*छोटा प्रयास*
*छोटा प्रयास*
साहसपुर नाम का एक रूढीवादी गाँव जो बहुत पिछड़ा हुआ था । इस गांव में सिर्फ एक विद्यालय था जो कि आठवीं तक का था और इसके बाद दूर दूर तक गांव के पास कोई विद्यालय नहीं था, जिस कारण गांव में मुश्किल से ही कोई आठवीं के बाद पढ़ा लिखा होगा। एक दिन इस गाँव का निवासी जिसका नाम राघव था, इस गाँव को बदलने का सोचता है। पर उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह बारहवीं तक का विद्यालय खोल सके। तो वह सोचते सोचते घर पहुंचा जहां उसने अपने दादा को अखबार पढ़ते देखा। तो उसके दिमाग में एक सुझाव आया । अगले दिन उसने अपने दोस्तों से कई किताबें इकट्ठा की और उसने एक छोटे से पुराने दुकान में वे सब किताबें रख दी। लोग उस पुस्तकालय को देखते और अनदेखा करके चले जाते। तो राघव ने उस पुस्तकालय का प्रचार प्रसार किया , जिस कारण लोग उस पुस्तकालय की ओर आकर्षित हुए । लोग पुस्तक पढ़ते और चले जाते । कुछ लोग उनका मजाक बनाते पर राघव उन सबको अनदेखा करता। कई लोग उन्हें सांत्वना या पैसे भी देते। इस पुस्तकालय के कारण लोगों के अंदर प्रेरणा और जागरुकता जगी। लोग पढ़ने को इच्छुक हुए ,तो लोगों ने गांव में बारवीं तक की विद्यालय की मांग की। ऐसे ही कई सालों में यह गांव पूरी तरह से बदल गया। सभी लोग शिक्षित हो गए। गांव कुछ ही सालों में पिछडे़ गांव से विकसित हो गया तो सिर्फ उस छोटे से पुस्तकालय से जो अब बहुत बड़ा हो गया। लोग राघव को 'गांव का हीरो ' कहने लगे।
राघव की इस बात से साबित होता है कि यदि मन में कुछ करने की इच्छा हो तो एक छोटा सा प्रयास पूरी दुनिया को बदल सकता है।
