हमदम न ज्यादा न कम बराबर है हम
हमदम न ज्यादा न कम बराबर है हम
रसोई से बर्तनो की आवाज़ को सुनकर रिया चौक कर उठी और बोली आज तो बिल्ली आ गयी और मेरा अब सारा दूध खराब कर देगी। भाग कर रसोई में गयी तो देखा महाशय सूरज कुछ बना रहे है।
अरे आप हो, मैं तो डर ही गयी कि आज तो हो गया दूध का कल्याण।.तुम क्यों आयी हो, तुम बाहर जाओ आज का दिन मेरा है। तुम भूल गयी।.प्रिये आज रविवार है और हर रविवार मैं ही सबका नाश्ता और चाय बनाता हूँ।
हाँ सही कहा आपने बच्चों के साथ माथापच्ची करते करते मुझे भी भूलने की बीमारी हो गयी है। तो आज फिर नाश्ते में क्या बना रहे हो आप??आज तुम्हारा ये पति अपनी पत्नी की फेवरट आलू की सब्जी और पूड़ी और बच्चों के लिए सैंडविच बना रहा हूँ।
सच मे कितने अच्छे हो आप, कितना खयाल रखते हो हम सबका। रिया ने कंधे पर मारते हुए कहा
हाँ तो तुम भी तो मेरा, घर का और बच्चों का कितना ध्यान रखती हो हम दोनों एक गाड़ी के पहिये है, यदि हम गृहस्थी की गाड़ी को चलाने में बराबर साथ देगे, प्यार का पेट्रोल और डीज़ल देंगे तो हमारी ये गाड़ी 140 की रफ्तार से चलेगी। रिया लोगो के कहने से नहीं होता कि पति पत्नी को साथ चलना चाहिए। एक दूसरे की बातों को मनाना और स्वीकार करना चाहिए। इसके लिए दोनो को बराबर का काम और जिम्मेदारी लेनी चाहिए। हमदम न ज्यादा न कम बराबर है हम तभी तो हमारी दुनिया बराबरी वाली है। सूरज ने भी रिया की तरफ आंख मारते हुए कहा।
अब आप बातें ही करते रहोगे कि अब कुछ खाने को भी दोगे रिया ने सूरज को झेड़ते हुए कहा।
