हैं - हम कल यहीं रुक जायेंगे क्योंकि दो बजे स्कूल बंद होने के बाद वो एक - दिन की छुट्टी खत्म होने के बाद ही खुलेगा !
प्लान बनाने के बाद रूही और ईरम अपने- अपने घर चली जाती है।
उन्हें बस कल का इंतजार रहता है।
भाग-1पड़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद !
अब जल्द ही भाग-2 भी अपलोड किया जाएगा उसमें बताया जाएगा कि हॉस्टल के वो घंटे कैसे बीतते है !

