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shachi Nigam

Abstract

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ए मुसाफिर

ए मुसाफिर

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याद बहुत करते हैं तुमको , ए मुसाफिर,

जल्द ही दुनिया में वापिस अजाओ ए मुसाफिर ।

घूमना है मुझे तेरे संग ए मुसाफिर, तेरे रंग में डूब जाएंगे ए मुसाफिर।

काश हम तेरी छांव में लौट आए ज़िन्दगी, ज़िन्दगी बहुत अजीब है,

पता नहीं किस मोड़ पर हमे ले जाए।


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