आप और हम जीवन के सच...... सहयोग
आप और हम जीवन के सच...... सहयोग
नेहा एक गांव की प्रधान थी और वह जीवन में कुदरत ईश्वर और पूजा पाठ बहुत करती थी। आज के समय को देखते हुए वह और आज की जरूरत से ज्यादा ईश्वर की शक्ति और भक्ति में विश्वास करता था। हम सभी मानवता के साथ यात्रा में हम सभी के जीवन में समय के साथ बदलाव रहता है।
नेहा ने अपने पद और प्रभाव की देयता और ईमानदारी के साथ निस्वार्थ भाव का दावा किया था। परन्तु एक सच हम कैसे भूल जाते हैं नारी कितना भी मन और चंचल को धारण ले पर जीवन का अर्थ और एक क्षण ही जीवन बदल देता है।
आज नेहा अपने जीवन के पुराने समय की यादों की फोटो एलबम खोलती है और बस नेहा बचपन के दोस्त कुलबन्त की फोटो देखकर पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। और वो खेत पर अपने पिता भाई का खाना लेकर जाना और ख्याल में उसे अच्छा बुरा दिन याद आता है कि कुलवंत का दोस्त हेडड्रेस जिसकी नजर तो गंदी थी पर बहर जोशीला नौजवान था नेहा मन मंथन में अपने शरीर की सिहरन दिखती है आज भी उसके गन्ने के खेत की शाम हेडड्रेस के साथ भरपूर यौवन का खेल भौतिक पन्नों के साथ मैं सोच भी न पाई और कुलवंत के ख्वाब और ख्यालों में अपने शरीर की सुध बुध खो हेडे से शारीरिक संबंध बनाने के लिए और पेट जब पड़ा पता ही न लगा और जब पता चला तो पिता भाई ने गर्भपात कर दिया और जबान बंद कर दिया। और कुलबन्त आसानी से हो गया था। और उसने हेड को जान से मार दिया और आज वो मेरे प्यार और मोहब्बत के साथ जेल काट रही है।
अचानक दरवाजे पर खटखटाहट की आवाज होती है मैं देखते हूँ एक नौजवान मेरी हम उम्र का खड़ा था। नमस्कार मैने नमस्कार ली और वह बोला मेरा नाम नीरज है और मैं आपसे मिलने आया हूँ आप गांव की प्रधान है मुझे अपनी नौकरी के लिए एक गांव का रिहायशी प्रमाण पत्र चाहिए।
आओ बैठो नीरज मैं नेहा कहती है अभी बना देती हूँ। और नीरज और नेहा एकदूसरे को देखते है और नेहा एकटक नीरज को देखती है और नीरज भी नेहा को देख पूछता है आप अकेली रहती है हाँ पिता और भाई एक हादसे में गुजर गए और अब मुझे गाँव वालों ने मिलकर पिताजी के पद का हक दे दिया है। और आप नीरज में एक अध्यापक हूँ और पास के गाँव में सरकार ने मुझे नौकरी दी है। मैं भी अब अकेला हूं नेहा ने पूछा ऐसा क्यों ?
नीरज माता जी बचपन में चल बसी थी पढ़ाई पूरी कि पिता जी सेना में शहीद हो गये। बस अब मैं हूँ अचानक ही नेहा नीरज का हाथ पक4कर बड़ा दुःख हम दोनों एक ही परिस्थिति के साथ है नीरज की और नीरज का आना जाना शुरूहो जाता दिन बीतते है नेहा और नीरज पुराने दिनों को भूलकर एक नयी जिंदगी शुरु करते है। आप और हम जीवन के सच में हम सभी को जीवन एक रंगमंच के साथ सोचना चाहिए क्योंकि यादें और रोने से कोई बदलाव नहीं होता है। बस जीवन के पल में हमें बीते पल समय के साथ भूलना पडता है।
बस यही आप और हम जीवन के सच है।
