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दरिंदा

दरिंदा

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डियूटी से लौटते हुए इंस्पेक्टर राघव की नजर अंधेरे में अकेले चलती हुई लड़की पर पड़ती है। वह अपनी बाइक की स्पीड कम करके उसके नजदीक रूक जाते है और उससे यहाँ होने का कारण पूछते हैं।

"इतनी रात में कहाँ जा रही हो ?" अचानक सामने एक पुलिसवाले को देख कर लड़की घबरा जाती है। उसके मुँह से जवाब नहीं निकलता।

"कुछ पूछा तुम से ! घर से भाग रही हो क्या ?"

"वो ...मैं.. मैं..।" आवाज अटक गई गले में उसके। डर लग रहा था इंस्पेक्टर की आँखों से। पता नहीं क्या होगा सोच कर वह डरे जा रही थी आखिर उसने हिम्मत करके कहा..

"आप ऐसा सवाल क्यों पूछ रहे हैं ? क्या लड़कियों को रात को निकलने की मनाही है।"

"ज्यादा समझदार लग रही हो।इतनी रात गए सड़क पर अकेले घूम रही हो कोई कुछ कर दे तो ? जवाबदेही तो पुलिस की बनेगी। रहती कहाँ हो ?"

"जी लक्ष्मी कॉलोनी, मकान नंबर बीस" लड़की ने जवाब दिया।

"बैठो बाइक पर।" इंस्पेक्टर ने कहा।

"क् क् क्यों ?" लड़की और घबरा गई।

"चुपचाप बैठो ! कहा ना।"

"देखो इंस्पेक्टर ज्यादा होशियार नहीं बनना। मुझे पता है कैसी होती है पुलिस। नहीं बैठूंगी मैं।"

"चुप होकर बैठो। कह कर इंस्पेक्टर ने उसका बैग ले लिया।लड़की अब विरोध नहीं कर सकती थी। वो चुपचाप बाइक पर बैठ गई।इंस्पेक्टर ने बाइक स्टार्ट कर दी और स्पीड बडा दी।बाइक शहर की तरफ न मुड़कर जंगल की ओर मुड़ गई। अब लड़की की हालत खराब होने लगी। वह उस समय को कोस रही थी जब घर से निकली।

तभी इंस्पेक्टर का मोबाइल बजा।

“हाँ तैयार रहो, मैं पहुंच जाऊंगा सारी तैयारियां हो गई है।

हाँ ..चिंता न करो बस पहुँचने वाला हूँ। पूरी रात पार्टी होगी, रखता हूँ।”

इंस्पेक्टर की बात सुन लड़की को पक्का यकीन हो गया था वह मुसीबत में फंस गई है लेकिन अपनी घबराहट पर काबू पा वह आने वाले समय के लिए खुद को तैयार करने लगी। बाइक की स्पीड बढ़ती जा रही थी और उसका डर भी।

उसे यकीन हो गया था कि आज किसी राक्षस के चंगुल में फंस गई है। शरीर पसीने से भीग गया।बुरे बुरे ख्याल आये जा रहे थे।उसे नहीं पता कि वे कहाँ जा रहे है। लग रहा था जैसे गिर पडेगी।मन हुआ जोर से चिल्लाएं लेकिन तन शिथिल पड़ चुका था कि अचानक जोर से ब्रेक लगे और बाइक रूक गई। डरकर उसने आँखें बंद कर ली।

“उतरो नीचे !”

“नहीं उतरूंगी।” आँखें बंद किये हुए ही उसने जवाब दिया।

“मतलब दिमाग बिल्कुल नहीं है आपमें ? घर आ गया है आपका जाइए।मुझे भी अपने घर पहुँचना है।सारे दिन डियूटी तो नहीं कर सकते ?” इंस्पेक्टर की बात सुनकर लड़की ने आँखें खोल कर देखा तो वह अपने घर के सामने थी। हैरानी से वह इंस्पेक्टर को देखने लगी।

“वो ...वो ..आप जंगल के रास्ते क्यों आए ? सीधे भी तो आ सकते थे ?”

“मैड़म यह हिन्दुस्तान है। यहाँ इतनी रात में लड़कियां घर से बाहर नहीं होती और पुलिस के साथ तो कतई नहीं। पूरे शहर को पता चल जाता कि फलाने की लड़की इंस्पेक्टर की बाइक पर थी। अब आप जाइए मुझे भी निकलना है।”

आश्चर्यचकित हो कर वह इंस्पेक्टर की बात सुन रही थी।

जिसे न जाने क्या समझ रही थी वह इतना सुलझा इंसान वह भी आज के युग में। सोचते हुए वह घर की तरफ मुड़ गई । अभी दो कदम ही चली थी कि आवाज आई..

“मैडम याद रखना घर छोड़ने वाला नहीं घर से इतनी रात को बुलाने वाला दरिंदा होता है।”


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