Nikita Kumari

Abstract


4.0  

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घर पर रहो सैफ रहो

घर पर रहो सैफ रहो

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अपने सबसे बुरे सपने में भी हमने नहीं सोचा था कि कभी हमें इस दौर से गुजरना होगा। ये सोचना भी कठिन है कि क्या किया जाए इन 21 दिनों में जो हमारा समय भी व्यतीत हो और हम इस लक्ष्मण रेखा (घर की चारदीवारी) को बिना लांघे बिना ऊबे घर पर रह कर कुछ सकारात्मक कर सकें।

हम सब घर रह कर ज्यादा से ज्यादा समय अपना परिवार के साथ बीता सकता है। जो बात आज तक हम अपने परिवार वालों से नहीं कर पाया है वो सब बात इस लॉकडाउन में कर सकता है। यह बहुत अच्छा समय है।

घर में रहने के खुशी के चक्कर में हमें ये नहीं भूल जाना है कि हमारा भारत देश के साथ साथ पूरा दुनिया एक बहुत बड़ी महामारी से गुजर रहा है जिसका दवाई अब तक किसी भी देश को उपलब्ध नहीं हुआ है तो इस हालत में बेहतर यही है की घर पर रहे।

स्टूडेंट्स जिस सब्जेक्ट में कमजोर है उस सब्जेक्ट में अच्छा मेहनत कर सकता है। जो कुछ भी वो सीखना चाहता थे और आज तक टाइम की कमी के कारण नहीं सीख पा रहे थे वो इस क्वारांटाइन में कर सकता है

अंत में मेरी आप सबसे यही गुज़ारिश है कि घर पर रहिए तथा अपने आप को इस वायरस से बचा कर रखिए और साथ ही साथ चौक पर दिन रात हम सबके लिए खड़े उन पुलिस के जवानों के लिए भी प्राथना कीजिए क्युकी जिस तरह हमें अपने परिवार से लगाव है ठीक उसी तरह उन्हें भी अपने परिवार से लगाव है वो भी चाह कर भी अपने परिवार से नहीं मिल पाते है। अपने आप को खुशनसीब समझिए कि आप अपने फैमिली के साथ है। और घर पर रहिए।


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