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Diya Jethwani

Drama Romance Others

3  

Diya Jethwani

Drama Romance Others

दिल हैं हमारा खिलौना नहीं.(4)

दिल हैं हमारा खिलौना नहीं.(4)

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रितिक घर तो लौट रहा था लेकिन एक घबराहट और बैचेनी उसके दिल को पहले से ही महसूस होने लगीं थीं...। 

घर पर.... 

शिल्पी:- मिल गई फुर्सत तुम्हें हमारे लिए...। बड़ी जल्दी वापस आ गए...। रह जाते एक दो महीने ओर.. तुम्हें कहाँ मेरी परवाह हैं..। 

रितिक :- क्यूँ इतना बिगड़ रहीं हो जान...। रोज़ तो फोन करता था ना तुम्हें... तुम्ही फोन नहीं उठाती थी.. मैंने तो साथ चलने को भी कहाँ था..। वो भी तुम्हारा ही घर हैं ना..। पापा, रेणु, मनीष सब पुछ रहें थे... सभी रिश्तेदार तुमसे मिलना चाहते थे..। तुम भी साथ चलतीं तो...! 

शिल्पी:- बस कीजिए.... मुझे मत सिखाइये... मुझे क्या करना चाहिए क्या नहीं...। अगर उन सभी को इतनी ही मेरी और तुम्हारी फिक्र होतीं तो मेरी बात मान लेते.... यूं इस तरह घर से नहीं निकाल देते..। अरे मैं पुछती हूँ.... ऐसा भी क्या कर दिया था मैंने सिर्फ अपना हिस्सा ही तो मांगा था ना.. । 

रितिक :- शिल्पी प्लीज बस करो... फिर से वहीं सब बातें मत निकालो.... । हिस्सा लेने से मैंने मना किया था उन्होंने नहीं...। मुझे इस बारे में तुमसे कोई बात नहीं करनी हैं....। कभी कभी तो लगता है तुमने मुझसे प्यार और शादी सिर्फ पैसों के लिए की हैं...। मैं ही पागल था जो परिवार के खिलाफ जाकर भी तुम्हारे साथ खड़ा रहा..। 

शिल्पी :- हाँ तो कोई अहसान नहीं किया हैं मुझ पर... प्यार और शादी करके.... अहसान तो मेरा मानो जो मैंने तुम्हें हाँ की...। अरे डाक्टर, इंजीनियर की लाइन लगी हुई थी मेरे पीछे..। मेरी तो बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी जो मैंने सब छोड़ कर तुम्हें हाँ कर दी...और एक बात मेरी कान खोलकर सुन लो ये प्यार व्यार से घर नहीं चलता हैं.... घर चलाने के लिए पैसा चाहिए पैसा...। मेरा दिमाग भी उस वक्त घास चढ़ने गया था...। सोचा था इकलौता बेटा, सरकारी कर्मचारी बहुत कुछ होगा... लेकिन तुम और तुम्हारे पिता दोनों कंगाल निकले... और तुम्हारी वो बहन नागिन बनकर मेरी बची खुची खुशियों को भी डस गई...। 

रितिक गुस्से से:- बस करो शिल्पी... खबरदार जो रेणु के बारे में एक लफ्ज ओर कहा तो...। हर चीज़ पैसों से नहीं खरीदी जाती शिल्पी... ओर तुम जिस रेणु को इतना बुरा बोल रहीं हो ना.... आज अगर मैं तुम्हारे साथ रह रहा हूँ ना तो सिर्फ उसकी वजह से... आई बात समझ में...। पैसा पैसा पैसा.... जब देखो तब पैसा... किस बात की कमी दी हैं तुम्हें...। खुद का घर हैं.... घर में हर जरूरत का सामना हैं...और क्या चाहिए..! 

शिल्पी:- क्या कहाँ तुमने.... जरूरत... छोड़ो रिकी.... तुम क्या जानो मेरी जरूरत...। कितने महीनों से मैंने नए कपड़े नहीं लिए हैं... तुम्हें पता हैं....! एक टु व्हीलर तक तो तुमसे दिलाई नहीं जाती...। बात करते हो जरूरत की....ओर इस वन बीएचके को तुम घर कहते हो..! कहाँ शुरू.. कहाँ खत्म...। 

रितिक:- मुझे तो समझ में ये नहीं आता की तुम्हें कमी किस चीज की हैं....। कितने लोगों के पास सर छिपाने के लिए छत भी नहीं होती.... हम कम से कम उन लोगों में तो नहीं हैं...और फिर दो लोगों के लिए यह घर भी बहुत हैं...। परिवार बढ़ेगा तो घर भी बड़ा ले लेंगे...। मैं अपनी तरफ से हर मुमकिन कोशिश तो कर रहा हूँ ना...। 

शिल्पी:- आ गए ना अपनी बात पर फिर से... लेकिन मैं भी जुबान की पक्की हूँ रिकी...। परिवार तो मैं तुम्हें तभी बढ़ाने दूंगी जब तुम अपने बाप से हिस्सा लेकर आओगे.... वरना इस बारे में सोचना भी नहीं...। 

रितिक गुस्से से:- वो दिन कभी नहीं आएगा शिल्पी.... और तुम्हें क्या लगता हैं... तुम मेरे सामने ये घटिया शर्त रखोगी तो मैं तुम्हारे सामने घुटने टेक दूंगा...! कभी नहीं.. वो लोग ओर होंगे जो सिर्फ शारीरिक संबंध के लिए शादी करते हैं....। तुम मानो या ना मानो मैंने तुमसे प्यार और शादी उसके लिए कभी नहीं की....। इतने समय से तुम्हें कभी हाथ भी लगाया हैं मैने..? तुम अढ़ी रहो अपनी फालतू की जिद्द पर.... । 

ऐसा कहकर रितिक जोर से दरवाजा पटकते हुए बाहर चला गया...। 


रितिक वहाँ से गुस्से में एक बीयरबार में चला गया....। जो की रितिक हर बार करता था...। 


शिल्पी के लिए भी ये सब कुछ कोई नया नहीं था... इसलिए वो बेफिक्र होकर बैठी रहीं...। 


वहीं दूसरी ओर राज़ के घर..... 


रेणु की रीति रिवाजों के साथ गृह प्रवेश की रस्में होने के बाद....सभी मेहमानों के चले जाने के बाद...। कुछ दिनों बाद.... 

राज:- रेणु.... तुम्हें तो सब पता होगा मैं ज्यादा वक्त के लिए यहाँ नहीं आया हूँ....। इसलिए अगले हफ्ते मुझे वापस जाना हैं... और वहाँ जाकर फिर तुम्हें साथ ले जाने की भी प्रोसिस करनी हैं तो.... 

रेणु :- मतलब तुम और मैं अभी साथ नहीं चल रहें..? 

राज़ :- नहीं रेणु... मैं कुछ महीनों बाद आकर तुम्हें ले जाऊंगा..। 

रेणु:- लेकिन राज़ इस बारे में मैंने बात की थीं तुमसे.... तुमने कहा था सब इंतजाम करके आ रहें हो..। 

राज़ :- हां कहा था पर मैंने झूठ कहा था..... उस वक्त बोलता तो तुम शादी के लिए हां ही नहीं करतीं और फिर कुछ महीनों की ही तो बात हैं....। अभी मेरा कैरियर बहुत ही अच्छे दौर से गुजर रहा हैं... तभी तो तुम्हें इस बार शादी के लिए तुरंत हां कर दी... । अब ये छोटी सी बात तो हम साथ मिलकर अडजेस्ट कर सकते हैं ना..। 

रेणु :- बात कुछ महीनों की नहीं हैं राज़... बात हैं सच की....। 

राज़ रेणु के करीब आते हुए:- अरे मेरी जान... माफ कर दो मुझे... प्लीज....ये कुछ महीने मेरे लिए भी बहुत मुश्किल से निकलने वाले हैं जान....। 

ऐसा कहते कहते वो रेणु को अपनी बांहों में भर लेता हैं और रेणु अपनी सारी नाराजगी भुलाकर खुद को राज़ की बांहों में समर्पित कर देतीं हैं...। 


वहीं दूसरी तरफ स्वाति .... 

मनीष :- क्या बात हैं डियर आज बहुत उदास लग रहीं हो..! 

स्वाति:- पता नहीं क्यूँ मनीष.... मन बहुत घबरा रहा हैं... एक अजीब सी बेचैनी सी हो रहीं हैं...। 

मनीष :- रितिक चला गया इसलिए..! 

स्वाति :- उसे तो जाना ही था ना.... सच से वाकिफ हूँ लेकिन फिर भी ये दिल हैं की अभी भी बस उसके लिए ही धड़कता हैं..। 

मनीष :- मैं समझ सकता हूँ डियर... प्यार चीज ही ऐसी होतीं हैं...। लेकिन हम कर भी क्या सकते हैं...। एक छोटी सी गलतफहमी जो उसके दिमाग में बैठी हुई हैं वो पता नहीं कभी उसे.... 

स्वाति :- कभी ना ही पता चले तो अच्छा हैं मनीष.... कम से कम वो अपनी शादीशुदा जिंदगी में तो खुश रहेगा...। 

मनीष :- खुश.... चाहता तो मैं भी वहीं हूँ वो खुश रहें... पर पता नहीं क्यूँ लगता नहीं हैं..। 

स्वाति :- इसी बात की फिक्र तो मुझे भी हो रहीं हैं....। मैं तो शिल्पी के बारे में ज्यादा जानती भी नहीं हूँ.... जो कुछ सुना हैं बस तुमसे ही सुना हैं..। 

मनीष मजाक करते हुए :- तुम्हें रितिक से फुरसत मिले तो ना... वरना एक ही कालेज में होते हुए....। 

स्वाति मुस्कुराते हुए :- मनीष तुम भी ना...। 

मनीष :- अच्छा अभी ये बताओ... तुम चाची के यहाँ क्यूँ जा रहीं हो...? 

स्वाति :- डियर सच बताऊँ तो मैं खुद अब यहाँ रहना नहीं चाहतीं.... अब रेणु भी यहाँ से चलीं जाएगी.... मन नहीं लगता.... इसलिए सोचती हूँ अभी हमेशा के लिए चाची के यहाँ ही शिफ्ट हो जाऊँ...। तुम्हें तो पता हैं मम्मी पापा के बाद से चाची बोल रहीं थी आने को.... मैं ही यहाँ रुकी हुई थी...। पहले रितिक.. फिर रेणु... तुम...अब मन नहीं लगेगा यहाँ...। 

मनीष:- कब तक ऐसे ही खुद से भागती रहोगी डियर...। रितिक जैसे भी हैं वो अपनी जिंदगी में आगे तो बढ़ चुका हैं ना.... तुम भी किसी को अपना लो डियर..। 

स्वाति :- नहीं डियर... मुझसे ऐसा कभी नहीं होगा.... कभी नहीं...। इस दिल में.... मेरी जिंदगी में रितिक की जगह कभी कोई नहीं ले सकता...। 

मनीष:- लेकिन स्वाति.... 

स्वाति:- अच्छा अभी ये सब छोड़ो ओर बताओ तुम परसो चल रहें हो ना मुझे छोड़ने...। 

मनीष :- ये भी कोई पुछने की बात है...। 

स्वाति :- डियर....एक बात कहूँ...। तुम्हारी तो रितिक से बात होती रहेगी.... मुझे उसकी खबर देते रहना..। 

मनीष मुस्कुराते हुए :- तुम ना भी कहती तो भी बताता यार....। एक मैं ही तो हूँ .....तुम्हारा हमराज़....। 

स्वाति मनीष को गले से लगाकर :- थैंक्स डियर...। चलतीं हूँ अभी...। 


क्या कभी स्वाति और रितिक एक हो पाएंगे..? 

या फिर शिल्पी का शादीशुदा जीवन सुखमय होगा..! 

कैसा होगा रेणु का गृहस्थ जीवन...? 

जानते हैं अगले भाग में..। 



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