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Comedy

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आंदोलन

आंदोलन

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एक दिन बैठे बैठे दिमाग में ख्याल आया की आखिर यह दिमाग में ख्याल आता क्यों है । फिर सोचा चलो छोड़ो यह सब अपने दिमाग में नहीं आने वाला, कुछ और सोचना चाहिए, कुछ रचनात्मक सा ।


बहुत सोचने के बाद नतीजा निकाला कि बाजार के दुकानदार जो खुद को बहुत चालक समझते है और लूटने का कोई मौका नहीं छोड़ते वास्तव में मूर्ख है । और उनसे भी बड़े मूर्ख है किसान ।


कैसे ?


अरे भाई सीधी बात है आलू सब्जी है, और भिंडी भी सब्जी है, गाजर भी सब्जी, ढेर सारी सब्जियां । जब सब सब्जियां हैं तो भला दुकानदार इतनी सारी सब्जियां क्यों बेच रहा है सिर्फ भिंडी क्यों नहीं बेच रहा ?


और उससे बड़ी बात आखिर किसान सिर्फ भिंडी क्यों नहीं उगा रहा । क्यों वो इतनी सारी अलग अलग तरह की सब्जियां उगाते है ।


तो बस हमने भी आंदोलन करने की ठान ली कि सब्जियां नहीं सब्जी बिकेगी, सब्जियां नहीं सब्जी उगेगी । पूरा जोर लगा दिया, कई सालों की सब्जी तोड़ मेहनत के बाद आज गर्व से कह सकते है कि हमारा आंदोलन सफल रहा । इसलिए नहीं कि अब सब्जियां नहीं सब्जी मिलती और उगती है, इसीलिए की हमने हमारे जैसे उन्नत दिमाग के करोड़ो लोग अपने साथ जोड़ लिए और यकीनन आने वाला ज़माना हमारा होगा ।


और यह सब ऐसे ही नहीं हो गया हमने नए नए तरीके से भिंडियों को समझाया कि आलू उगा कर कैसे किसान ने और आलू बेच कर कैसे व्यापारी ने तुम पर अत्याचार किया । ना आलू उगता ना भिंडी की सब्जी में आलू पकाया जाता , घनघोर अत्याचार । यही बात टमाटर के साथ भी रही । पहले तो भिंडी चिल्लाती रही ली टमाटर से स्वाद बढ़ता है, हमने समझाया कि टमाटर से भिंडी का स्वाद दबा दिया जाता है । हमारी मेहनत और भिंडी का सहयोग कल यकीनन हमारा है ।


सब्जियां नहीं सिर्फ भिंडी खाएंगे और खिलाएंगे ।


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