डॉक्टर साहेब
डॉक्टर साहेब
उनसे मिलने की बेताबी क्या होती है, कोई मुझसे पूछे, हर पल में उनकी यादों की रंगदारी क्या होती है कोई मुझसे पूछे। देखना है तुम्हे पास आकर, महसूस करना तुम्हे छूकर क्या होता है कोई मुझसे पूछे।
आपसे ओ मेरी पहली मुलाकात , मुझे नहीं पता था आखिरी, हो जाएगी, आपको देखने की इच्छा पूरी हो जाएगी, लेकिन उसके बाद आपको सुनने की आपको देखने सारी इच्छा अधूरी रह जायेगी । पर जिद तो मेरी थी ना। आपसे ओ मेरी पहली मुलाकात और आपका वो प्यार से बोलना, डॉक्टर साहेब इधर देखिए यहां हूं मैं ,मैं देख रहा हूं आपको, सोचती हूँ तो ये भूल जाती हूं कि वर्तमान में जीना है , मैं उन्हीं पलो को फिर से जीना चाहती हूं। आपके साथ बैठना मुझे ओ सुकून दे रहा था , निश्चय ही मैने अपनी जिंदगी के सबसे हसीन लम्हे जी लिए हैं।आपका मेरी गोद में सिर रखना और मेरा आपके सर पर हाथ फेरना, कुछ तो हुआ मुझे,पर क्या, मेरा पूरा शरीर सिहर गया , उस समय मेरी आत्मा ने और मेरे रोम रोम ने कभी न खत्म होने वाले अहसास को जिया , आज भी सोचती हूँ तो फिर से उसी एहसास को जी लेती हूं मैं। मेरा आपके कंधे पर सर रखना, आपका प्यार से मुझे गले लगाना और आपका वो चुंबन आज भी मै याद करके खो जाती हूँ, सोचती हूँ काश उसी प्यार भरे आलिंगन में सो जाती मैं। प्यार भरी आपकी वो शरारतें वो मस्तियां मुझे जिंदा रखती हैं, तुमसे बाते कम हो गई हैं फिर भी मुझे ये उम्दा रखती हैं। उन्हीं पलों में मेरे लिए कुछ खास पल ये भी हैं, मेरा वो जान बूझकर सोना और आपका वो मुझे वो डॉक्टर साहेब कहके जगाना वारी जाऊं मैं इस पल पर , आपकी वो आवाज दिल को जो सुकून देती हैं, वो अब नहीं मिलेगा मुझे पता है, पर वो यादें हमेशा मेरे साथ रहेगी तेरी परछाई बनकर। हर बात के लिए मस्ती में आपको गलत ठहराना और आपका वो कहना मैं समझ गया डॉक्टर साहेब मेरी ही गलती है और mera वो जवाब ,जी हां ,आपकी ही गलती पूछिए कैसे.....
कुछ बातें मैंने अनकही छोड़ दी है जो आपके हिस्से की खुशी तीनों मैं न दे सकी.....
