STORYMIRROR

Aman Mansuri

Abstract

3  

Aman Mansuri

Abstract

बहु या दामाद ?

बहु या दामाद ?

40 mins
289


आज संदीप की नोकरी का पहला दिन था"वो एक टीचर था" स्कूल का पहला पीरियड शुरू हो चुका था"

वो क्लास में ही जा रहां था" तभी संदीप की नजर लड़को की टोली पर पड़ी"

संदीप "ये यहांं ........

उससे से पहले संदीप कुछ सोचता कि वही लड़को की टोली मेसे एक लड़के की नज़र उस पर पड़ी" ऐसा लगता था कि वो लड़का संदीप को पहले से ही जानता हो" फिर वो चुपचाप अपने क्लास में चला गया" संदीप का भी पहला पीरियड उसी लड़के के क्लास में था


संदीप "मैं आपके स्कूल का नया शिक्षकहूँ और में आप लोगो को इंग्लिश पढ़ाऊंगा"

लेकिन संदीप उसी लड़के के आखो में आँखे डालकर बताता है"लेकिन वो लड़के के हांव भाव बिल्कुल अलग था" जैसे उसे दिमाग में बोहोत हल बली मच रही थी"एक घंटे बादसंदीप एक लड़के को बुलाता है।

संदीप "आकाश वो जो बारविह क्लास में वो जो लड़का है " उसे बताना की में उसे गार्डन में बुलाया है"

आकाश :ठीक है"

इतना कहने के बाद वो लड़का उस लड़के को सब बताया"

वो लड़का संदीप को मिलने के लिए गार्डन में जाता है"

असद "यहांं भी चले आये ?

संदीप "मुझे बिल्कुल पता नही था" असद की तुम यह पढ़ते हो ?

असद "क्या चाहते हो ? छोड़ क्यों नही देते मेरे हवाले पे"

संदीप "कैसे छोड़ दूं" तू प्यार है मेरा"

असद "था "......संदीप अगर होता तो तुम उस दिन एयरपोर्ट पर जरूर आते"

असद की आखों में संदीप के लिए इतनी नफरत दिख रही थी" वो संदीप को थप्पड़ मारदे "

असद जाता है तब संदीप असद का हांथ पकड़कर उसे खिंचता है"

संदीप "अगर ऐसी बात है तो चलो हम चले जाते है"बोलो तुम असद आज ये चुप्पी नही चलेगी"

असद "ठीक है".......

संदीप "तो चलो भाग निकलते है"

असद का दिल ज़ोर ज़ोर से धबकने लगता है" संदीप असद का हांथ पकड़ता है"

संदीप"क्या सोच रहे हो असद अपनी दिल की सुनो ,तुम्हांरा संदीप तुम्हांरे साथ है"

असद "लेकिन तुम्हांरी पत्नी काजल का क्या ? तुम मेरे लिए उसे छोड़ दोगे"

संदीप "हां"

असद का हांथ पकड़कर कहता है"

संदीप "इस बार वोही होगा ज़ो तुम चाहोगे"

असद "लेकिन तुम्हांरी माँ और कुसुम का क्या?

संदीप "उनलोगों में देख लूंगा"

असद और संदीप स्कूल के पीछे से गेट से निकल जाते है"

असद "संदीप लेकिन हम जायेगे कहां ?

संदीप "मेरठ "

असद "क्या ? वहांं वो तुम्हांरी माँ ,बेहेन और बीवी के बीच मे कैसे रहूंगा ?

मेरठ

संतोष "ऐ कुसुम उठ पूरे दिन सोती रहती है"

कुसुम "क्या मैया अच्छा सपना चल रहां था"

संतोष "ऐसा कोनसा सपना देख लिया था "

कुसुम "यही की भैया नई भाभी लाये थे"

तभी कुसुम की नज़र टेबल पर पडे न्यूज़पेपर पर जाती है"

कुसुम "मैया ये देखो मेरठ में नया कायदा आया है अगर पति को दूसरी शादी करनी होतो वो अपनी पहली पत्नी को तलाक दे सकता है"

संतोष "चलो भोले ने देर से मगर मेरी पार्थना सुनी"

काजल "आप लोग तो यही चाहते हो न कि नई भाभी आये और मुझे निकाले लेकिन में इतनी जल्दी यहां से नही निकलने वाली"

काजल(संदीप की पत्नी ) ये संदीप से बोहोत प्यार करती है " और मुखिया की बेटी भी इसीलिए संदीप ने इसके साथ बंदूक की नोक पर फेरे लिए थे"

संतोष "ऐ मुह पर नेलोटप मार तेरे "

कल्लू (कुसुम का पति) अब इनके बारे में क्या कहे बिचारे बेरोजगार है"इसीलिए तो घर जमाय है"

कल्लू "सासुमा वो नेलोटप नही सेलोटेप होता है"

संतोष "ओ मेरी इंग्लिश डिक्सनरी आज कुछ कमाकर लाये की आज भी"ठुल्लू

संतोष "पता नही मेरे लालू को और कितना नाचवायेगी अपनी बंदूक की नोक पर"

काजल "जितना आपका बेटा नाच सकेगा उतना ओके सासुमा

संतोष "अब तो में मेरे लालू की शादी किसी दूसरी के साथ कर के ही रहूंगी"

कुसुम "है मैया वो गोरे लाल की बेटी सुमन कल ही रिश्ता लेकर जाते है"अगर तेरी हां हो तो और मैया मेने सुना है कि उसके बाप के पास रायफल है फिर ये

काला पानी (काजल)भी उसका बाल बाका नही कर पाएगी"

संतोष और कुसुम दोनो संदीप का रिश्ता लेकर गोरे लाल के घर जाते है"

संतोष "ऐ कुसुम ये घर के सब कहां है ?

कुसुम "गोरे लाल सेठ जी"

फिर भी कोई आवाज़ नही आती"तभी वहांं एक नोकर आता है"

संतोष "ऐ इधर आ........

नोकर संतोष के पास जाता है"संतोष को इसारे से कान अपनी और लाने को कहता है"

नोकर "ये तूफान के आने से पहले वाली शांति है"

संतोष कुछ बोले उससे पहले छत पर से बंदूक की गोली की आवाज आती है"

एयरपोर्ट,मेरठ

असद "सैंडी मुझे बोहोत गभराहत हो रही है"

संदीप "क्यू ? और वेसे भी तू अपनी दिल की सुन लोग क्या कहेंगे उसकी नही"अगर हम अपनी लाइफ में लोगो लिए अपनी जिंदगी खराब क्यों करे"जब हम को दूंख होता है ना तब हमे कोई नही पूछता"

असद "वेसे इतना ज्ञान लाते कहां से हो ?

संदीप "वेसे इम्प्रेस हो गए तुम"

असद "ओह रियली में तुम्हांरी बातो से इम्प्रेस होगा"

संदीप "सच्ची ?

असद "हां"

गोरा सेठ की हवेली

छत पर से किसी लड़की की रोने की आवाज़ आती है"

सुमन "बाबा हमे राहुल बोहोत पसंद है"बाबा आप जो बोलेगे वही करुँगी" अगर आज राहुल चला गया तो वो फिर मेरठ कभी नही आएगा"

गोरे लाल "ये हमारे उसूलो के खिलाफ है"तुम एक प्रेत आत्मा हो तुम किसी भी विवाहित पुरुष से ही शादी कर सकती हो "इसिलए मेरी और तुम्हांरी भलाई इसी में है के तुम राहुल को भुला दो"

इतना कहने के बाद गोरे लाल नीचे जाता है"

सुमन "अम्मा तू तो बाबा को क्यों नही समजाती?

गोरे लाल की पत्नी "तुम्हांरे बाबा बिल्कुल सही कह रहे है"

संतोष के घर

काजल "ऐ बेरोजगार जीजे कहां गयी है ये मा बेटी की टोली

कल्लू "भाभी हम बेरोजगार नही है बस रोजगारी आती है"फिर चली जाती है"तुम्हांरी शोतन को देखने

काजल "ओह तभी में सोचु की आज कुंभकर्ण कैसे जग गया था"और वो ओवरएक्टिंग की दूंकान सासुमा इतनी सुबह पार्थना क्यों कर रही थी"

कल्लू "वेसे आज तुम्हांरी शोतन आ गयी तो.....

काजल (हस कर) "जीजे तुम भी तो थे "जब मेने संदीप के साथ फेरे बंदूक की नोक पर लिए थे"

कल्लू "वाह भाभी वेसे एक राज़ की बात बताऊ आज सासु मा ने लाजवाब रसगुल्ले बनाये है"अगर आपकी हां हो तो फिफ्टी फिफ्टी करे"

काजल "अरे कल्लू ...सोरी मतलब जीजे ये भी कोई पूछने वाली बात है निकालो....वेसे जीजे तुम बेरोजगार हो लेकिन कहि से न कही से अपनी रोजगारी धुंध लेते हो"

कल्लू "मतलब"

काजल "(रसगुल्ले की तरफ नज़र करते)ये देखलो.....

गोरे सेठ की हवेली

संतोष "नमस्ते"

गोरे लाल "नमस्ते"वेसे में टाइम बर्बाद नही करूँगा"में पूछ सकताहूँ की आप लोग यह कयू आये है"

संतोष "मेरे बेटे संदीप के लिए आपकी लड़की हांथ मागने आये है"

गोरे लाल (मन मे)"ये बोहोत अच्छा उपाय है "

कुसुम (धीरे से)"मैया क्या लगता है ?

गोरे लाल "हमे मंज़ूर है" और हमे काजल से भी कोई आपत्ति नही है "आखिर हमारी भी चार चार पत्नी है "

लेकिन शादी आज के आज होनी चाहिए"

संतोष के मन मे जैसे लड्डू फुट रहे हो"

संतोष "ठीक है

संतोष घर जाती है"

संतोष "सबसे पहले में सैंडी को फ़ोन करके बता देती हूं"

संदीप की फोन की घंटी बजती है"

कुसुम "अरे मैया भैया तेरे पीछे ही खड़े है"

संतोष "हांय मेरा लालू कितना सुख गया है और नई नोकरी केसी है"

संदीप "सब ठीक है"

काजल "अरे आप आ गए"देखो आज मुझे लगा ही था कि आज कुछ खास होने वाला है इसीलिए मैंने रसगुल्ले बनाये है"

संतोष और कुसुम उस रसगुल्लों को देखकर चोक जाती है"

संतोष "है भोलेनाथ ये रसगुल्ले तो मैने बनाये थे"

काजल "अरे ऐसे कैसे ये मेने बनाये है अपने संदीप के लिए"

संदीप "आप लोग चुप हो जाओगे"

कुसुम "वेसे भैया ये लड़का कोन है?

संदीप "अरे हां में बताना ही भूल गया ये असद है"

कुसुम "आपका स्टूडेंट.....

कल्लू "अरे क्या कुसुम तुम भी स्टूडेंट ही होगा ना"

संदीप "ये मेरा स्टूडेंट नही है"

काजल "तो फ्रेंड होगा"

संदीप "नही" हम दोनों ने अभी एक घटे पहले शादी की है"

संतोष "क्या ?

इतना सुनने के बाद संतोष बेहोश हो जाती है"

कुसुम ,संदीप "मैया.....


कुछ घंटे बाद संतोष को होश आ जाता है"

कुसुम "मैया पानी पीयेगी?

संतोष "नही"पहले तू संदीप को बुला"

कुसुम :जी मैया संदीप... संदीप तुजे मैया बुला रही है"

असद "तुम्हे जाना चाहिए"अभी इस वक्त उन्हें तुम्हांरी जरूरत है"

संदीप संतोष के रूम में जाता है तब असद के पास काजल आती है"

काजल "वेसे मैं इस प्यार को क्या नाम दूं..वेसे तुम मेरे रिश्ते में क्या लगोगे मेरी सौतन ?

कल्लू"पति बनालो भाभी क्योंकि शोतन तो आने ही वाली है ना"

काजल "चुप बेरोजगार जीजे"

संतोष "बेटा तुजे पता है ना वो काजल हमारे साथ क्या करती है ?तूम दूसरी शादी करलो सुमन के साथ

और वो भी आज के दिन ताकि उस काजल को मेरे घर से निकाल सकू"

संदीप "लेकिन मेरी दूसरी शादी तो असद से हो गयी है माँ"

संतोष "तो तू ही बता में उसे अपनी बहू या दामाद बनाऊ" समाज इसको कभी स्वीकार नही करेगा"

करोगे न तुम ?

संदीप "फिर असद का क्या होगा"

संतोष "वो यह रह सकता है लेकिन हमारे किरायेदार की तरह सिर्फ बाहर वालो की नजरों में बाकी तो मेरी बहु या दामाद तो है ही ना"

संदीप "ठीक है"

संदीप कमरे से निकल कर चुप चाप ऊपर अपने रूम में चल जाता है"असद भी उसके पीछे जाता है"

असद "क्याहूँआ सैंडी तुम यहां क्यों चले आये ?

संदीप "मेने तुम्हांरे साथ गलत किया"

असद "मतलब ?

संदीप "मैया ने काजल का पीछा छुड़ाने के लिए मेरी वो दूसरी शादी करना चाहती है"और वो भी आज के दिन"

असद "तो मुझे पता है कि तुम ने मम्मी को ना ही बोला होगा? बोलो "

संदीप "में ये शादी करने वालाहूँ"

असद "और मेरा क्या ? मुझे एक बार भी नही पूछा कि असद तू क्या चाहता है"

संदीप "मेरे पास कोई रास्ता नही था"

असद "तुम हर बार ऐसे ही करते हो"गलती मेरी ही थी कि मैने तुम पर भरोसा किया"

वही वो दोनों बाते करते है तब कुसुम आती है"

कुसुम "भैया ये आपकी शेरवानी है आप 1 घंटे में तैयार होकर नीचे आ जाईये"असद तुम तैयार कर देना ठीक है"

असद "जी.....

काजल "ऐ बेरोजगार जीजे ...

कल्लू "कितनी बार कहां है "बेरोजगार मत बोलिए"

काजल "ठीक है" अच्छा माफी बस ओके अब कुछ रोजगारी लेकर आईये"

कल्लू "मतलब ?

काजल "रोजगारी मतलब खाना"

कल्लू "ओह अच्छा एक काम करताहूँ पीछे गरम गरम कचौड़िया बन रही वो आपके लिए लेकर आता हूं"

संदीप के रुम में

असद संदीप को तैयार करतेहूँए कहता है"

असद "मेने कभी सोचा नही था संदीप की में यह आकर में तुम्हांरी शादी किसी और के साथ"पहले काजल थी फिर भी मेने मन बनालिया की चलो चलेगा लेकिन अब तो हद हो गयी तुम यह आकर तो मेरी कोई बात सुनते ही नही हो"

संदीप "क्या सुनु में"मुझे नही पता कि में क्या करने जा रहांहूँ लेकिन अभी मुझे मेरी मैया की इज़ज़्त और उसके स्वास्थ्य की चिंता है"

इतना सुनने के बाद असद नीचे चला जाता है"नीचे सब मेहमान आये होते है"सुमन भी सज धज कर अपनी मर्जी न होने के बावजूद वो संदीप से शादी कर रही थी"

थोड़ी देर के बाद संदीप नीचे आता है"उसकी नज़र सिर्फ असद पर ही रहती है"लेकिन असद की आंखोमें संदीप के लिए नफरत ही दिख रही थी"

संदीप जैसे ही सुमन के गले मे हांर डालता है तब उसकी नज़र असद को ही धुंध रही थी" लेकिन असद कहि नही दिख रहां होता है"

संदीप कल्लू को बुलाता है"

संदीप "जीजे तुमने असद को कहि देखा"

कल्लू "हां जब में ऊपर था तो वो आप के कमरे में देखा था"

संदीप अपना और सुमन का गठबंधन खोलकर ऊपर अपने रूम की तरफ भागता है"

गोरे लाल "अरे संतोष जी ये जमाय क्यों चले गए"

कुसुम "में जाकर देखती हूं"

संदीप अपने रूम में जाता है तब उसे कहि असद नही दिखाय देता है"लेकिन तब टेबल पर एक चिट्ठी होती है जो असद ने लिखी होती है

" शायद में ही गलत था"जो तुम्हांरी बातो में फिर से आ गया"तुम सिर्फ दर्द देते हो संदीप लेकिन कोई बात नही पहले भी हम नही मिल पाए थे और आज भी न जाने में तुम्हांरे लिए क्यों सब कुछ छोड़ कर आ गया

इसीलिए में जा रहांहूँ"

संदीप ये चिठ्ठी को फेक कर फटाफट अपने रूम से नीचे जाता है"

संतोष "संदीप कहां जा रहां है? तू जे कहि जाना है तो शादी करके जा"

संदीप "मैया में आ जाऊँगा"

काजल "चलो एक तो चला गया अब ये दूसरी की बारी "

रेलवे स्टेशन

असद को संदीप के साथ बिताऐहूँऐ हर एक पल याद आते है"

असद "नही असद तू उस आदमी के लिए क्यों रो रहां है"

वही संदीप भी असद को ढूढने के लिए रेलवे स्टेशन आता है"

लेकिन तब असद की ट्रेन आ जाती है"और असद ट्रेन में बैठ जाता है"और ट्रेन धीरे धीरे प्लेटफॉर्म छोड़ रही थी"तभी संदीप की नजर असद पर पड़ी और वो भागताहूँआ ट्रैन के पीछे जाता है"

संदीप "असद उतर जाव प्लीज पहले भी मुझसे यही गलती होगयी थी"

लेकिन असद कुछ नही बोलता"और संदीप नीचे गिर जाता है"ट्रैन प्लेटफॉर्म छोड़ देती है"

संदीप जब खड़ा होता है तो उसके सामने असद होता है"संदीप असद को देखकर खुश हो जाता है और उसे अपने गले लगा लेता है"

असद - में ये समजोता करने के लिए तैयारहूँ"

संदीप "मुझे पता था कि तुम मेरी मजबूरी समजोगे असद हांलांकि ये जो हो रहां है ये ठीक नही हो रहां है"लेकिन तुम चिंता मत करो में ये शादी अब नही करूँगा"

असद "नही तुम ये शादी करोगे अपनी माँ के खातिर और वेसे भी शादी के बाद काजल तो चली ही जाएगी"

संदीप असद को अपनी बाइक पर बैठ कर दोनों घर जाते है"संदीप अपनी रुकीहूँई शादी कर लेता है"

रात को

संदीप "यार जीजे में तो फूल कन्फ्यूजहूँ"

कल्लू "किस बात को लेकर ?

संदीप "की किसके कमरे में जाऊ"

फिर संदीप असद के कमरे में जाता है"

रात के बारह बज रहे थे"तभी गाने की आवाज आ रही थी"

है चाह है अधूरी पूरी होगी ना ...............

असद "संदीप उठो"

संदीप "क्याहूँआ नीद नही आ रही"

असद "कुछ सुनाई नही दे रहां"

संदीप "हां"

असद :चलो बहांर जा कर देखते है कि कोन है"

कुसुम के रूम

कल्लू "ऐ कुम्भकर्ण की बेटी "

लेकिन कुसुम हस रही होती है"

कुसुम "ये नींद में भी हस्ती है"सासुमा ने मुझे शादी से पेहले तो नही बताया था" आने दो सासु माँ को देख लूगा मेरे साथ इतना बड़ा मज़ाक"

कल्लू "कुसुम......

कुसुम "क्या है? क्यों जगाया (घड़ी की और इशारा करतेहूँए)अभी तो बारह बजे है"

कल्लू "कोई गाना गा रहां है"

कुसुम "तो गाने दो ना"

इतना कहने के बाद कुसुम सो जाती है"

कल्लू "ऐ पूरे दिन क्या कम सोती हो जो अभी भी नींद आती है"

कुसुम "ठीक है चलो देखते है"

कुसुम और कल्लू अपने रूम में से बाहर निकलते है"

कुसुम "चलो मैया को जगाते है

काजल के रूम में

काजल अपने मोबाईल में गेम खेल रही होती है"तब गाने की आवाज़ उसे आती है"

काजल "ये इतनी रात को कोंन गा रहां है"

काजल अपने रूम में से बाहर जाती है"

संतोष "क्याहूँआ तुम दोनों यह क्यों आये हो ? और ये कोन गाना गा रहां है"

कुसुम "हां" मैया हम वो ही तो देखने आए है तू भी चल

असद "अरे संदीप ये गाने की आवाज़ तो सुमन के रूम में से आती है"

तभी वहांं अचानक कल्लू आ जाता है.....

कल्लू "सच्ची?

असद "आ.........

संदीप "क्या करते हो जीजे डरा दिया"

काजल "वाह सासुमा बहु में भूतिया गाने काहूँनर भी है ये मुजे नही पता था"

कुसुम "भाभी अगरहूँनर होता भी तो रात में थोड़ी न कोईहूँनर दिखाता है"

संतोष "तुजे तो में कल सुबह बताउंगी" काला पानी (काजल) तू देखती जा"

कुसुम "कहि मैया नई भाभी पर भूत का साया तो नही"

संदीप "अरे ऐसा कुछ नही होता"

असद "हां कुसुम तुम क्यो सबको डरा रही हो"

संदीप सुमन के कमरे का दरवाजा खटखटा टा है"लेकिन सुमन दरवाजा नही खोलती है"

सुमन "मार डाला हां मार डाला ..........

काजल "ये किसको अंडर मार रही है?

संतोष "पता होता तो तेरा कॉन्ट्रेक्ट साइन न करवाती

कल्लू "कल कर लेना "

कुसुम "तुम लोग ये आपकी बकवास बध करेगे भैया आप ये दरवाजा तोड़ डालो"

फिर संदीप सुमन के कमरे का दरवाजा तोड़ देता है"

कमरे में सुमन को देख जैसे सब सोक हो जाते है"

कुसुम "मैया ये तो अजीब है ....."

काजल "हां कुसुम"

संदीप सुमन के कमरे का दरवाजा तोड़ देता है"

कमरे में सुमन को देख जैसे सब सोक हो जाते है"

कुसुम "मैया ये तो अजीब है ....."

काजल "हां कुसुम"

तब सुमन आराम से सो रही होती है"सब लोग एक दूसरे के सामने देखते है"

संतोष "(काजल की ओर देखतेहूँए)मेरी बहु में ऐसा कोईहूँनर नही है मिल गयी शांति"

काजल :चलो हो गयी इनकी नौटंकी चले सोने ?

कुसुम :तो हमे काही बोल रही हो भाभी आप अकेली तो सोती है"

काजल "नही मे तो अपने प्यार को बोल रही थी"

सुबह

संतोष "बहु मेरे लिये चाय लाना तो"

कल्लू "अरे सासु मा आप किस बहु को बोल रही है वो तो बता दीजिये"उन लोगो को

संतोष "हां वो भी है"लेकिन किस को बोलू"

असद :ये लो मम्मी में आपके लिए बाहर से चाय लेकर आयाहूँ"वो क्या है ना मुजे चाय बनानी आती नही है इसलिए"

काजल "अब में तो ग्रीन टी पीतीहूँ"इसलिए आपको दिखाने लायीहूँ"

सुमन "ये लीजिये माजी में आपकी अदरक वाली चाय लेकर आई हूं"

संतोष "देखा तुम दोनों ने इसे चाय कहते है"

कहते कहते संतोष काजल की ग्रीन टी का कप ले लेती है"

सुमन "अरे सासुमा ये मेरी जुटी है"

संतोष :ये पकड़ो तुम्हांरी ग्रीन टी लाव सुमन बहु मेरी चाय"

लीला -

अब इनके बारे में क्या बताये लेकिन ये है लीला जो है संतोष की पड़ोसी पूरे दिन संतोष के घर पर कुछ मागने आजाती है"

लीला "अरे संतोष तू मुजे थोड़ी सी शक्कर देना"

संतोष "लेकिन हमारे घर पर तो खत्म हो गया"

तभी वहां काजल डिब्बा लेकर आती है"

काजल "सासुमा ये 5 किलो शक्कर इस डब्बे में से निकाल कर किस डिब्बे में रखु?

संतोष "है भोले ...मेरे सर में डाल"

लीला "नही पहले मेरी वाटकी में दाल दे ये तेरी बहु का मुजे गुण अच्छा लगा संतोष अगर शक्कर नही मिलती तो मेरे मेहमान क्या बोलते ऐसे पड़ोसी जो कुछ काम न आये"

कुसुम "अरे ऐसा कोनसे मेहमान है आपके जो रोज सुबह आते है और सिर्फ चाय पीते है"

लीला "अरे हां संतोष आज तो तेरी बहु की मुह दिखाई होगी ना तो मिलते है लेकिन ये नई बहू कहां है कहि दिखाय नही देती"

संतोष "मुझे लगता है तेरे मेहमान चले गए होंगे"

लीला "कोनसे मेहमान ?

संतोष "लीला.....

और लीला जल्दी जल्दी चली जाती है"

संतोष :अब ये नया बबाल खड़ा कर के चली गयी"

कुसुम "लेकिन मैया लीला आंटी ने भी सही बोला"

संतोष "चलो अब तैयार करने"

थोड़ी देर बाद .....

कल्लू "सल्लू साब तैयार हो गए"

संदीप "हां अब हमारी नोकरी अब यह जो लग गयी है"

कल्लू "वेसे ये काजल भाभी कुछ ज्यादा ही सब को बोल रही है"

संदीप "सच्ची में"

कल्लू "हां अरे सासुमा को तो ज्यादा.......

संदीप:अभी देख ये काजल को में केस मजा चखाताहूँ"

संदीप किचन में जाता है जहांँ सुमन नास्ता बना रही

होती है और काजल अपना मिल्कशेक"संदीप सुमन को कहता है"

संदीप "अरे आज तुम नास्ता बना रही हो (काजल की और देखकर)किसी और को बोल देती"

सुमन "नही हम कर लेंगे"

संदीप "अरे ये आटे को ऐसे नही गुडते लाव में दिखाता हूं"

काजल :(मन मे ) कभी हमे तो ये सब कहां ही नही"

संदीप सुमन का हांथ पकड़ कर सिखाने लगता है" तभी असद किचन में आ जाता है और ये सब देख लेता है"

असद "सेंडी

इतना कहने के बाद असद चला जाता है

और काजल अपना मिल्कशेक गिरा देती है"

संदीप "असद रुको ऐसा कुछ नही था"

काजल "ये साफ कर लेना सुमन"

इतना कहने के बाद काजल भी चली जाती है"

संदीप "कोई बात नही कर लेना वो तो तुम्हांरी बेहेन जैसी है ना....

इतना कहकर संदीप भी असद के पीछे जाता है"

असद "देखा मेने किचन में कैसे रोटियां बन रही थी"

संदीप "अरे असद ऐसा कुछ नही था"

असद "अगर तुम ने ये फिर से किया तो में चला जाऊंगा"

संदीप कुछ नही कहता है और मुड कर चला जाता है"वही पर असद पानी की वजह से गिर पड़ता है"तब संदीप उसे खड़ा करता है"

संदीप "अब से में ऐसा कुछ नही करूँगा जिस की वजह से तुम्हे कोई शिकायत हो"लेकिन कहि जाने की बात मत करना(इतना कहने के बाद संदीप रो पड़ता है)में फिर से अकेला हो जाऊंगा"

असद "तुम रो रहे हो"(फिर असद संदीप का हांथ पकड़ लेता है)अगर में कही जाऊंगा तो तुम्हे भी साथ ले जाऊंगा"

संतोष :अरे वो सुमन तैयारहूँई के नई वो देख के आ जा कुसुम"

कुसुम "जी मैया"

थोड़ी देर बाद सब लोग मुहदीखाय के लिए आते है"

लीला "संतोष बहु तो बढ़िया लायी है"

तभी अचानक सुमन के हांथ पीले होने लगते है"लेकिन वो अपनी साड़ी के पल्लू से ठाक लेती है"

लीला :अरे संतोष ये लड़का कोन है"सुबह से देख रहीहूँ लेकिन वो सुबह पूछ न पायी"

केतकी "ये तो वही है ना जिसको संदीप कल अपनी शादी को छोड़ कर उसको ढूढ ने गया था"

मयूरा"संतोष बोल भी दे कोन है ये लड़का"

सब लोग असद की तरफ देखते है"असद की आखों में आंसू आ जाते है"ये देखकर संदीप को गुस्सा आ जाता है"

काजल "बस कुछ ऐसा समज लीजिये की वो भी हमारी तरह ही है"

तभी संदीप कुसुम के पास से खड़े होकर असद के पास जाता है"और असद का हांथ पकड़ कर उसे सबके सामने लाता है"

संदीप "आप सब यही जानना चाहते है ना कि ये को है" तो सुनो ये हमारी पत्नी या पति हमने इससे शादी की है"

लीला "ये तो अप्सुकंन है" संतोष

संदीप "ये सब अप्सुकंन नही होता है"बस ये आप लोगो की सोच है"और आगे ऐसी शादीया आपको देखने को मिलेगी"

ये सुनने के बाद सब लोग चुप हो जाते है"और चले जाते है


संतोष "तुजे क्या जरूरत थी"इसकी असलियत बताने की.....

संदीप "मैया में ने जो किया बिल्कुल सही किया है"

संदीप अपने रूम में चला जाता है"संदीप के पीछे पीछे असद भी जाता है"

संदीप के रूम में"

असद :वेसे थैंक यू"आज जोहूँआ उसके लिए"

संदीप "तो क्याहूँआ तुम मेरी जिम्मेदारी हो और जब जब तुम पर उंगलिया उठेगी"तब तब में तुम्हांरे साथ रहूंगा"

वही पर संतोष आती है"

संतोष "और हम पर उंगलिया उठी उसका क्या ?

संदीप "में ने सच ही कहां है मैया तेरे कहने पर मैने सुमन के साथ शादी की उसे अपनी पत्नी बनाया....

संतोष "लेकिन पत्नी का दर्जा नही दीया अभी बोलो उसके साथ ना रहते हो बाते करते वो पूरे दिन सहमीहूँई अपने कमरे में रहती है"

असद"वेसे मुजे बोलना नही चाहिए"लेकिन उसे दर्जा नही दिया तो आपने संदीप को कैसे सुना रही हो"और मुजे दर्जा दिया तो आप ने इस क्यों किया के आज इस पर उंगली उठी तो तू बीच मे क्यों बोला"हमने भी संदीप से सच्चा प्यार और शादी की है"आपको सुमन का दर्द दिखाई देता है तो मेरा क्यों नही ?

संदीप "मैया तेरी भी तो शर्त थी के में सुमन के साथ शादी कर लूंगा तो तू असद को बहु या दामाद के रूप में स्वीकार कर लेगी"

संतोष "हां कहां था"लेकिन तुमने तो शर्त के अनुसार सुमन के साथ शादी की है उस शादी को निभाया नही"

बोल निभाएगा तो मेभी इस लड़के को अपना लुंगी"

संदीप "ठीक है"

संतोष "तो आज तुम इसके साथ नही सुमन के कमरे में रहोगे"

इतना कहने के बाद संतोष चली जाती है"

काजल :ऐ जीजे इधर आना"

कल्लू "क्याहूँआ भाभी"

काजल "ऊपर रूम में क्या बाटेहूँई थी पता है"

कल्लू "अरे हां लेकिन आप चिंता मत करो भाभी मुजे पता लगा है कि असद को सास ने स्वीकार कर लिया है"

काजल "क्या ?

(काजल के फोन की घंटी बजती है")

काजल "हेलो डेड क्याहूँआ ?

संकेत "में कल मेरठ आ रहांहूँ"वो भी पूरे 2 दिन रहने के लिए"

काजल "सच्ची में आप आ रहे हो कि मज़ाक कर रहे हो"

संकेत "अरे ऐसे कैसे हम मज़ाक कर रहे है"हम पक्का आ रहे है"अच्छा चलो में फोन रखता हूं"

काजल "ठीक है" अब देखना इन लोगो को में केस मज़ा चखातीहूँ"

संतोष के रूम में

कल्लू "अरे सासुमा इधर आईये.....

संतोष "क्या है क्यों मेरा सर् खाए जा रहां है बोल क्याहूँआ"

कल्लू "अभी अभी पता चला है कि सकेत प्रमुख आ रहे है"

संतोष "तो उसमें काही टेंसन ले रहे हो.......सकेत प्रमुख उस काजल के पिता"

कल्लू :हां"

कुसुम "क्या मैया मतलब फिर से काजल का गुलाम बनना पड़ेगा"

संतोष "और कर भी क्या सकते है"ये 6 महीने के बाद तलाक का कायदा न होता तो आज में.....

कुसुम "लेकिन मैया कर भी क्या सकते हे"

तभी काजल सब को आवाज़ देती है"

काजल "है मेरे घरवालो सुनलो कल मेरे डेड आने वाले है"

संदीप '"क्या ?(मन मे) मतलब फिर से उसके हांथ पैर दबाने होंगे"

संदीप "नही नही"

असद "क्या नही नही ?

रात के बारह बजे"

संदीप और सुमन अपने रूम में सोते है वही पर सुमन अपनी आँखें अचानक खोलती है"वो उठकर कमरे के बाहर निकलकर घर के बाहर जाती है"वही छत पर से असद सुमन को देख लेता है"

असद "ये इतनी रात को कहां जा रही है"

सुबह

असद "सासुमा कल मेने रात को सुमन को कहि जातेहूँए देखा था"

संतोष "क्या कुछ भी"वो दिन में नही निकलती तो रात को कहां जाती होती"

कुसुम "हां असद मैया बिलकुल सही बोल रही है"

तभी काजल के पिता संकेत आता है "

संकेत "अरे काजल कहां हो मेरी बिटिया"

काजल "डेडी कब से में आपका इंतजार कर रही थी"

संतोष :नमस्कार"

संदीप "पाय लागू ससुरजी"

संकेत "जीते रहो"

संकेत "बोलो बेटी कोई तकलीफ तो नही है ना इधर "

काजल "नही तो"

संकेत आराम करने के लिए गेस्टरूम में जाता है"

काजल "अगर आप लोग चाहते है कि आप लोगो की ये शादी वाली पोल न खुले तो में जो बोलूंगी वही करना होगा"

असद "अरे संदीप ये तो खुली दादागिरि कर रही है बोलो की हम नही मानेगे"

संदीप "नही बोल सकता"

असद:क्यों ?

काजल "सुन लिया"

असद "लेकिन में तुम्हांरा कोईहूँक्म नही मानने वाला"

काजल "डेडी .......

संतोष :नही नही बहु क्याबकर रही है इसकी बातो को दिल से मत लो"

काजल "ठीक है अब आप हमारे लिए चाय बनाकर भेजिए"

संतोष "में अभी सुमन को बोलतीहूँ"

काजल "सुमन नही आप सासुमा"

काजल चली जाती है"

असद"आप लोग क्यों उसे बरदास्त करते हो"

कुसुम "वो तो असद तुम्हे पता चल जाएगा"

संतोष "सुमन बहु में ये कहने के लिए आई हूं कि चार पांच दिन के लिये तुम अपने माईके चली जा"

सुमन "लेकिन क्याहूँआ"

संतोष "तुझे अपनी सास पर भरोसा है ना तो चली जा सिर्फ 4 - 5 दिन की तो बात है"

सुमन "ठीक है"में अपना समान पैक कर लेती हूं"

वही पर कुसुम आती है"

कुसुम "मैया इस सुमन का क्या करे"

संतोष "उसका बंदोबस्त तो हो गया"

कुसुम "बड़ी होशियार है मैया तू रो बंदोबस्त भी कर लिया"लेकिन किया क्या कमाल"

संतोष "माईके भेज दिया"चल वारना कोई सुन लेगा चल अब किचन से बाहर निकल"

रात के खाने के बाद

काजल "हमारे डेडी टहलने के लिए गए है तो हमने सोचा कि आप लोगो के साथ कल की मीटिंग करले"

असद "कोनसी मीटिंग और क्यों काजल ?

काजल "हां असद तुम नए हो इस घर मे इसलिए में बता देती हूं कि कल से मेराहूँकुम चलेगा"और किसीने नही माना तो में मेरे डेडी को बोलूंगी तो वो तुमहै इस घर से ही नही बल्कि पूरे मेरठ से निकल देगे"

असद "ओह ! अच्छा मतलब ये लोग तुम्हांरे पापा की पावर की वजह से डर रहे है"लेकिन सॉरी काजल में तुम्हांरा कोईहूँकुम नही मानुगा और ये सब भी नही मानेगे"

संतोष "नही बहु ये कुछ भी बोल रहां है"

काजल "तो ठीक है"संदीप तुम मेरे हांथ और पैर दबाओ गे"

संदीप "तुम कहती होतो फिर गला भी तैयार रखना"

काजल "हांय...... तुम तो ऐसी बातो से हम में मार डालते हो"

ये सब सुनकर असद को गुस्सा आ जाता है"

काजल "कुसुम तुम कल सुबह जल्दी उठ कर मेरे लिए ग्रीन टी बनाकर लेकर आना"

कुसुम "भाभी ये क्या दे दिया थोड़ा सा डिस्काउंट तो दो"

काजल "और तुम जीजे तुमतो हमारे फ़ेवरिट हो"इसिलए तुम्हे डिस्काउंट दूंगी"

कल्लू "इसे कहते मेरी भाभी"

काजल "जीजे सुन तो लो में ये बोल रहीहूँ की कल तुम 100 रुपये कमाकर लेकर आना होगा"

कल्लू "ये भी कोई काम है"

संतोष "नही ये काम ठीक है बहु"

काजल "आप सासुमा जी कल मेरे लिए आप मिल्कशेक बनाकर देगी मुझे"

संतोष "ठीक है"

सुबह

काजल "ये मेरी ग्रीन टी का टाइम हो गया लेकिन कुसुम नही आई मुजे ही जाकर देखना पड़ेगा"

काजल किचन में जाति है"वो देखती है तब ग्रीन टी जलीहूँई होती है और कुसुम किचन में सो रही होती है"

काजल "कुसुम ........कुसुम....

कुसुम(नीद में)"क्याहूँआ मैया क्यों चिल्ला रही हो"

काजल (पानी फेकतेहूँए) "मैया की बच्ची मेंहूँ काजल खड़ी हो "और ये क्या किया मेरी ग्रीन टी जल दी चलो और मेरे लिए नई ग्रीन बनाकर लाव"

काजल "चलो संदीप नास्ता बाद में कर लेना पहले मुजे नेरपोलिश लगा दो"

असद "अरे काजल वो नास्ता कर रहां है तो नास्ता तो करने दो"

संदीप "ठीक है"

असद "नही संदीप तुम पहले नास्ता करोगे"

काजल "अच्छा ठीक है"जाव कर लो उसका काम"

वही टेबल पर बैठेहूँए काजल के पिता होते है

संकेत "ये कोन है काजल ?

काजल "बता दूं ? संदीप चलो नेरपोलिश लगाओ"

संदीप काजल के पैरों की उंगलियों में नेरपोलिश लगाता है"

काजल "बावजी ये संदीप का स्टूडेंट है"

संकेत की फोन की घंटी बजती है"

संकेत (फोन पर)"अभी ...लेकिन क्यों ? कोई बात नही में आता हूं"(फोन रख कर) सोरी बिट्टो लेकिन मुझे जाना होगा"

संदीप (खुसी से):क्या ....?

संकेत "चलो तो में निकलताहूँ"ध्यान रखना अपना "

संकेत चला जाता है"

संतोष ; काहे महांरानी विक्टोरिया खुस एक दिन अंग्रेज़ को भी हांर मान नी पड़ी थी"तो तुम किस खेत की मूली हो"

असद"चलो संदीप ये सब छोड़ो और नास्ता करलो स्कूल भी तो जाना है"

संकेत ; सॉरी बेटा लेकिन ये मास्टर स्कूल नही" परंतु जेल जाएगा"

तभी वहां संकेत के साथ सुमन और दो चार पोलिस होती है"

कुसुम (धीरे से ):मैया ये कुसुम यह मतलब संकेत अंकल को सब पता चल गया"

संकेत "इंस्पेक्टर सर ये वही है" जिसने इस लड़की के साथ दूसरी शादी की है और हमारी बेटी को धोखा दे रहां है"

पॉलिस संदीप के पास जाती है"और संदीप के हांथ मे हथकड़ी पहनाती है"लेकिन वह असद आता है"

असद "अरे संकेत सर ये हमारी मेडम नही है ये सायद झूठ बोल रही है"हमारी मेडम तो काजल है"

असद काजल के पास जाता है"

असद (धीरे से)"प्लीज हां बोल दो जो तुम कहोगी वही करेगे"

काजल "थिक है"

लेकिन वहांं लीला आती है"

लीला "अरे सुमन माईके से आ गयी"तो ले ये में पतेली में थोड़ा दूध लेकर आना तो"

सुमन "लेकिन में अभी ही आयीहूँ और दूध है कि नही मुजे क्या पता"

लीला "तू इस संदीप की दूसरी पत्नी है और तू तो नई नई है तो तुजे तो पता होना चाहिए "

संतोष :(धीरे से) ये लीला को मैने आज सुख नही दिया तो मेरा भी नाम संतोष नही"

संकेत "देखा इंस्पेक्टर सर"

लीला "अरे संतोष ये पुलिस तेरे घर क्या कर रही है"

संतोष "तेरी तरह दूध मागने आयी है"

लीला "क्या इन्स्पेक्टर सर आप ही दूध घर मे नही रखते तो हम तो आपकी ही प्रजा है तो हम भी नही रखते वेसे कल आप चाय पत्ती लेने मत आना"

संतोष "क्यों ?

लीला "क्योंकि वो में लूँगीना लेकिन संतोष इन लोगो को देना मत"

इंस्पेक्टर "बढ़ कीजिये"क्या आप कुछ भी बोले जा रही है"हम यह संदीप पटेल को गिरफ्तार कर ने आये है दूसरी शादी के जुर्म में"आपको आना है"

लीला "सुमन बेटा लाव मेरा पतीला में बाहर से खरीद लुंगी"

लीला जल्दी जल्दी चली जाती है"

इंसपेक्टर "चलिए संदीप पटेल"

असद "संदीप तुम बिल्कुल चिंता मत करना मेंहूँ में तुम्हे कुछ नही होने दूंगा"

संदीप :बस तुम सिर्फ मैया का ध्यान रखना"

पुलिस संदीप को लेकर चली जाती है"

संकेत "ये लो काजल"

काजल "ये क्या है डेडी"

संकेत "संदीप के बेल के कागज़ तुम उसे छुड़ा लेना"

काजल "जी

संकेत काजल को पेपर देकर चले जाते है"

कुसुम "भाभी तुम काहे ऐसा कर रही हो जाव और भैया को छुड़ा के लाव"

काजल "अरे ऐसे कैसे मुझे पता है कि आप लोग मुजे कैसे रखते जो मेरे डेडी के जाने के बाद अब ये पेपर तभी आप लोगो को मिलेंगे जो में कहूंगी वो ही करना होंगा"

असद "ठीक है अब तुम यही चाहती हो तो यही होगा हम सब तुम जो बोलोगी वही करेगे"

काजल "आगये ना लाइन पर कल क्या बोल रहेथे" में नही मानुगा"देख लिया"

थोड़ी देर बाद .....

कुसुम "असद ऐसा क्या करे जिससे वो कागज़ हमे मिल जाये"

असद "चोरी"

कुसुम "मतलब"

असद "मतलब ये की जब रात को काजल सो रही होंगी तब हम वो कागज़ चुरा लेंगे"

रात को

कुसुम "चलो ......

असद "धीरे धीरे से चलना ठीक है"

कुसुम "हां

तभी वहां अचानक गीत बजता है"

है चाह है अधूरी पूरी हो होगी ना..............

असद "ये गाना"

कुसुम "ये तो वही गाना है"मोजे बोहोत डर लग रहां है"

असद "ये सुमन कहां जा रही है"(नही मुजे ये बात कुसुम को नही बतानी चाहिए वरना वो डर जाएगी)

कुसुम "सॉरी लेकिन मुजे बोहोत डर लग रहां है"

तभी काजल अपने रूम में से उठकर बहांर आती है"

काजल "ये कोन गा रहां है"

संतोष "जय हनुमान ज्ञान गुन ......

........

कल्लू "फिर से आखिर ये कॉन है आज तो देख ही लूंगा में जाकर"

संतोष अपने रूम में से बाहर निकलती है वही अंधेरे में वो असद और कुसुम के साथ अथदजाति है और नीचे गिर पड़ती है"

संतोष "आ.....आ.....

कुसुम "मैया ..... मैया "

काजल "अरे ये तो सासुमा की आवाज़ है देखना पड़ेगा"

वही वो गाना बजना बढ़ हो जाता है"और घर की सारी लाइट चालू हो जाती है"

संतोष "कुसुम हमे कुछ दिखय नही दे रहां है"

कल्लू "क्याहूँआ सासुमा आँखे चली गयी"

कुसुम "अरे मैया के चश्मे कोई दो"

असद "ये लो मम्मी जी"


संतोष "काजल ....काजल"

तभी किचन में काजल आती है"

काजल "क्याहूँआ ?

संतोष "हम तुम्हांरी बातो को मानते है इसका मतलब ये नही के तुम कुछ भी हमारे घर पर लाओगी"

किचन में असद,कुसुम और कल्लू आते है"

काजल "ये अड्डा हम ने नही बनाया है"

संतोष "तो क्या मेने बनाया है"पता है तुम क्रिस्टल हो तो इस का मतलब ये नही की तुम ये सब खाओ तुम हिन्दू समाज मे हो और ये सब यह नही चलता"

काजल "सोरी सासुमा लेकिन में आपकी इज़्ज़त करती हूं"इसका मतलब ये नही की आप कुछ भी मुझ पर इल्ज़ाम लगाए"

संतोष "मतलब ?

काजल "मतलब ये अड्डा हमने नही बनाया"

संतोष "अगर तूमने नही बनाया तो किसने बनाये ?

असद :हम अड्डे लाये है"

संतोष "पूछ सकते है क्यों ?

असद "खाने के लिए"

संतोष "क्या तुम अड्डे खाते हो "और तुम्हांरे पिताजी को पता है"

असद "अरे क्या मम्मी जी मेरे अबु भी अड्डे कहते है और सिर्फ मेरे अब ही नही लेकिन हमारा पूरा खानदान अड्डा खाता है"

कुसुम "अबु..

संतोष "तुम मुसलमान हो ?

असद "हां.... आप को संदीप ने बताया नही"

संतोष "क्या ? है भोले ये क्रिस्टल ये मुसलमान और ये सुमन मराठी है"

कुसुम "मैया एक ही घर मे तीन तीन धर्म ?

संतोष के रूम में

असद "मम्मी जी मेरे पास एक बोहोत ही बढ़िया प्लान है"

कल्लू :भाभी .....ओह सॉरी भैया एओ तो बताइए की प्लान है क्या ?

संतोष "अरे बोलने तो दो"

असद :सबर सब्र रखो"

संतोष "ये पता क्या चल गया अब उर्दू में ?

असद सब को वो प्लान समजा देता है और सब को प्लान बोहोत अच्छा लगता है"

थोड़ी देर के बाद संतोष सीडीओ से गिरने का नाटक करती है"

असद "मम्मी जी ?

कल्लू "ऐ कुसुम सासुमा चल बसी"(रोतेहूँए)अब मुजे गालिया देगा कोंन"सब खत्म हो गया लेकिन अब होगा बटवारा"

कुसुम (मन मे)"ये कल्लू कुछ ज्यादा ही ओवरएक्टिंग कर रहां है"

काजल "अरे सासुमा को हॉस्पिटल ले चलते है"

संतोष "नही काजल बहु हमे नही लगता की हम और जी पाएंगे लेकिन हमारी आखरी इच्छा ये है कि तुम संदीप को जेल से छुडालो"

फिर संतोष अपनी आँखें बन कर लेती है"

असद "मम्मी जी"

कुसुम :मैया.....

काजल :सासुमा ......

असद "लगता है मम्मी जी को संदीप को जेल भेज ने की वजह से ये हांलहूँआ है आज"

कुसुम "काजल भाभी जाइए"जाकर आप भैया को छुड़ा कर लेकर आईये"

काजल "सोरी कुसुम में तुम्हांरे भाई को नही छुड़ा सकती"

असद "क्यों ? और ऐसे कैसे ?

कल्लू "सब मेहनत पानी मे चली गयी"

काजल "मेहनत ... केसी मेहनत"

संतोष (मन मे ) "ये क्यों मान नही रही है"

काजल "क्यों कि तुम्हांरे भाई ने हमारे तीनो के साथ किया वो अच्छा नही किया"ये सुमन हिंदी के दो चार शब्द बोलने आते है वो सब हिन्दी में नही कह सकती और हममे से किसी को भी मराठी नही आती"

सुमन "काय जाल"

काजल "देखा "

असद (मन मे)"ये क्यों अभी मराठी क्लास खोलकर बैठी है"

कुसुम "मैया की आखरी इच्छा का क्या ?

काजल "हम नही मान ते आखरी इच्छा को"

काजल चली जाती है"

काजल :और हां इस बुढ़िया की अंतिम संस्कार पे बुला देना"

संतोष(मन मे) :देखा में क्या समजती थी कि ये भले जैसी है लेकिन बहु तो मेरी है"लेकिन भाड़ में जाये ऐसी बहुऐ"तू तो नरक में जाएगी"

थोड़ी देर के बाद संतोष की अंतिम संस्कार की सब लोग तैयारी करते है वही संतोष की ठाठडी को असद कल्लू ,और दो आदमी को अपने कंधे पे लेकर घर से बाहर निकलते है"वही ठाठडी मेसे संतोष धीरे से कल्लू आवाज़ देती है"

कल्लू "क्याहूँआ सासुमा ?

संतोष "अब काहे हमे ज़िंदा जलाने का इरादा है"रुको अब"

असद दूसरे दो आदमी को वहां से चले जाने को कहता है"

असद "सासुमा आप रात को फिर घर आ जाना"

लेकिन ठाठड़ी में से आवाज़ नही आती है"

कल्लू "है भैया इस मे सासुमा कहि सचमे टे नही हो गयी ?

संतोष "हम ज़िंदा है ऐसे नही मरेगे"

घर पर

कुसुम "अब क्या ये प्लान तो फैल हो गया"अब मैया केसे लाएंगे"वो अब भूत है नही तो वो कैसे आएगी"

असद "अरे कुसुम तूने कहां वेसे"

कुसुम "कैसे ?

असद "बस अब तुम देखते जाव उस काजल के साथ हम करते क्या है" लेकिन इस काम मे हमे तुम दोनों की जरूरत है"

कल्लू "नही अब हमारा अंतिम संस्कार नही करवाना"

असद "कर्मा"

कल्लू "कर्मा ? लेकिन वो कैसे"

असद "बस जीजे अब तुम देखते जाव काजल हम को कैसे बेल के पेपर नही देती"

रात के ग्यारह बजे"

असद "मम्मी जी आप धीरे धीरे से चलना जिश से वो काजल आपको पकड़ न पाये"

संतोष "निकलू अब "

संतोष काजल की रूम की और जाति है"तभी वहां गीत बजना सुरु हो जाता है जैसे कि पहले बजता था"

है चाह है अधूरी पूरी हो सकेगी ना....

कल्लू "ये सासुमा गाना क्यों गा रही है ?

तभी काजल की आँख खुलती है और वो बाहर निकलती है वही उसकी नज़र संतोष पर पड़ती है"

काजल "सासुमा ...असद ,कल्लू

कल्लू "क्याहूँआ भाभी क्याहूँआ बोलिये में हांजरहूँ"

असद "ए कुसुम अपने बेरोजगार पति को सभाल नही सकती अब प्लान चोपट कर दिया तो"

कुसुम "तलाक ...तलाक बस दे दिया"

असद "पागल हो तुम"

संतोष जैसे ही चलती उसके पीछे भी कोई चलता है"

संतोष "ये मेरे पीछे कोन चल रहां है?

जैसे ही संतोष रुकती है तभी घर की सारी लाइट चली जाती है"कुछ देर बाद घर की लाइट आ जाती है"

काजल "असद मेने अभी अभी सासुमा को चलतेहूँए देखा"

असद "क्या काजल तुम भी पता है कि सासुमा तो लुड़क गयी है तो तुम कैसे देख सकती हो ?

अचानक वही हॉल में गुगरू कई आवाज़ सुनाई देती है जैसे कि कोई गुस्से में चल रहां है"

कल्लू :(असद को धीरे से) ये सासुमा कुछ ज्यादा ही ओवरएक्टिंग नही कर रही है"

कुसुम "हां असद"

काजल "अरे तूम लोग क्या गुस पूस कर रहे हो मुजे तो कहो "

कुसुम "भाभी कहि ये मैया का भुत तो नही ......

वहांं पर अचानक संतोष आ जाती है"

संतोष "किसी को नही छोड़ूंगी"

कल्लू :(संतोष के पास जाके) अरे एक मिनिट सासुमा आपने किसीको पकड़ा ही कब है तो छोड़ने की बात कर रही हो"

संतोष "होशियारी दिखाता है"में दिखातीहूँ(संतोष जोर से उसे लाफा मार देती है)और देखनी है"

कल्लू "ये ...तो...बोहोत गलत बात है"

काजल "ज्ञान गुण सागर........

संतोष "हनुमान चालीसा पढ़ेगी"मेरा विनाश करेगी तू तो गयी आज तू कटेगी"

असद और कुसुम को लगता है कि संतोष एक्टिंग ही कर रही है"लेकिन वो इस अनजान बात से बेखबर है कि ये एक्टिंग नही है"

असद "काजल तुम संदीप को छुड़ाने का वादा पूरा करोगी ऐसा तुम बोल दो"

काजल "हां में संदीप को कल जेल से छुड़ा कर लाऊंगी" में आपसे वादा करतीहूँ"

कुसुम "में वो पेपर लातीहूँ"तुम उस पर सही कर देना ठीक है"

कुसुम पेपर लेने जाती है लेकिन लाइट न होने की वजह से वो सुमन के कमरे में चली जाती है"कमरे में दूसरा दरवाजा होता है उसके ताले को वो तोड़ती है"

तभी लाइट आ जाती है"

कुसुम "ये दरवाजा...कैसे खोल दिया मेने "

कुसुम भागतेहूँए असद के पास जाती है"

असद "लो ये लेकर भी आगयी" जल्दी से साइन करलो"

कुसुम (मन मे) "नही में असद को नही बता सकती उस दरवाजे के बारे में मैया और मेरे अलावा किसी को भी नही पता है"

असद "क्याहूँआ कुसुम क्या सोच रही हो"

कुसुम "वो में किचन में ही भूल आयी अभी लेकर आती हूं"

कुसुम जाकर वो पेपर लेकर आती है"काजल उस पर अपनी साईन कर देती है"

काजल संतोष को कुछ कहने जा रही होती है कि वहांं संतोष नही होती है"

असद "ये ओवरएक्टिंग कितनी एक्टिंग करेगी"

कुसुम "ये मैया कहां चली गयी"

सुबह"

असद पुलिस स्टेशन जाता है"

संदीप "असद तुम मुजे छुड़ाने आये हो"

असद "कैसे नही आता प्यार किया तुमसे अब इतना तो करना बनता है ना"

संदीप "कितना मिस किया है पता है तुमको"

वही कॉन्स्टेबल जोर से चिल्ला ता है"

कॉन्स्टेबल "ऐ लव बर्ड्स घर जाके बात करना वेसे भी ये चार दिन साला मुज पर लाइन मार रहां था"

असद "क्या ? तुम एक बार घर पे आव तुम्हांरी खेर नही"

जाते जाते कॉन्स्टेबल असद को पास बुलाता है"

असद "क्या है"सब फॉर्मेलिटी तो खत्म हो गयी अब क्या है"

कॉन्स्टेबल "कभी इससे फुरसत मिले तो हमे याद करना"

असद कॉन्स्टेबल को जोर से चाटा मारता है"

असद "फुरसत में यही करताहूँ"

संतोष के घर"

लीला "अरे संतोष कहां गयी ?

काजल "क्याहूँआ आप चिल्ला क्यों रही हो"

लीला :अपनी सास को लेकर आ मेरे सामने आज तो संतोष की खेर नही कल हम सब ने प्लान बनाया था कि किटी पार्टी करेगे लेकिन वो तो आयी ही नही"

काजल "कैसे आती सासुमा तो चल बसी"

लिली "कब ? उसने मुझे बताया भी नही"

काजल "आप पागल हो क्या कोई कैसे बता सकता है कि मर रहांहूँ"

लिली "खेर जोहूँआ सोहूँआ भगवान उसकी आत्मा को शांति दे"

कुसुम "भैया आ गए आप पता है मेंने आपको कितना मिस किया"

काजल "ओह.. माय गॉड मेरे दिल के टुकड़े......

कल्लू "अब साजन मत कहना"

काजल "ह...वो तो अब पुराना हो गया"

कल्लू "तो नया क्या सैया लेकर आई हो"

तभी वहां पर स्टोर रूम से निकल कर संतोष आती है"

काजल "असद फिर से सासुमा का भूत आया"

असद "कहां पर ये ( असद संतोष के पास जाता है) ये भूत थोड़ी ना है ये तो मम्मी जी है"

काजल "मतलब "

कल्लू "अरे भाभी में समजाताहूँ सासुमा मरी थी कब जो उनका भुत आएगा"

असद "ये की जब घी सीधी उंगली से न निकले तब उंगली टेढ़ी करनी पड़ती है"

काजल (गुस्से में)"स्टॉप धिस नॉनसेंस" तुम्हांरी हिम्मत कैसेहूँई असद मेरे साथ खेल खेलने की अब तुम सब इसका हिसाब चुकतो गे"

इतना कहने के बाद काजल गुस्से में अपने रूम में चली जाती है"

संदीप "कोई मुजे बताएगा कि ये हो क्या रहां है ये मम्मी को देखकर तुम्हे क्यों धमकी दे रही थी"

असद "मेरे प्यारे पति वो में तुम्हे बाद में समजाताहूँ"मुजे तो मम्मी से बात करनी है"

संतोष "मुज से क्या बात करनी है ?

असद "कल जो रात को आपने एक्टिंग की उसके बारे में वेसे कहां से प्लान किया था"

संतोष "अरे पूछने की कोशिस तो में कर रहीहूँ की संदीप जेल से केसे छूट कर आया"

कुसुम "क्या मैया मज़ाक की भी हद होती है"

संतोष "अरे नही कुसुम में सच बोल रहीहूँ" तेरी और संदीप की कसम मुजे याद है तो में काजल के रूम के आगे से निकली तभी मेरे पीछे कोई चल रहां था"जब मैने मुड़ कर देखा तो पता नही मुजे क्याहूँआ कि में बेहोश हो गयी"

असद "क्या ?

संदीप "आप लोगो की ये बाते बध हो गयी होतो कोई मुजे चाई बनाकर मेरे लिए लेकर आये गा"

सब लोग खाना खा रहै होते है"

कुसुम "वेसे भैया आपकी दो दो शादी हो गयी लेकिन आप दोनों में से किसी एक को भी हनिमून के लिए नही लेकर गए"

असद "वाह कुसुम बोहोत बढ़िया बात छेड़ी है"

संदीप "अच्छा कहां जाना है कहो तुम दोनो"

कुसुम "बोलो सुमन भाभी आप चुप क्यों हो"

सुमन :(मराठी में )आप जहांँ लेकरं जाओ गे व्हांयला"

असद "शुरू इसका में कहता हूं कि हम लोग गोआ चलते है"

संदीप "ठीक है"कल ही चलते है"

काजल "और में क्यों नही ?

संदीप "क्यों कि हमारी शादी को तो दो साल हो गए है तो तुम्है कोई जरूरत नही है"

काजल "अच्छा में ये बता देती हूं कि अगर हम हनीमून पर नही जायेगे तो कोई नही जाएगा"

संतोष "लेजा इसको भी"

संदीप "ठीक है"

कुसुम "वेसे मैया हनीमून पर जाने का तो मेरा बचपन से सपना था" तो में भी और कल्लू चले जाएं तो"

कल्लू "वाह कुसुम ये भी बढ़िया बात है"

संतोष "अगर ऐसे लड़के के साथ तूम नही भागी होती तो आज तुम हनीमून पर तो क्या मून पर भी जा चुकी होगी"

कुसुम "क्या मैया भूल हो गयी तो हो गयी"

कल्लू "ऐ कुसुम तुम गोआ के चक्कर मे ये सब क्या बोले जा रही हो मेरी शादी तुम्हांरे साथ वो एक भूल थी"

संदीप "अरे क्या जीजा छोड़ो ना"

असद "चलो तो हम सब पेकिंग कर ले कल निकलना है"

संदीप "जीजे तुम ये लो मेरा मोबाईल और 6 टिकिट गोआ की बुक करदो"

कल्लू "ठीक है"

कल्लू मोबाईल में टिकिट बुक करता है लेकिन जब कहां जाने का ऑप्शन होता है उसमें कल्लू को कहि गोआ नही मिलता है"

कल्लू "कोई बात नही में सर्च कर लेता हूं"लेकिन गोआ का स्पेलिंग क्या होता है"

संतोष "ऐ कुसुम मुजे कराची का स्पेलिंग बताना तो"

कल्लू "कुसुम गोआ का स्पेलिंग बताना तो जरा"

कुसुम "लिखो मैया goa अब तुम लिखो karachi

संतोष"है हिंदी में इतना बड़ा और इंग्लिश में छोटा"

कल्लू कराची जाने की टिकिट बुक कर लेता है"

संदीप के रुम में

असद "वहांं गोआ का क्या प्लान है"

संदीप "बोहोत सारे लेकिन तुम्हांरे साथ नही काजल और सुमन के साथ"

असद "तुमहे तो में छोडूंगा नही"अगर गोआ में मैने तुमको बेच नही दिया ने तो मेरा भी नाम असद नही"

तभी कल्लू संदीप की रूम में जाता है और ये बात सुन लेता है"और वो वहां से चला जाता है"

कल्लू "सासुमा ...सासुमा.."

संतोष "क्याहूँआ इतने भागे भागे क्यों आ रहे हो सरकार बेरोजगार को रोजगारी दे रही है"

कल्लू "नही आप का संदीप को वो असद बेचने जा रहां है"

संतोष "है भोले ..कहां पे कैसे और क्यों ?

कल्लू "गोआ में और मुजे क्या पता"

संतोष किचन से भाग कर हॉल में जाति है और जोर जोर से चिल्लाने लगती है"

संतोष "कुसुम ,संदीप..."

कुसुम "क्याहूँआ मैया क्यों कब से चिल्ला रही हो"

संतोष "क्यों कि तुम्हांरा भाई बिक रहां है"

काजल "अच्छा कोन खरीद रहां है उस ना लाईक को ?

सुमन "दीदी ऐसा नही बोलते पति तो परमेश्वर होता है"

काजल "अब ये मराठी में क्या बोली"

सुमन "

काजल "तुम को इंग्लिश आती है"

संतोष "क्यों क्याहूँआ ? जल गई तुम"

काजल "स्टाप सासुमा "

संदीप "ये आप लोग क्या बोल रहे हो ?

संतोष "ये दामाद जी ने बताया कि असद संदीप को बेचने की बात कर रहां था"

असद "क्या ? जीजे तुम पागल तो नही हो गए हो "वो तो में सिर्फ मज़ाक कर रहां था"

संतोष "क्या तुम भी दामाद जी"

काजल "पता नही में ये पागलखाने में कैसे आ गयीहूँ"




Rate this content
Log in

Similar hindi story from Abstract