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Ratna Pandey

Tragedy


4.8  

Ratna Pandey

Tragedy


गुड़िया

गुड़िया

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राधा के हाथों में अपनी बेटी आलिया की गुड़िया देखते ही आलिया की माँ ने राधा से वह गुड़िया छीनते हुए कहा, "अरे पुष्पा अपनी बेटी को क्यों लेकर आती हो, आलिया की इतनी महंगी-महंगी गुड़िया रोज-रोज गंदी कर देती है।"

"क्या करूँ मैडम जी घर पर अकेली छोड़ कर तो नहीं आ सकती ना, छोटी है मैं मना करती हूँ, फ़िर भी उठा लेती है।" 

पुष्पा ने अपनी बेटी राधा को गुस्से में एक चाँटा मार दिया। राधा रोने लगी उसे रोता देखकर आलिया ने दौड़ कर उसे अपनी गुड़िया दे दी। किंतु आलिया की माँ सानिया को यह अच्छा नहीं लगा और उसने आलिया को डांटते हुए राधा के हाथ से पुनः गुड़िया ले ली। 

आज तो घर जाते वक़्त पुष्पा बहुत दुःखी और नाराज़ थी। सानिया का ऐसा व्यवहार उसे बार-बार उसकी ग़रीबी और सानिया के घमंड की याद दिला रहा था। फ़िर भी वह कुछ नहीं कर सकती थी, वेतन अच्छा मिलता था अतः वह ख़ून का घूंट पीकर रह गई।

दूसरे दिन बीमार हूँ कह कर का पुष्पा ने तीन दिन की छुट्टी ले ली। चौथे दिन पुष्पा अपनी बेटी राधा को लेकर वापस काम पर आ गई। राधा को देख कर आलिया बहुत ख़ुश हो गई और दोनों साथ में खेलने लगीं।

कुछ ही देर में सानिया जैसे ही वहाँ आई राधा के हाथ में गुड़िया देखकर उसका गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसने आज झिड़कते हुए राधा से गुस्से में गुड़िया छुड़ा ली।

पुष्पा अपनी बच्ची के रोने की आवाज़ सुनकर दौड़ कर आई और सानिया का ऐसा दुर्व्यवहार देखकर अपनी बेटी को उठा कर सीधे घर से बाहर निकल गई। सानिया ने आवाज़ दी, "पुष्पा रुको"

लेकिन वह नहीं रुकी उन दोनों के जाते ही आलिया ने अपनी माँ से कहा, "मम्मा आपने आज राधा को क्यों डांटा? क्यों गुड़िया छीन ली?" 

"आलिया तुम्हारी गुड़िया है वह, हम तुम्हारे लिए लाते हैं, उसके लिए नहीं, समझी"

"लेकिन मम्मा आज तो वह गुड़िया राधा की ही थी। उसकी मम्मा ने उसे दिलाई थी, फ़िर आपने क्यों छीनी। मैं भी उसकी गुड़िया से खेल रही थी पर पुष्पा आंटी ने मुझसे गुड़िया नहीं छीनी।"


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