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Gayatri Yadav

Romance Fantasy

3  

Gayatri Yadav

Romance Fantasy

डाक्टर साहेब -3

डाक्टर साहेब -3

2 mins
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अंतिम बिदाई .... पता तो नहीं था मुझे ये हम आपसे अंतिम बिदा ले रहे है, मैंने  कहीं से पढ़ा था कि स्टेशनों ने देखें है सबसे अधिक प्रेमी और प्रेमिका के विरह को, मै उस पल महसूस कर रही थी उन पंक्तियों को, आपका वो मुझे महफूज करके ले जाना और मेरे गंतव्य के लिए छोड़ना , मेरा दिल रो रहा था पर मैं शायद उस समय आपसे भी भयभीत थी । आपका वो अंतिम बार मुझे देखना, मैं भी देख रही थी पर आप मेरी आंखों से ओझल हो गए , आंखों में आंसू से फिर भी नजरे इधर उधर दौड़ रही कहीं से उसकी एक झलक मिल जाए तो दिल को सुकून मिल जाए...... शायद इतने खुशनसीब नहीं हैं हम, जब आप मुझे बैठाकर कर उतर रहे थे मैंने अपनी उंगलियों को आपके कंधे पर रखा , मन तो कर रहा था कि कसकर आपको गले लगाऊं,आपका ऐसे जाता देख शायद मेरी जान जा रही थी, जिन बातों के लिए मैं गर्व महसूस करती हूं कि आपको मैने चुना वो आपका हमारे प्यार में उन सीमाओं को न लांघना जो इस समाज ने तय की है । ये है मेरी अधूरी ख्वाहिशों के हंसी पल, मैं चाहती हर प्रेमी तुम्हारी तरह हो, पर आप वो एक हो जो बस मेरा हो , इस मामले में शायद मै  थोड़ी स्वार्थी हूं पर कोई बात नहीं ओ कहते है न प्यार और जंग में सब जायज है, मैं ये भी जानती हूँ कि कुछ खामियां है मुझमें शायद इसीलिए मैं आपको नहीं पा सकी..... मुझे कुछ लाइने याद आ रही हैं जो मैंने बारहवीं में पढ़ी थी .... जो मुझे याद आ रही है और उन पंक्तियों को  मै महसूस भी कर रही हूं .. सुआ काल हरि लै गा पीयू, पियू नहीं जात, जात बर जीयु ..... पर मेरी एक ही ख्वाहिश है कि मैं तुम्हें एक अंतिम बार देखना चाहती हूं ......तुम्हारी.......


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