Shubham rawat

Drama Tragedy


4.0  

Shubham rawat

Drama Tragedy


एक गलत कदम

एक गलत कदम

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दीपक, 12वीं के बाद मास मीडिया की पढ़ाई करना चाहता है। उसका सपना है कि वह खुद के कार्टूनस बनाए। उसके पापा हमेशा से एक डिसिप्लिन इंसान रहे हैं। वह नहीं चाहते कि उनका बेटा बेगैरत के कार्टूनस बनाए। वह दीपक को डॉक्टर बनाना चाहते हैं। उन्होंने दीपक को बिना कुछ कहे उसके लिए नीट का फॉर्म भी भर दिया और उससे नीट की तैयारी करने के लिए कहा। दीपक ने अपने पापा को समझाया कि वह डॉक्टर नहीं बनना चाहता है। पर उन्होंने दीपक की एक भी नहीं सुनी वह केवल उसे डॉक्टर बनाना चाहते है।

    दीपक के लिए हमेशा से बंदिशें रही- वक्त पर स्कूल का होमवर्क करना है, आधे घंटे से ज्यादा टीवी नहीं देखना है, ज्यादा देर इधर-उधर फ़ालतू नहीं घूमना है। अगर कभी दोस्तों के साथ चला भी गया तो- वक्त पर घर लौटना है। अगर दिए हुए वक्त पर घर नहीं लौटा तो उसे अपने पापा के हाथों मार खानी पड़ती थी।

    दीपक ने अपने सपने तोड़ नीट एग्जाम की तैयारी करी और नीट एग्जाम पास भी करा। अपने पापा के डर से दीपक ने एग्जाम पास किया। अगर वह फेल हो जाता तो उसे अपने पापा के हाथों मार खानी पड़ती।

    वह औरतों को कभी अपने बराबर नहीं समझते थे। अगर कभी दीपक की मम्मी, दीपक का साथ देती तो वह दीपक की मम्मी को भी मारा करते।

     दीपक को कॉलेज में एडमिशन मिल गया था। साथ ही साथ रहने की परेशानी भी दूर हो गई थी। हॉस्टल में एडमिशन मिल चुका था। वह हॉस्टल में काफी खुश रहने लगा था, वहां की जिंदगी उसे काफी पसंद आ रही थी।  वहां उसके लिए उसके पापा की बंदिशें नहीं थी। हॉस्टल के नए दोस्त, सब के सब बेपरवाह, एक अलग ही माहौल बनाए रहते थे वो, वार्डन के जाने के बाद रात को शैतानी करना। दीपक अब खुद का आज़ाद महसूस करने लगा था।

     सेमेस्टर की छुट्टियों के बाद वह घर चला गया। उसने बाल बड़ा लिए थे। दीपक के लंबे बाल देख उसके पापा ने कहा, "यह कैसे बाल रखें....।" दीपक ने कहा, " बारहवीं तक तो हमेशा जीरो कट बाल ही रखें, तो सोचा कि थोड़े बाल बड़ा लूं।" उसके पापा को इस तरह के बाल बिल्कुल पसंद नहीं आते। उन्हें लगता है कि लंबे बाल सिर्फ आवारा लड़के रखते हैं। और सीधा उसका हाथ पकड़ के उसे नाई की दुकान पर ले जाते हैं। और फिर से उसके जीरो कट बाल कटवा देते हैं।

     पहले सेमेस्टर में दीपक के 66 परसेंट नंबर आते हैं। उसके पापा उसके नंबर से खुश नहीं होते है। वह चाहते हैं कि वह हर सेमेस्टर में 80 से 90 परसेंट के बीच नंबर लाए।  वह उसके नंबर से नाखुश होते है, कहते है, "तू वहां पढ़ाई करने गया है या मज़ाक करने गया है।" गुस्से में आकर उसे डंडे से पीटते है, कहते है, "बिगड़ गया है तू, तुझे पर लग गए हैं, मेरा तेरे साथ ना होने से।"

     दीपक खुद की जिंदगी को सजा समझने लगा था।  उसके पापा उसका फोन चेक किया करते, "कहीं किसी लड़की से बात तो नहीं करता है, कहीं फोन में कुछ गलत तो नहीं देख रहा।"

      दीपक बहुत परेशान हो चुका था। एक रात वो खुद के लिए फाँसी का फंदा बनाता है। पर लटकने के लिए उसके कमरे में पंखा नहीं था। वह इधर-उधर देखता है, पर उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या ढूंढ रहा है, और कमरे से बाहर निकल आता है।

      वह किचन में जाता है और चाकू उठा कर बाहर आ जाता है। एक कागज़ पर लिखता है, "मुझे माफ़ कर देना मम्मी", और उस चाकू से खुद की नस काट लेता है।

     

      


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