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Suresh Mistry

Crime Thriller

3  

Suresh Mistry

Crime Thriller

बिरोलिया डायरीज 4

बिरोलिया डायरीज 4

3 mins
206

भाग -4


खौफ 


रमाकांत बिश्नोई एक 35 साल का आदमी बिरोलिया स्टेशन से लगभग 1km दूर बने खंडहर नुमा अपने रेलवे क्वार्टर से अपनी साइकिल के पीछे अपना टिफ़िन लगा कर अपनी बीवी से विदा लेता हुआ अपने काम के लिए रवाना हुआ।

   वह बिरोलिया स्टेशन पर ट्रैक चेकिंग का काम करता था। उसका यह काम काफी कठिन था प्लेटफार्म एक तरफ 3km और दूसरी तरफ 3km तक उसको रोज़ ट्रैक की क्लिप चेक करनी होती थी और हाथ में हथौड़े नुमा एक हथियार साथ में रखना होता था जिससे वह लूज़ हुई क्लिप को वापस टाइट कर देता। रोज़ की तरह वह अपनी हाज़री स्टेशन मास्टर साहब के पास लगवा कर अपना हथियार उठा कर अपने काम पर चल दिया। दोपहर तक वह अपना एक तरफ का काम निपटा कर फारिग हुआ और स्टेशन पर एक घने पेड़ की छाओ में बैठ कर अपना खाना खाया। उसने खाना खाया ही था की स्टेशन मास्टर अजित सिंह की आवाज़ उसकी कानों में पड़ी अरे रमा आज दूसरी तरफ थोड़ा ध्यान से चेक करना कल रात एक ट्रेन का इंजन जाम हो गया था। रमा ने उत्तर दिया जी हुजूर इतना कह कर वह सुस्ताने के लिए वही पेड़ के नीचे लेट गया तभी उसे पेड़ के पीछे कुछ कदमों की आहट सुनाई दी वो उठ खड़ा हुआ क्यूंकि उस सुनसान इलाके में जब दोपहर के समय कोई ट्रेन नहीं आती तब उसके और स्टेशन मास्टर के अलावा वह कोई कुत्ता भी नहीं आता क्यूंकि पूरे स्टेशन परिसर में उस पेड़ के अलावा कही भी छांव का नामोनिशान नहीं होता। उसने मुड़ कर स्टेशन मास्टर ऑफिस की तरफ देखा उसके साहब वहाँ खाना खा रहे थे। फिर ये सोच कर की पत्तों की सरसराहट होगी वह वापस लेट गया।

   अभी वह दूसरी तरफ की क्लिप चेक करने निकला ही था की उसको झाड़ियों के बीच कुछ धूप से चमकता नज़र आया वह खुश हो गया क्यूंकि इस तरह पटरियों की खाक छानते छानते उसे कभी छोटी मोटी चीज़ें मिल जाया करती थी।

उसने झाड़ियों के बीच अपना कदम रखा और गौर से देखा उसे सूखे कीचड़ पर पड़ी एक घड़ी नज़र आयी। उसे देख कर रमा खुश हो गया और लपक कर उसने उस घड़ी को उठाना चाहा लेकिन फिर जो हुआ वो देख कर रमा की चीख निकल गयी।

   जैसे ही उसने घड़ी को उठाया तो उस सूखे कीचड़ के अन्दर से घड़ी के साथ एक हाथ भी बहार आ गया।

कुछ देर स्तब्ध खड़े रहने के बाद रमा ने झाड़ियाँ हटा कर देखा तो उसकी दुबारा एक चीख निकल गयी ये तो पूरी लाश थी।

 वो दौड़ते हांफते अजित सिंह के पास पहुंचा और पूरी बात बताई। अजित भी डर और अचरज के मारे उसकी बात सुनते रहा फिर ख़ौफ़ज़दा वो ऐसे ही कुछ पल ठिठका बैठा रहा फिर उसने तुरंत रिसीवर उठा कर नजदीकी फालना रेलवे पुलिस स्टेशन में फ़ोन लगाया लाइन पर पूरी बात बताने के बाद वो रमा के साथ लाश के पास पहुंचा तब तक वह हरिहर मीणा भी पहुँच गया। वो खाना खाने गया था हरि वहाँ पर सिग्नल देने और पटरियों को चेंज करने का काम किया करता।


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