अनोखा बदला - भाग ४
अनोखा बदला - भाग ४
सुधीर को आज बबलू से बदला लेना था। वो शहर जाने के लिए जब बस में बैठा तो वे चारों लोग भी उसके साथ ही बस में चढ़े। वो सारे सुधीर पर तंज कस रहे थे और पूरे रास्ते उसे परेशान करते रहे। सुधीर परेशान तो हो रहा था पर उसका सारा ध्यान ये सोचने पर था कि कैसे आज बबलू से बदला लिया जाये और कान बड़े होने से भी बचा जाये। सोचते सोचते वो कोचिंग सेंटर पहुँच गए। वहां टीनू भी आ गया। अब वो पांचों मिलकर उसे परेशान करने लगे। तभी क्लास की घंटी बज गयी और सभी क्लास की तरफ चल दिए। तभी सुधीर ने देखा कि बबलू एक लड़की से बात कर रहा है। उसे एक दम से कुछ सूझा और वो मन में बोला कि बबलू की दाईं आंख बार बार बंद हो जाये और खुल जाये। और ऐसा ही होने लगा। बबलू को कुछ समझ में नहीं आया कि ये क्या हो रहा है। उस लड़की ने भी समझा की बबलू उसे आँख मार कर छेड़ रहा है। वो बबलू को बुरा भला कहती हुई वहां से चली गयी। सुधीर अंदर ही अंदर प्रसन्न हो रहा था और बबलू क्लास में मुँह लटकाये बैठा था।
जब दोपहर में वो गांव में पहुंचे और घर की तरफ जा रहे थे तो गांव की एक लड़की बबलू के पास आई और बोली कि उसे टीनू के पापा ने घर बुलाया है। सुधीर को फिर से शरारत सूझी और उसने फिर पहले की तरह ही सोचा और बबलू की दाईं आँख खुलने और बंद होने लगी। वो लड़की बबलू से थोड़ी बड़ी थी। उसे बहुत बुरा लगा और उसने बबलू की तमाचा जड़ दिया। बबलू को लगा उसकी सब के सामने बेइज्जती हो गयी है और वो भागा भागा अपने घर की तरफ चला गया। सुधीर को आत्मा को जैसे शांति मिल गयी हो। वो घर आकर आराम से सो गया। जब वो उठा तो उसके हाथ अपने आप ही कानों के पास चले गए। आज भी कान उसी तरह बढे हुए थे। सुधीर के पास रात का इंतजार करने के सिवा कोई चारा नहीं था। वो सोच में पड गया कि वो जितनी भी अच्छी प्लानिंग करता है पर कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर होती है और अंत में उसे भी सजा मिलती है।
रात को सोते ही सपना शुरू हो गया। बबलू जब अपने घर पहुंचा तो वो रो रहा था। उसने वो किस्सा अपने पापा को बताया कि कैसे सब के सामने उस लड़की ने उसे थप्पड़ मारा था। बबलू के पिता गांव के सरपंच थे और उनकी काफी चलती थी। लोग भी उन्हें बहुत मानते थे। बबलू के पिता को ये सुनकर बहुत गुस्सा आया। उन्होंने उस लड़की के पिता को बुला भेजा। लड़की के पिता ने जब अपनी बेटी से सारी बात पूछी तो उसने बता दिया कि बबलू उसे आँख मार कर छेड़ रहा था। जब ये सारी बात लड़की के पिता ने बबलू के पिता को बताई तो वो मानने को तैयार ही नहीं हुए और उल्टा उसे ही डांटने लगे। लड़की का पिता एक छोटा सा किसान था और सरपंच के सामने ज्यादा न बोल सका और अंत में उसे ही बबलू के पिता से माफ़ी मांगनी पड़ी। जब वो घर वापिस जा रहा था तो बहुत दुखी था और भगवान से पूछ रहा था कि उसे किस गुनाह की सजा मिली है। सुधीर को भी अपनी सजा का कारण पता लग गया था।
