बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम
बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम
नेता रघुवीर सिंह का बेटा अभिषेक जबसे बड़ा सरकारी ऑफिसर बना था ,उसके लिए लड़कियों के रिश्तों की कतार ही लग गई थी। मगर अभिषेक की मां मालिनी सिंह एक से एक सुंदर और शिक्षित लड़कियों का रिश्ता ठुकराती रही। उनकी नजर लड़कियों के गुण, सुंदरता और परिवार के प्रतिष्ठा से कोई मतलब नहीं था ।उनकी नजर तो उससे मिलने वाले मोटे दान दहेज पर टिकी हुई थी। उनकी मांग ही इतनी ऊंची थी की सारे रिश्ते हाथ जोड़कर माफी मांग उनके हाथ से निकलते चले गए।
लड़के की उमर बढ़ती जा रही थी। उसकी कम उम्र के कितने लड़कों की शादियां हो चुकी थी। अब लोग अभिषेक के बारे में कानाफूसी करने लगे थे की लड़के में ही कोई खोट होगी तभी तो इतना बड़ा सरकारी ऑफिसर बनने के बाद भी उसकी शादी नहीं हो पा रही है।
अब नेता जी और उनकी पत्नी मालिनी जी पर सामाजिक दबाव बनने लगा।
मजबूरन एक मोटी रकम लेकर मालिनी ने एक उम्र दराज और परित्यकता लड़की से अभिषेक का विवाह तय कर दिया। उस घर में मालिनी के सामने न उसके पति की चलती थी न बेटा या और किसी की ।सभी बेमन से तैयार हो गए।
विवाह के बाद जब विदा होकर घर आई तो नई दुलहीन की मुंह दिखाई लिए कई सालो से इंतजार कर रही औरतों की कतार लग गई।
मगर यह क्या दुलहिन को देखते ही सभी अपना मुंह बिचका कर अनमने ढंग से मुंह दिखाई का नेग देकर काना फूसी करते जा रही थी।
एक औरत ने दूसरी औरत के कान में धीरे से कहा दहेज की लोभी औरत ने अपने बेटे की जिंदगी बरबाद कर दी।
दूसरे ने मुंह बिचका कर कहा और नहीं तो क्या इतने सालो बाद दुलहिन लाई भी तो क्या बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम।
