डॉक्टर साहेब -2
डॉक्टर साहेब -2
कुछ बातें मैंने अनकही छोड़ दी है, शायद वो आपके हिस्से की खुशियां और प्यार था जो मैं ना दे सकी ..... पहली बार जब मैंने आपके मुख से अपना नाम सुना था, मै स्तब्ध थी, सच बता रही हूं ये लिखते हुए मैं मुस्कुरा रही हूं, पर कुछ खालिस है दिल में जो छुपा रही हूं। आपका मेरी वो चिन्ता करना और ये कहना डॉक्टर साहेब यही पैर दर्द करता है आपका और फिर मेरे पैरों को दबाना, तब मैं सोच रही थी प्यार यही होता है क्या, उस समय मेरे दिल में एक ही बात चल रही थी काश ये पल यही थम जाता और आप हमेशा के लिए मेरे हो जाते।
जब मैंने कुछ पल के लिए आपको अपनी बाहों में लिया था और आपके माथे वो चुंबन किया था,मुझे रोना आया था तुम्हे कभी न कभी खो देने के ख्याल से पर जो खुशी मुझे उस समय मिली थी मैं बयां तो नहीं कर सकती या फिर ये कहूं कि ऐसे शब्द ही नहीं है मेरे शब्दकोश में जो उन लम्हों को शब्दों में पिरो सकें।
फिर आए वो पल जब मुझे तुमसे बिदा लेनी थी, पर दिल कह रहा था एक बार रोक लेते आप मुझको, तेरे साथ चलना ऐसा लग रहा था सबसे सेब महफूज घेरे में हूँ मैं, आपका ये कहना डॉक्टर साहेब हर बात पर जिद अच्छी नहीं लगती पर आपसे जिद करना मुझे पता नहीं क्यों इतना सुकून देता था। मुझे पता था आप मुझसे गुस्सा है पर इस दिल को कौन समझाए ये तो बस आपको ही देखना चाहता था , आपकी वो छुपकर ली गई तस्वीरें संभाल के रखी है मैंने गैलरी में शायद उनको देखकर मैं जिंदा हूँ पर उस पल मुझे नहीं पता था कि ये पल मेरी जिंदगी में आयेगा, कि तू मुझसे ऐसे रूठ कर चला जाएगा हमेशा के लिए, ये पीड़ा शायद मेरी अंतिम सांस के साथ खत्म हो। आपके साथ बिताए हर लम्हे मेरे लिए अनमोल हैं, आपके किरदार को के बारे कुछ लिखने की कोशिश कर रही हूं पर शायद शब्द नहीं बयां कर पाएंगे , पर अगर मुझे जिंदगी में किसी सख्स से प्यार हो तो मैं ईश्वर से ये प्रार्थना करूंगी वो सख्स मेरी जिंदगी में आप हो। मेरी जिंदगी के सबसे हंसी लम्हे जो आपने मुझे दिए।
अंतिम बिदाई ....
