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Pradeep Kumar

Inspirational

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Pradeep Kumar

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"बैल से ट्रैक्टर तक: समय और कर्म की कहानी"

"बैल से ट्रैक्टर तक: समय और कर्म की कहानी"

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"बैल से ट्रैक्टर तक: समय और कर्म की कहानी"

बचपन में गांव के चाचा हमें अक्सर कहानियाँ सुनाया करते थे। एक कहानी आज भी याद है—

चाचा कहते थे, “बेटा, किसी का पैसा उधार लिया है तो उसे तुरंत चुकता करना चाहिए। नहीं तो अगले जन्म में बैल बनकर खेती-बाड़ी में मेहनत करनी पड़ेगी।”

वे हमें बताते—एक आदमी ने उधार लिया और वापस नहीं किया। अगले जन्म में वह आदमी बैल बनकर खेतों में खटता रहा। एक दिन एक महात्मा आए और बोले, “यह बैल तुम्हारे दादा का है। अगर तुम पैसे लौटा दोगे तो यह कर्म पूरा हो जाएगा।” लड़के ने ₹80 लौटाए। जैसे ही पैसा लौटाया गया, बैल पहाड़ी पर चलते हुए अचानक गिरा और मर गया। महात्मा मुस्कुराए और बोले, “अब इसका कर्ज चुक गया।”

इस कहानी ने मेरे मन में घर कर दिया। मैं बचपन से ही कोशिश करता रहा कि किसी का भी पैसा मेरे पास न रहे।

लेकिन इस बार दिवाली में जब मैं गांव गया, तो देखा कि समय बदल गया है। अब बैलों की जगह छोटे-छोटे ट्रैक्टर और मशीनें खेत जोत रही हैं। ये पल भर में खेत तैयार कर देती हैं, बस डीजल चाहिए, बैल नहीं।

तभी मुझे आश्चर्य हुआ—अगर आज कोई पैसा नहीं लौटा पाए, तो वह अब बैल नहीं बनेगा। क्या वह ट्रैक्टर या हल चलाने वाली मशीन बनकर अपने कर्ज की भरपाई करेगा? सोचते-सोचते मैं हँस पड़ा।

यकीन मानिए, समय और तकनीक ने कर्म के नियम तक बदल दिए हैं। आज बैल तो नहीं रहे, लेकिन कर्ज का फल शायद अब भी किसी न किसी रूप में मिलता ही है—बस अब थोड़ा तेज और डीजल से चलने वाला!


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