अधूरा किस्सा
अधूरा किस्सा
लड़की एयरपोर्ट के बाहर टैक्सी का इंतज़ार कर रही थी। उसका नाम ईशा है। देर रात और सफ़र की वजह से वह परेशान थी और अब बारिश भी हो रही थी।
टैक्सी थोड़ी ही देर में आकर रुकती है। ईशा टैक्सी की तरफ़ दौड़कर जाती है। उस टैक्सी के दरवाज़े को खोलने में काफ़ी ज़ोर लगाना पड़ा। ईशा पूरी तरह से भीग गई थी।
ईशा ने फिर टैक्सी ड्राइवर को अपना पता बताया। जब ईशा ने ड्राइवर को देखा, तो उसने अपने मुँह पर एक स्कार्फ़ बाँधा हुआ था और उसकी आँखें काफ़ी अजीब थीं। ईशा ने फिर इतना ज़्यादा ध्यान नहीं दिया।
फिर टैक्सी ड्राइवर ने ईशा को एक तौलिया दिया।
ईशा: थैंक्स।
ड्राइवर: कोई बात नहीं, मैम।
ईशा नोटिस करती है कि टैक्सी ड्राइवर कुछ घबराया हुआ था और किसी सोच में डूबा था।
ईशा: ड्राइवर............कोई जवाब नहीं, ...........ड्राइवर।
ड्राइवर: यस मैम।
ईशा: कहाँ खोए हो भाई? इतनी लम्बा रास्ता है, कुछ बातें ही कर लो।
ड्राइवर एकदम से ईशा की तरफ़ मिरर से देखता है।
ड्राइवर: मैम, आपको एक राजा की कहानी सुनाऊँ?
ईशा: हाँ, क्यों नहीं।
ड्राइवर: ये बात है कई हज़ार साल पहले की। एक राजा एक युद्ध जीतकर अपने सैनिकों के साथ राज्य लौट रहा था। लौटते वक़्त उसे रास्ते में एक अनजान आदमी मिला। जब राजा ने उससे पूछा कि कौन हो तुम? तब उस आदमी ने काफ़ी ऊँचे स्वर में राजा से पूछा, "राजन, क्या जीत गए आप?"
राजा को उसका ऊँचे स्वर में बात करना पसंद नहीं आया।
राजा गुस्से के साथ बोला:– "हाँ, जीत गया मैं!"
अनजान: "नहीं राजान, ये आपकी मूर्खता है कि आप जीत गए। आपकी हार हो चुकी है, बस अब आपके प्राण शरीर छोड़ने के इंतज़ार में हैं।"
राजा को अपना ये अपमान बर्दाश्त न हो सका। राजा ने उसी समय अपनी तलवार से उस आदमी का सिर काट दिया।
राजा अपने राज्य लौटा, पर उसके मन में युद्ध जीतने की ख़ुशी से ज़्यादा अपने अपमान का क्रोध था। उस रात जब राजा गहरी नींद में थे, तब उन्हें एक अजीब सा सपना आया।
सपने में राजा एक विशाल दरवाज़े के पास खड़े थे। उन्होंने उस दरवाज़े को खोलने का ट्राय किया, पर वह खोल न सके। कुछ कदम पीछे ले कर उन्होंने फिर से प्रयास किया। इस बार उनकी कोशिश सफल रही। उस दरवाज़े के खुलने के बाद राजा को वह अनजान आदमी दिखा, फिर अपने परिवार के एक-एक सदस्य की मौत और कुछ अजीब से शब्द सुने जिन्हें वह समझ न सके।
राजा इतना सब देखकर नींद से उठ खड़ा हुआ। कि ये सिर्फ़ सपना था,
यह बात जानकर राजा ने चैन की साँस ली।
अगली सुबह राजा की पत्नी का अकारण ही निधन हो गया। इस शॉक से उभरे भी नहीं थे कि शाम होते-होते, उनकी माँ का भी निधन हो गया। डॉक्टरों/चिकित्सकों को इन मौतों का कोई कारण पता नहीं चला।
राजा को उस सपने के बारे में याद आया, तो वह राज्य के पुरोहित के पास गए। उन्हें अपने सपने के बारे में बताया। पुरोहित ने कुछ देर सोचा और फिर कहा:– "आपकी बातों को सुन कर लगता है कि ये किसी दुष्ट शक्ति का प्रभाव है।"
राजा: "तो इसका समाधान क्या है?"
पुरोहित: "इसका समाधान एक ही है: अपने कपड़े किसी और को पहना दो और आप पर बीती पूरी व्यथा को उसे सुनाओ, पर वह शख्स अपनी इच्छा से तुम्हारी बात सुनना चाहिए।"
राजा इतना सुन सोच में डूब गया।
अगले दिन राजा ने एक कैदी को बुलाया। उसे अपने कपड़े पहनने के लिए दिए और उससे कहा कि "मैं तुम्हें रिहा कर दूँगा, पर बदले में तुम्हें मेरी सारी बातें सुननी होंगी।" कैदी ने अपनी सहमति दिखाई। फिर राजा ने उसे अपने सपने और परिवार में अकारण हुई मौतों के बारे में बताया। उसके बाद राजा ने कैदी को रिहा कर दिया।
उसी शाम राजा महल से ग़ायब था...............।
ईशा: ड्राइवर, राजा कहाँ गया?
ड्राइवर गाड़ी को रोककर बोला:– "मैम, आपका एड्रेस आ गया।"
ईशा ने ड्राइवर को टैक्सी में ही पैसे दिए और अपने घर में चली गई। ईशा को देख उसके परिवार के सभी लोग बहुत ख़ुश हुए, पर ईशा अब भी उस कहानी के बारे में ही सोच रही थी।
अगली सुबह जब ईशा की नींद खुली, तो उसे अपने पिता के मरने का
पता चलता है। उनके मरने का कारण डॉक्टर भी पता नहीं लगा सके। ईशा अंदर से पूरी तरह से टूट चुकी थी।
जब ईशा के पिता का शव अंतिम यात्रा के लिए ले जाया गया, तभी उनकी माँ अचानक से नीचे गिर गईं। उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया पर वह हॉस्पिटल पहुँचने से पहले ही मर चुकी थीं।
इतना सब हो जाने के बाद ईशा हॉस्पिटल में ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी। उसे रोते देख वहाँ पर भीड़ इकट्ठा हो गई। उसी भीड़ में ईशा को वह टैक्सी ड्राइवर दूर बेंच पर बैठा दिखाई दिया। ईशा को वह कहानी याद आ गई जो टैक्सी ड्राइवर ने सुनाई थी। ईशा टैक्सी ड्राइवर की ओर गई, तो वह ग़ायब हो गया।
घर आने के बाद, ईशा ने अपने आपको कमरे में बंद कर लिया। ईशा की नज़र कमरे के एक किनारे की ओर जाती है, तो वह देखती है कि अंधेरे में वह टैक्सी ड्राइवर वहाँ खड़ा था।
ईशा ने रोते हुए पूछा:– "क्यों कर रहे हो मेरे साथ ऐसा? मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?"
ड्राइवर: "अभी कहानी पूरी नहीं हुई है।"
ईशा: "कहानी ख़त्म करो फिर!"
ड्राइवर: "कहानी को सिर्फ़ तुम ख़त्म कर सकती हो। सोचो!"
इतना कह कर वह ड्राइवर ग़ायब हो जाता है।
ईशा उस कहानी को शुरू से याद करती है। उसे पुरोहित की कही गई बात याद आती है।
अगले दिन ईशा अपने बचपन के कपड़ों को एक अनाथ लड़की को दे देती है और उससे पूछती है कि क्या वह एक कहानी सुनेगी? और वह लड़की कहती है, "हाँ दीदी, सुनाओ।"
इतना सुन ईशा की आँखों से आँसू बहने लगते हैं। फिर ईशा उसे पूरी कहानी सुनाती है। वह लड़की भी अंत में वही सवाल करती है, "राजI के साथ क्या हुआ...?"
ईशा बिना कुछ कहे अपने घर आ जाती है।
घर आने पर ईशा अपने कमरे में जाती है। उसे वह टैक्सी ड्राइवर फिर दिखता है और कहता है:– "अपनी जान बचाने के लिए तुमने किसी और की जान ख़तरे में डाल दी।"
ड्राइवर धीरे से हँसा।
ड्राइवर: "तुमने पूछा था न कि राजा के साथ क्या हुआ? राजा उस शाम राज्य से बाहर गया था। जब सैनिकों ने राजा को महल में ढूँढा, तो उन्हें एक लाश मिली। वह लाश पुरोहित की थी। सैनिकों ने फिर पूरे राज्य में ढूँढा पर उन्हें राजा का पता नहीं चला। पर एक कैदी का शव मिला। जब अंत में वह राज्य से बाहर गए, तब उन्हें राजा मिले। एक चट्टान (शिला) पर बैठे, उनका सिर कटा हुआ था और जो उनकी गोद में रखा था।"
इतना सुन कर ईशा घबरा गई। उसके पैर पसीने से भीग गए। ईशा की नज़र धुंधली हो गई।
फिर ड्राइवर ने एक तलवार से ईशा के सिर को काट दिया....

