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Nitu Mathur

Inspirational


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Nitu Mathur

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एक बंधन.. पक्षपात से परे

एक बंधन.. पक्षपात से परे

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एक दबा सा , घबराया सा और बहुत हड़बड़ाहट वाला शोर विजयलक्ष्मी को अपनी बेहोशी वाली हालत में सुनाई दिया। उसकेपीछे एक ज़ोर से कुछ गिरने की आवाज़ सुनाई दी, जो कि उतनी ही दर्द भरी थी , जैसा उसने सोचा था। असल में सुबह उठने के दौरान उसे अचानक चक्कर सा आ गया और वो ज़ोर से चिल्लाते हुऐ फर्श पर गिर गई थी। उसे लगा जैसे उसके सिर से बहुत सारा खून निकल रहा है, और इसलिए उसे बहुत दर्द हो रहा था। यादों के ये किस्से उसके साथ बीते हुऐ पल थे , जो उसके गहरी नींद में डूबने से पहले उसके साथ बीते थे, और जैसे हमेशा उसके साथ रहने वाले थे।


तेज़ चमकती सूरज की रोशनी हॉस्पिटल के कमरे को चीरती हुई उसके घर के कमरे तक आ रही थी, तभी विजयलक्ष्मी ने पलकें झपकाई और अपनी आंखे खोली और देखा कि उसकी पोती सिरिशा और उसका बेटा श्रीनिवास पास में सोफे पे बहुत थके हुए और उदास नजर आ रहे थे। सिरीशा उसकी तरफ़ आई और उसने विजयलक्ष्मी को गले लगा लिया, उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। श्रीनिवास भी जल्दी से अपनी मां के पास आया और उसका हाथ पकड़ कर बोला " अम्मा.. भगवान का शुक्र है कि आप वापस घर आ गई।" विजयलक्ष्मी को अब ये महसूस हुआ कि ना सिर्फ वो खुद बल्की उसका परिवार भी काफी दिनों से इस तूफ़ान से जूझ रहा था। " मैं वहां कितने टाइम तक थी?" सिरीशा ने बताया कि आज पूरे नौ दिन हो गए हैं, जब आप ज़ोर से गिर गई थी, और तबसे हम लगातार प्रार्थना कर रहे थे कि कुछ चमत्कार हो जाए ।

विजयलक्ष्मी धीमे से मुसकाई और बोली कि तुम्हारे इस प्यार ने ही मुझे ये नई ज़िंदगी दी है। सिरीशा ने कहा कि ये सब सिर्फ़ हमारे प्यार और प्रार्थना की वजह से ही नहीं हुआ है, बल्कि अपको नई ज़िंदगी देने वाला एक सच्चा मसीहा कोई और भी है। श्रीनिवास ने सिरीषा को इशारा किया कि वो आगे की पूरी बात ना बताए, सीरिशा समझ गईं। उसने कहा कि वो अपनी मां अनन्या को बताने जा रही है कि अम्मा को होश आ गया है। उसने विजयलक्ष्मी को माथे पे चूमा और कमरे से बाहर निकल गई। 


विजयलक्ष्मी उस मसीहा के बारे में सोचने लगी , उसने श्रीनिवास से इसके बारे में पूछा ,लेकिन उसने बात को टालते हुए कहा कि सही समय आने पे पता चल जायेगा। 

तभी डॉक्टर चेकअप केलिए अंदर आया और बोला कि ये बहुत बहादुर हैं, इन्होंने अपनी ये लड़ाई बड़े ही धैर्य से जीती है। डॉक्टर ने इस बात को फिर से दोहराया कि ब्रेन हैमरेज के कारण इनका बहुत खून बहा है, इसलिए अपनी ताकत और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इन्हे अच्छे से खाना पड़ेगा। विजयलक्ष्मी ने डॉक्टर को थैंक्यू कहा, लेकिन उसने फिर से कहा कि वो इनकी मदद तभी कर पाया जब वो टाइम से इन्हे हॉस्पिटल ले आई और साथ में डोनर भी लेकर आई जिनकी वजह से इनकी जान बच पाई।


विजयलक्ष्मी की उत्सुकता और बढने लगी उसने श्रीनिवास से पुछा कि कौन है वो मसीहा? उसी वक्त दरवाज़े पर खटखट हुईं, सीरीशा अंदर आई और उसके पीछे उसकी पक्की दोस्त आरिफ अहमद थी। अचानक विजयलक्ष्मी मुस्कुराई , आरिफा उसके पास आई और उसका हाल पूछने लगी। विजयलक्ष्मी को सीरिषा की दोस्त आरिफा बिल्कुल पसंद नहीं थी, क्यूंकि उसका धर्म अलग था, पहनावा अलग था और उसका बरताव भी बिलकुल बिंदास था। आरिफा एक बिलकुल बिंदास और आजाद खयालात वाली लड़की थी, जो की एक बडी, भारी बाइक राइडर थी, 

एक टॉम ब्वॉय टाइप की लड़की थी, अपनी कम्यूनिटी के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती थी, वो और सीरिशा पिछले सात साल से दोस्त थे, लेकिन आरिफा की लाख कोशिशों के बाद भी विजयलक्ष्मी अपने पक्षपात और झूठे असूलो के कारण उसे बिलकुल पसंद नहीं करती थी।


आरिफा अपनी इस नापसंदगी से अच्छी तरह वाकिफ थी, लेकिन फिर भी उसने सीरीषा और अनन्या से अपना रिश्ता कभी नहीं तोड़ा। जब सीरीश की मम्मी अनन्या कोविड पॉजिटिव थी, और सब लोग होम क्वारेंटाइन हो गए थे,सब तब भी आरिफा और उसकी मम्मी ने उनके लिए बाहर से राशन लाने और खाना देने में बहुत मदद की। सीरिशा अब खुद को नहीं रोक पाई और बोली " अम्मा आप उस मसीहा के बारे में जानना चाहती थी ना, और अब जब वो अपके सामने है, तो आप अपने वही पुराने उसूल लिए बैठी हो "। 


विजयलक्ष्मी एकदम हैरान रह गई, उसने श्रीनिवास की तरफ देखा और उसने भी सर हिलाया। उसने कहा वो आरिफा ही थी जिसने आपको टाइम से हॉस्पिटल पहुंचाया, क्यूंकि एंबुलेंस कॉविड ड्यूटी में लगी हुई थी। और जिस तरह विजयलक्ष्मी का ख़ून लगातार बह रहा था, उन्हे इमरजेंसी सर्जरी की जरूरत थी, और आठ _ नौ यूनिट A नेगेटिव ब्लड की जरूरत थी। तब भी वो आरिफा ही थी, जिसने टाइम से अपना ख़ून देकर आपकी जान बचाई। अचानक विजयलक्ष्मी को आरिफा के प्रति उसके बरताव पे बहुत शर्म आई और बेहद अफसोस हुआ। उसने आरिफा को अपने पास बुलाया , उसका हाथ पकड़ा , उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे, उसने आरिफा से माफ़ी मांगी और उसे अपने तहे दिल से शुक्रिया किया। आरिफा भी भावुक हो गई , उसने विजयलक्ष्मी को गले लगाया और पुछा " कि क्या अब वो उसे अम्मा बुला सकती है?"


अपने झूठे असूलो और पक्षपात को एक तरफ छोड़िए, अपने दिल के दरवाजों को प्यार और दोस्ती के लिए धर्म , जाति और असूलो से हटाकर सबके लिए खुला रखिए।  एक आज़ाद खयाल वाली सोच और बिंदास खुशी महसूस कीजिए। 



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