STORYMIRROR

shekhar kharadi

Classics Inspirational

4  

shekhar kharadi

Classics Inspirational

हिसाब

हिसाब

1 min
244

मैं आंखों का पहरा नहीं रखता

पर वो सुंदर दृश्य दिखाती है।


मैं अश्रु का हिसाब नहीं रखता

पर वो निर्मल जल बहाती है।


मैं जुबां का ख़्याल नहीं रखता

पर वो अच्छी बातें सुनाती है।


मैं श्वासों का पौधा नहीं रखता

पर वो निस्वार्थ प्रकृति दिलाती है।


मैं प्रेम का पुष्प नहीं रखता

पर वो भीतरी भावनाएं मिलाती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Classics