आज्ञाकारी
आज्ञाकारी
"तुम्हारे पेरेन्टस तुम्हारे साथ ही रहते हैं ?"
"हाँ...! सब भाईयों में सबसे छोटा हूँ ! उन लोगों की जिम्मेदारी मुझे ही मिली है! "- टहलते हुए वह अपने साथी से बोला।
"तुम अच्छे हो...! आज के ज़माने में ये बड़ी बात है।"-साथी ने प्रशंसा में सिर हिलाया।
"बच्चे का दाख़िला कौन से स्कूल में करवाया है ?"- साथी ने पूछ लिया।
"यहां के सबसे बडे़ कांवेंट में डोनेशन देकर कराया है।"
"ठीक किया...! बच्चे के भविष्य का सवाल है !"
"और बताओ...? भाभी जी का जन्मदिन था ...?यार गिफ्ट तो अच्छा ही दिया होगा? "- साथी ने दिल्लगी की।
"उसकी इच्छा सर्वोपरि है... हीरे का नैकलेस सेट खरीदा है! "-कहते हुए साथी को थोड़े गर्व से देखा।
"सोना तो बहुत महंगा हो गया है फिर भी लोग खरीदते ही हैं... नहीं क्या?"-साथी थोड़ा नर्वस था।
"अरे पैसा तो कहीं सेविंग में लगाना पड़ता है... सोना ही गुड चोईस है...? "-कहते हुए उसने साथी को इस तरह देखा जैसे अपनी औकात बता रहा हो!
"ठीक है भाई... !तुम्हारी क्षमता है... !सबकी नहीं होती!" -साथी अपने आप को छोटा महसूस कर रहा था।
वह बस अहंकार से मुस्करा भर दिया।
"तुम्हें तो पैसे की कमी नहीं है पर मेरा तो महिने का बज़ट हमेशा बिगड़ा रहता है! "-साथी निराश था।
"अरे नहीं यार...! तुम तो जानते हो ओल्ड पेरेन्टस साथ रहते हैं और उनका भी खर्चा है...! मैनेज तो करना पड़ता है ?"-आज्ञाकारी पुत्र बोला।
