दिनेश सिंहः नेगी

Tragedy

3.5  

दिनेश सिंहः नेगी

Tragedy

दहेज उत्पीड़न

दहेज उत्पीड़न

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हे बेटों मत करो दहेज़ उत्पीड़न

होती बहुओं को बहुत ही पीडन

मत ठुकराओ घर की लक्ष्मी को

खुशी से बाबूल घर छोड़ आई


कब तक लालच का मोह

करते हो बहुओं का विहोह

बेटी की बाबुल है बड़ा दानवीर

चलेगा कितने दिन घर- संसार


झेलेगी कब तक बहुवें शोषण

बहुओं को दो सही से पोषण

काल-कवश सी सज्जी धजी दहेज

कर लो बेटो इसका परहेज


मिला है जो बेटो ससुराल से

घर मान मर्यादा है बहुओं से

छोड़ दो आज ही दहेज परित्याग

बहुओं से चमकेगा तेरा घर का भाग!


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