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Lata Sharma (सखी)

Classics

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Lata Sharma (सखी)

Classics

बहु बेटी सी

बहु बेटी सी

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बहु: बेटी सी

अम्बर घर पहुँचा ही था कि उसका फ़ोन बज उठा। अम्बर ने फ़ोन उठाकर हेलो किया और स्वाति खाने की थाली परोसकर अंदर ले कर आई। दोनो घटनाएं एक दम साथ हुई। अम्बर ने कहा, " जी सर मैं अभी निकलता हूँ। देश के लिए हर पल कुर्बान सर। कहकर फ़ोन रखा। और स्वाति के हाथ से थाली छूटते बची। स्वाति की सास ने हाथों से पकड़ ली थीं। सिर्फ एक महीना हुआ था शादी को। शादी के दिन ही गया अम्बर आज ही लौटा और आज ही वापस जाना, स्वाति के लिये झटका ही था। उसने तो जी भरकर अम्बर को देखा भी नहीं था। और अम्बर खुद स्वात्ति को सही से देख भी न पाया था। शादी के बाद दो बातें तक नहीं हुई थी और फिर से देश के लिए जान देने को आतुर था अम्बर। स्वाति ने चुपचाप भोजन की थाली टेबल पर रखी और अपनी आँखो में आये आंसुओं को पी गई। और पूछा, "अभी जाना है?" अम्बर बोला, " करगिल में युद्ध छिड़ गया है। मुझे जाना ही होगा। और फिक्र मत करो हम ही जीतेंगे। "मेरे देश" को इस वक़्त मेरी जरूरत है, मैं ये कर्तव्य निभा लूँ। फिर वादा करता हूँ माँ और तुम्हारा दायित्व भी अच्छे से पूरा करूँगा।" स्वाति ने सीने में अब किसी बुलेट ट्रेन की स्पीड से दौड़ रही धड़कनों को संभाला और बोली, " कोई बात नहीं। मेरा देश पहले है। बाकी सब बाद में। मैं सारी तैयारी कर देती हूँ। आप खाना खा लीजिये। फिर सवाल भरी निगाह से उसकी तरफ देखा जैसे पूछ रही हो, पहली बार उसके हाथ का बनाया खाना खाओगे या नहीं? अम्बर ने कहा, " ठीक है। और खाने को बैठ गया। एक कौर तोड़कर मुंह में डाला ही था कि माँ की रुलाई फूट पड़ी और वो अंदर चली गई। स्वाति भी टूटने ही वाली थी कि उसने देखा अम्बर परेशान हो गया और कौर नीचे रख रहा है। उसने जल्दी से अम्बर का हाथ पकड़कर कौर उसके मुंह में डालते हुए कहा, " आप खाना खाइये मैं माँ को संभाल लूँगी। भूखे पेट मेरे देश की सेवा कैसे करेंगे आप। " कहकर मुस्कुरा कर माँ के कमरे में चली गई। और थोड़ी देर बाद जब वो वापस आई तो माँ को लेकर आई। सामान भी पैक हो गया था। अम्बर खाना खा चुका था। और जाने के लिए तैयार था। वो माँ से बोली, " माँ ये देश भी तो माँ है उसकी सेवा करना भी इहक़ फर्ज है। मैं आ गई इसलिए मुझे देखकर कमजोर मत बनिये। बल्कि जैसे हमेशा करते हो अपने बेटे को विदा वैसे ही कीजिये। ये देश सेवा पर निकले है। आशीर्वाद दीजिये कि आपका बेटा और मेरा... कहकर अम्बर की तरफ देखा(जो उसे बहुत प्यार से देख रहा था,) जीत कर सही सलामत लौटे और दुश्मन को ऐसा सबक सीखा कर आये की वापस गन्दी निगाह से मेरे देश मेरी माँ की तरफ देखने की हिम्मत भी न करें।" उसकी बात सुनकर बेटे को मां ने विदा किया। और अम्बर उम्मीद से स्वाति की तरफ देख रहा था और आँखो से कह रहा था। कि एक मां की सेवा करते हुए उसे अब दूसरी मां की चिंता नहीं होगी। क्योंकि उसके पास उसकी बेटी है।

जय हिंद🙏🌹🌹

©सखी


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