Namrata Pillai

Abstract

4.7  

Namrata Pillai

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एक दास्तान

एक दास्तान

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मोहब्बत की वो हसीन

दास्तान बयान करते हैं।


एक हम थे एक तुम थे

जो मिलकर जिया करते थे वो

लम्हों की दास्तान आज भी है।


क्या हुआ ऐसा की तुम ख़फ़ा हो गये,

किस बात की शिकायत हम से है ?

ना अब बयान होगी

अब वो मोहब्बत की कहानी,


क्यूँकि ये तो थी बस

एक तरफ़ा कहानी।


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