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Arunima Thakur

Inspirational

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Arunima Thakur

Inspirational

हमें गर्व है..

हमें गर्व है..

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सुनिए आपका पार्सल आया है। क्या मंगाया है ? लवली ने अपने पति को पार्सल थामते हुए पूछा।

"अरे कुछ भी नहीं ! यूँ ही कुछ पुस्तकें", अमित अनमने मन से बोला।

लक्ली आश्चर्य से अमित का मुँह देखते हुए बोली, "पुस्तकें और आप? क्या बच्चों की है ? या मेरे लिए मंगवाई है ? सॉरी सॉरी क्या यह आपका सरप्राइज था मेरे लिए और मैने खराब कर दिया"। कह कर वो पार्सल खोलने लगी।


अमित ने लवली के हाथों से पार्सल लेते हुए बोला, "नही तुम्हारे लिए नही है । वो तो बस... , यूँ ही .. , मैंने अपने पढ़ने के लिए मंगवाई थी"। 


अमित और लवली पति पत्नी है वो क्या कहते हैं हैप्पिली मैरिड कपल। पर एक दूसरे से बिल्कुल अलग। लवली किताबो की शौकीन तो अमित गानों का। अमित को ब्रांडेड चीजें पसन्द आती तो लवली को सामान्य महिलाओं की तरह छोटी दुकानों से मोलभाव करके सामान खरीदना। बस दोनो में एक बात समान थी कि दोनों एक दूसरे का, एक दूसरे की रुचियों का पूरा सम्मान करते थे। जब लवली कोई पुस्तक पढ़ रही होती अमित उसके साथ बैठ कर कभी लेटकर, गाने सुनता , फ़िल्म देखता। दोनो ने कभी अपनी पसंद दूसरे पर थोपी नही थी। दोनो ही अच्छा कमाते थे। उनको दो बच्चे भी है बहुत प्यारे प्यारे। खुशहाल परिवार।


आज पहली बार ऐसा था कि लवली ने महसूस किया कि अमित कुछ छुपा रहा है। खैर उसे मालूम था, विश्वास था कि वह आज नही तो कल बता ही देगा । 


कुछ दिन बाद एक रात को जब लवली की नींद खुली तो देखा अमित की तरफ की लाइट जल रही थी। अमित कुछ पढ़ते पढ़ते सो गया था। लवली को आश्चर्य हुआ। उसने पुस्तक उठा कर बंद करके रखा और लाइट बन्द करने जा रही थी तभी उसका ध्यान पुस्तक के नाम पर गया। ये पुस्तक ? इसे पढ़ने की अमित को क्या जरूरत हैं ? उसे अचानक से याद आया अरे हाँ न ... क्या यही पुस्तके अमित ने मंगवाई थी ? लवली ख्यालो को झटक कर सोने की कोशिश करने लगी। यह सोचते हुए कि वह कल सुबह ही इस बारे में अमित से बात करेगी। 


सुबह रविवार था। बच्चे खेलने चले गए थे। लवली ने अमित की ओर देखा। इतने सालों से साथ रहते रहते दोनो एक दूसरे के भावों से परिचित थे, बिना कहे समझ जाते थे। पर आज अमित बोला, क्या हुआ ? ऐसे क्यो देख रही हो?"


लवली बोली, "आपको इन पुस्तको को पढ़ने की आवश्यकता क्यो महसूस हुई"। 


अमित कुछ उत्तर न दे कर नज़रे झुका कर बैठ गया। 


लवली ने उसके बोलने का इंतजार किया फिर बोली, "मेरे प्यार में कुछ कमी रह गयी ? किसी ने कुछ कहाँ क्या" ? 


अमित बोला, तुम इतनी कुशलता से इंग्लिश बोलती हो। बच्चे भी अंग्रेजी माध्यम में पढ़ रहे है। जब तुम तीनों अंग्रेजी में बात करते हो तो मुझे बहुत अजीब लगता है। लगता है मैं कोई बाहरी हूँ जो तुम लोगो की बातों में शामिल नही है। इसीलिए मैं चाहता था कि मैं भी यह कोर्स करके अंग्रेजी भाषा बोलना सीखूं"।


लवली ने अमित के मायूस से मुँह को देखते हुए बोला, अरे वो तो इसलिए कि बच्चों को इंग्लिश में भी बोलने की आदत पड़े। वो अच्छे से इंग्लिश बोल सकें। वैसे भी बच्चे आपसे, दादा दादी से तो हिंदी में ही बात करते है। और आप लोगो के कारण ही वो कितनी अच्छी हिन्दी बोल और लिख पाते है। यहाँ तक कि बच्चे दादी से वीडियो कॉल पर हिंदी की पढ़ाई भी करते है। सच्ची बताइए क्या सच मे आपको मेरा बच्चो से इंग्लिश में बात करना बुरा लगता है? अगर ऐसा है तो मैं इंग्लिश में बात नही करूंगी"।


 अमित कुछ झिझकते हुए बोला, "नही नही मुझे वास्तव में तुम्हारा बच्चो से अंग्रेजी में बात करने पर बुरा नही लगता है। पंद्रह दिन पहले मैं पार्क में जब व्यायाम कर रहा था। मैंने किसी बच्चे को अपनी मम्मी से कहते सुना, आप मेरे स्कूल मत आया करो। आपको तो इंग्लिश बोलना भी नही आता। मुझे आपको मेरे दोस्तों से मिलवाने में शर्म आती है। और भी ना जाने क्या क्या, जो मैं सुन नही पाया क्योकि मैं सोचने लगा कि क्या मेरे बच्चे भी मेरे बारे में ऐसा सोचते होंगे। इसीलिए मैं अपनी इंग्लिश स्पीकिंग अच्छी करना चाहता था। लवली अपनी जगह से उठी और अमित को गले से लगा लिया, आप भी न क्या क्या सोच लेते है। इतने दिनों से अकेले परेशान थे"। 


अमित लगभग सुबकते हुए बोला, लवी मालूम है वो जो रुद्र सर है ना वो अपनी पत्नी को छोड़ कर .... । 


लवली आश्चर्य से बोली वो तो कितनी सुघड़, सुंदर और संस्कारी महिला है। उन्होंने बच्चो को कितने अच्छे संस्कार दिए । सास ससुर की देखभाल भी कितने अच्छे से करती है। उनको छोड़ कर ..किसी और के साथ ... क्यो ..?


"क्योकि उनकी पत्नी को अंग्रेजी नही आती । वो उनकी सोसायटी में घुलमिल नही पाती है। मैं डर गया था। मैं भी ऐसा ही हूँ। मैं तुम्हे ... । मैं तुम्हारे और बच्चो के बगैर नही जी पाऊंगा। 


"पर आप ने ऐसा सोच भी कैसे लिया। क्या मैं आपको ऐसी इंसान दिखती हूँ ? आपको मेरे और अपने बच्चों के संस्कारो पर विश्वास नही है ।", अबकी बार लवली गुस्से में बोली।


अमित मुँह लटकाए हुए बोला, "ऐसा नही है पर ...डर तो लगता है"। 


"और हाँ वो रुद्र सर अच्छे आदमी नही है। यह तो उनका बहाना है अपनी पत्नी को छोड़ने के लिये। वरना ऐसे तो उनमें भी कितनी कमियां है। सिगरेट पीते है, नशा करते है और भी ना जाने क्या क्या ... कायदे से तो उनकी पत्नी को उन्हें छोड़ देना चाहिए" लवली चिढ़ते हुए बोली।


"हाँ वही तो , कमियाँ तो मेरे में भी हैं",अमित धीरे से बोला।


लवली गंभीर होते हुए बोली, "क्या आप भी ? आप कैसे भूल गए, आपकी शुद्ध हिंदी बोलने की आदत पर ही तो मैं रीझी थी। याद है उस समय एक सीरियल में आशुतोष राणा कैसे शुद्ध हिंदी बोलते थे। उनका चरित्र नकारात्मक होते हुए भी एकदम दमदार था चारित्रिक दृढ़ता और सकारात्मकता से भरा हुआ"। 


अमित उम्र के इस मोड़ पर आ कर भी लवली की तारीफ और उसके आँखों मे तैरते अथाह प्यार को देख कर शर्मा गया।


लवली अपनी रौ में बोले जा रही थी, "आप को देखकर हमारे कॉलेज के कितने लोगों ने गर्व से हिंदी बोलना प्रारम्भ किया था। वो मेरी सहेली रिया याद है आपको, वो बचपन से कविता कहानियां लिखती थी । पर शर्माती थी क्योंकि हिंदी में लिखती थी । आपके कारण आज वो कितनी बड़ी लेखिका है। आप ने इतना अच्छा एप्प बनाया है कि आज लाखो लोग हिंदी रचनाएं पढ़ व लिख सकते है। नहीं तो हमारे समय मे तो हम इंग्लिश नावेल पढ़ना ही अपनी शान मानते थे और हिंदी कहानीकारों को पढ़ना अपनी तौहीन। आपने ही तो हिंदी साहित्य से मेरा परिचय करवाया। और आज आप ही ऐसी बात कर रहे है"। 


"सॉरी डिअर, मैं डर गया था"। 


ऊँ हूँ ऐसे नही। वैसे ही बोलिये जैसे पहले बोलते थे। 


अमित ने थोड़ी नाक सिकोड़ कर मुस्कुराते हुए उसे देख कर बोला, "क्षमा कर दो प्राणप्रिये। अब ऐसी त्रुटि यह सेवक नही करेगा"।


लवली उसके गले से लग कर बोली," जो मिठास आपके इन शब्दों से आती है वह इंग्लिश के डार्लिंग में नही है। जब आप मुझे प्राणप्रिया कहते है ना तो शरीर का रोम रोम आपके प्यार को महसूस कर पाता है। इस एक शब्द से मेरा आप पर अधिकार है इसका बोध होता है"।


अमित लवली के माथे को चूम कर उठते हुए बोला, "इसी बात पर मैं इन पुस्तकों को तिलांजलि दे कर, अपनी प्रिय अर्धागिनी के लिए चाय बनाकर लाता हूँ"। 


लवली अमित को बैठाते हुए बोली, "प्रिय पतियम चाय मैं बनाती हूँ। आप बैठे और आपने मंगवाई है इसलिए इन पुस्तकों का अध्ययन करें। किसी भी भाषा का ज्ञान होना उसमे निपुण होना अच्छी बात है। पर इस बात पर शर्मिंदा होना गलत है कि आपको सिर्फ अपनी भाषा बोली आती है। जैसे हम प्यार अपनी मौसी, चाची, बुआ सभी से करते हैं। सबको इज्जत भी देते है। पर माँ की जगह कोई नही ले सकता। वैसे ही हम सभी भाषाओं का सम्मान करते है पर हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। हमें हिंदी का प्रयोग करने में गर्व होता है। अगर आपको इंग्लिश बोलना अच्छे से नही आता है तो कोई फर्क नही पड़ता। मैं और आपके बच्चे आप पर गर्व करते है। आप लाखो करोड़ो लोगो को हिन्दी पढ़ने की सहूलियत और प्रेरणा देते हैं।

धन्यवाद

हम भी गर्व करते हैं और कृतज्ञ हैं । 


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