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Manju Kanwar

Abstract

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Manju Kanwar

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आज भी भेदभाव

आज भी भेदभाव

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पूजा थोडी पीछे थी औरों से शायद उसके जीवन में प्यार की बहुत कमी है जिससे उसका स्वभाव खराब हो गया। पंकज जो उसका भाई है वो उससे प्यार तो बहुत करती है पर कभी-कभी उससे जलन होती है क्योकी सब उससे बहुत करते हैं। हाँ वो है तो इस लायक।            

जब कुछ बात चल रही थी पढाई की घर में पंकज के लिये तो वो बोली मुझे भी करनी है फटाक से पापा बोले "तू क्या मास्टरनी बनेगी।"         

पूजा उठके दुसरे कमरे में चली जाती है थोड़ा सा रो देती है । तभी माँ बोलती है "तू बिना रोये पंकज का कुछ काम नहीं होने देती। तू है क्या इस लायक जो बाहर पढ़ने जाए?"

तभी गुुस्सा फुट पड़ता है पूजा का वो बोली  "काश ,कभी साथ दिया होता तो होती इस लायक आज अगर मेरा स्वभाव खराब है तो इसके जिम्मेदार आप हो। कभी तो साथ देते,मैं पैदा हुुुई जब से तो ऐसी नहीं होउंगी माँ जब मुझे ज़रूरत होती है आपकी तब क्यों नही देते मेेरा साथ।उसके आंसू सिसकियो में बदल जाते हैं।


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