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MG Stories

Horror


1.3  

MG Stories

Horror


आहट

आहट

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एक घर के सामने एक गाड़ी आकर रुकती है और उसमें से एक औरत जो एक और औरत को बड़े ध्यान से गाड़ी से उतार रही थी ।

आओ भाई थोड़ा सम्भाल कर ...!उस दूसरी औरत के हाथों में एक बच्चा था जो देखने से पता चल रहा था की उसका जन्म कुछ दिन पहले ही हुआ हो और वो औरत हाॅस्पिटल से घर पहली बार आई हो ।

घर की देहलीज पर उसे उसकी सास पूजा की थाली लिए खड़ी दिखाई देती है जो मुस्कुराते हुए उसकी और उसके बच्चे की और देख रही थी ।

उसकी सास उसकी आरती उतारती है और उसे कहती हैं बहू अंदर आओ ... और हमारे घर की रोनक को बढ़ाओ जो इस दिन का इतनी बेसब्री से इंतजार कर रहा था ।

फिर वो औरत अपने बच्चे के साथ घर के अंदर प्रवेश करती है और वही पास में विलचैयर पर बैठें एक बुजुर्ग के पैर छूती है जो उसका ससूर था ।

वो उसे आशीर्वाद देता है और कहता है .... सदा खुश रहो बेटी भगवान् तुम्हें और तुम्हारे बेटे को लम्बी उम्र दे ।

तभी उसका पति गाड़ी की पार्किंग करके वहां आता है और कहता है मां पड़ोसियों को मिठाई बांटी है तो कोन सी मिटाई लेकर आऊं ।

ये सुनकर उसकी मां तो नहीं पर उसकी बहन कहती हैं भाई कुछ जरुरत नहीं महंगी मिठाई लाने की पड़ोसी होते ही है फ्री का खाने वाले अपनी ही मिठाई खाएंगे और अपनी ही बुराई करेंगे ।

फिर उसकी मां भी उसकी बहन की हां में हां मिलाती ही और कहती ही हां बेटा रवि पूनम ठीक कह रही है .... ज्यादा खर्चा करने की कोई जरूरत नहीं ।

ये सुनकर रवि वहां से बाजार की और चला जाता है और उसकी मां उसकी पत्नी कविता को कहती हैं बहू अब यूं कर तू बच्चे के साथ अपनै कमरे में आराम कर और तुझे किसी भी चीज की जरूरत हो तो पूनम या मुझे आवाज लगाई देना ठीक है .... पूनम कविता को इसके कमरे तक छोड़कर आ ।

हां मां... पूनम जवाब देती है और कविता के साथ उसके कमरे की और बढ़ जाती है ।

उनके जाने के बाद वहां रवि की मां और पिता के साथ पूनम का पाच साल का बेटा रह जाता है ।रवि की मां चंदा देवी पूजा की थाली को टेबल पर रखकर किचन में कुछ काम करने जाती है की अचानक से पूजा की थाली का दीया बुझ जाता है .... उसपर किसी का ध्यान नहीं था शिवाए पूनम के बेटे का .... वो उसे देख कर अपने हाथों से ताली बजाता है और हंसते हुए कहता है दीया बुझ गया दीया बुझ गया ।

उसे ऐसा कहते देख वहां मौजूद रवि का पिता उस बच्चे से कहता है .... अरे चिंटू हवा चल रही है ना बेटा तो दीया बुझ गया .... और अब तू मेरे पास आ मुझे तेरको एक कहानी सुनानी है .... सुनेगा ।चिंटू नहीं कहकर वहां से अपनी मां के पास भाग जाता है और उसके वहां से जाने के बाद उसका नाना हंसते हुए कहता है ..... बदमाश कहीं का ।

समय बीतता है और रवि मिठाई के डिब्बे लेकर घर आता है और उसकी मां और बहन पड़ोसीयो को मिठाई के डिब्बे लेकर आते हैं ।वो दोनों जब घर आती है तो उनके चेहरे पर अजीब सी खुशी होती है मानो उन्होंने इलेक्शन जीत लिया हो और उनके विरोधी और कोई नहीं बल्कि पड़ोसी ही हो ।

चंदा पूनम को कहती हैं ... पूनम बेटी जा अपने लिए और मेरे लिए चाय बना लें बहुत थक गए आज तो ।

हां मां आपने ठीक कहा .... में अभी बनाकर लाती हूं ।

तभी अंदर से उसके पिता की आवाज आती है पूनम बेटा एक कप मेरे लिए भी ।

ये सुनकर उसकी मां चंदा कहती हैं ... हां हां कुछ और ख्वाइश हो तो वो भी बता दो ।

डॉक्टर ने कितनी बार कहा है कि चाय नहीं पीनी लेकिन इन्हें तो अपनी मन की करनी है ।

मुझे कुछ नहीं होगा .... रवि का पिता दलीप सिंह जवाब देता ।

कुछ देर बाद पूनम चाय लेकर आती है और अपनी मां और अपने पिता को चाय देती है ।

पूनम चाय को दलीप सिंह के पास रखकर चली जाती है और दलीप उसे उठाकर पीने ही वाला होता है की उसकी नजर चाय के रंग पर पड़ती है जो बिल्कुल खून की तरह लाल था ।

उसके हाथ से अचानक चाय का कप जमीन पर गिर जाता है .... जिसकी आवाज सुनकर उसकी पत्नी और बेटी वहां भागकर आती है और आकर देखती है की फर्श पर चाय बिखरी पड़ी हैं और दलीप सहमा हुआ अपनी वीलचैयर पर बैठा है ।

चंदा उससे कहती हैं .... क्या हुआ जी चाय कैसे गीर गई ।

दलीप जवाब देता है .... चाय का रंग लाल था मानो कप में चाय नहीं किसी का खून हो ।

पर ये कैसे हो सकता है पिताजी मैंने आपको चाय दी थी ... पूनम जवाब देती है ।

" ये आपका कोई वहम होगा जा पूनम तेरे पिताजी के लिए और चाय बनाकर ला ।

" नहीं ... मुझे नहीं चाहिए ।

तभी वहां पर रवि आता है और कहता है ये क्या हुआ चाय किसने गिरा दी ।

रवि की आवाज सुनकर दलीप उसकी और देखता है तो उसे रवि के पीछे से एक बच्ची भागती हुई दिखाई देती है जो अचानक से गायब हो जाती है ।

उस बच्ची को देखकर दलीप और ज्यादा डर जाता है और सभी से कहता है ... ये बच्चा कौन था जो अभी अभी यहां से भागकर गया ।

ये सुनकर सभी उस और देखते हैं जींस और दलीप ने इशारा किया था पर उन्हें कोई नहीं दिखता ।

और रवि दलीप से कहता है ... चिंटू होगा पिताजी खेल रहा होगा ।

" नहीं वो चिंटू नहीं था ।

चिंटू का नाम सुनते ही पूनम सभी से कहती हैं ... में अभी उसे लेकर आती हूं ।

और वो चिंटू को लेने एक कमरे की और बढ़ती है और उस कमरे में जाकर देखती है की चिंटू अपने खिलोनों से खेल रहा था और बहुत खुश था ।

पूनम उसे देखती है और कहती हैं तो तू यहां है शैतान कहीं का ।

" मम्मी क्या आप भी हमारे साथ खेलोगी ।

ये सुनकर पूनम मुस्कुराते हुए कहती हैं हमारे साथ पर यहां तो तुम अकेले हो हमारे साथ नहीं बेटा मेरा साथ होता है ।

" नही मम्मी ... दीदी है ना यहां में उन्हीं के साथ तो खेल रहा हूं ।

" दीदी कौन दीदी तुम किसकी बात कर रहे हो ।

" अरे ये दीदी मेरे सामने बैठी है आपको दिखाई नहीं दे रही क्या ।

ये सुनकर पूनम चिंटू से कहती हैं अच्छा तू इतना बड़ा हो गया की अब मुझसे मजाक करने लगा । पर कोई बात नहीं बेटा ऐसे ही खेलता रहा बाहर मत जाना ओके ।

" जी मम्मी ‌।

पूनम वहां से चली जाती है पर उसके जाने के बाद चिंटू किसी को कहता है दीदी आप मम्मी क्यों नहीं दिखे .... पर वहां कोई नहीं होता ।

लेकिन उस कमरे में लगे आईने में कोई दिखाई दे रहा था जो चिंटू के पास बैठा उसके साथ खेल रहा था ..... वो एक बच्ची थी उसकी उम्र भी लगभग चिंटू जितनी ही थी और उसके बाल बिखरे और उलझे हुए मानो वो की दिनों से नहाई नहीं हो ।

चिंटू के पास से जाने के बाद पूनम फिर अपने पिता और मां के पास आती है जहां रवि भी मौजूद था ..... वो सभी के सामने कहती हैं .... चिंटू कमरे में खेल रहा है और मुझे लगता है पिताजी ने जिसे देखा वो चिंटू ही था आज वो मस्ती के मूड मे है

" पिताजी आप आराम करो डॉक्टर ने कितनी बार आपको कहा है आराम करो ।

अच्छा मुझे एक बार फिर हॉस्पिटल जाना होगा रमन की पेमेंट बाकी है ना उसे देने के लिए में रात होने से पहले ही घर आ जाउंगा ।

और ये कहकर रवि वहां से चला जाता है ।

वो हॉस्पिटल में पहुंचता है और अपने दोस्त डॉक्टर रमन के पास जाता है रवि देखते ही रमन पीओन को चाय लाने के लिए कहता है ।

पर रवि उसे मना कर देता है और कहता है नहीं रमन मन नहीं है ।

" और रवि .... भाभी को घर ले गए .... में कुछ काम से बाहर गया था ।

" हां तभी तो फिर से यहां आना पड़ा । अच्छा तो रमन तुम्हें पैसे कब दूं ।

" कभी भी जब तुम्हारा मन करे .... और यार तुम्हारी जान पहचान में और कोई ये करवाना चाहता हो तो उसे भी बता दो भाई तुम तो जानते हो इस मंहगाई के जमाने में काम चलना कितना मुश्किल है ।

" हां ...मैंने अपने सभी रिस्तेदारो को इस बारे में बता रखा है । पर एक बात तो बता तुझे किसी का डर नहीं है क्या ।

" अरे तू क्यूं चिन्ता करता है .... इस सरकार में अपनी पहुंच हेल्थ मिनिस्टर तक है कोई मुझे हाथ तक नहीं लगा सकता ।

फिर रवि अपनी जेब से पैसों की तीन गड्डी निकालकर रमन को देता है और कहता है ये पिछले काम के हैं अभी के कुछ दिन बाद ।

रमन जवाब देता है ..... कोई बात नहीं जब तुम्हारा मन करे तब दे देना ।

" अच्छा एक काम और यार रमन पिताजी के लिए कोई दिमाग के डॅाक्टर से बात कर ना .... उनकी अजीब हरकतें रोजाना बढ़ती ही जा रही होती है ।

" बुढ़ापे में ये आम बात है रवि ... फिर भी तुम कहते हो तो करता हूं किसी से बात

" अच्छा रमन चलता हूं रात होने वाली है ।

" अच्छा रवि मिलते हैं ।

फिर रवि वहां से अपने घर की और निकल जाता है और रमन भी घड़ी की और देखता है जिसमे नौ बजने वाले थे ।

वो भी अपना सामान लेता है और अपनी गाड़ी लेकर अपने घर की और निकल पड़ता है ।

रात हो जाती है और रवि भी अपने घर पर आ चुका था पूनम खाना बना रही थी और कविता अपने बच्चे को सुला रही थी की अचानक से लाइट चली जाती है ।

चंदा आवाज देकर रवि से कहती हैं बेटा रवि देख इस लाइट को क्या हो गया ।

" हां मां देखता हूं .... लाइट कैसे चली गई पूरे मौहल्ले में तो लाइट है तो हमारे घर की लाइट को क्या हुआ ।

पूनम किचन में काम करते करते रूक जाती है और अंधेरे में खड़ी लाइट का वेट करती रहती है की उसे ये अहसास होता है की उसके पास कोई खड़ा है ।

वो आवाज़ देकर कहती हैं ... क्या ये तुम हो बेटा चिंटू ।

पर उसकी बात का कोई जवाब नहीं आता ।

ये देखकर वो वहीं पर रखे अपने मोबाइल फोन को ढूंढती है और उसकी टॉर्च को आॉन करती है और उसकी रोशनी में देखती है पर उसके कोई दिखाई नहीं देता है

लेकिन जब वो पीछे मुड़ती है तो उसे बिल्कुल सामने और पास एक बच्ची खड़ी थी जिसके चेहरे पर खून लगा था और वो उसे घूर रही थी ।

उसे देखते ही पूनम के मुंह से चिख निकलती है और अचानक से लाइट आ जाती जो रवि ठीक कर रहा था सभी को उसकी चिख सुनाई देती है और चंदा और रवि किचन की और भागते है ।

और जाकर देखते हैं कि पूनम बेहोश जमीन पर पड़ी हुई थी ।

रवि उसे उठाता है और एक बेड पर लेटाता है चंदा और दलीप भी वही आ जाते हैं और कहते हैं क्या हुआ इसे ...... चिंटू अपनी मां की हालत देखकर रोने लगता है

दलीप उसे कहता है कुछ नहीं हुआ बेटा डर मत तेरी मां को कुछ नहीं हुआ ।

चंदा पूनम के चेहरे पर पानी का छिड़काव करती है .... तो पूनम को धीरे धीरे होश आता और वो अपनी आंखें खोलती है .... आंखें खुलते ही उसे वहीं बात याद आती है और वो डरकर पानी मां से लिपट जाती है ।

ये देखकर चंदा उसे कहती हैं .... क्या हुआ पूनम बात क्या है बेटी क्या हुआ ।

" मां किचन में कोई है ।

" कौन है .... तू इतनी डर क्यूं रही है और तेरा शरीर भी आग की तरह तप रहा है हुआ क्या है ।

ये सुनकर रवि किचन में जाता है और वहां देखता है पर उसे कोई नहीं दिखता । वो वापिस उन सभी के पास आता है और कहता है कौन है किचन .... मुझे तो कोई नहीं दिखा तुम सब को हो क्या रहा है ।

" भाई वहां एक बच्ची थी ..... पूनम डरी हुई आवाज में कहती हैं ।

" बच्ची कैसी बातें कर रही हो तुम .... और तुम उस बच्ची से इतनी डरी हुई हो ।

" उसके चेहरे पर खून लगा था मानो उसने किसी का खून पिया हो .... मां मुझे बहुत डर लग रहा है इस घर मे ज़रूर कुछ न कुछ है ।

तभी दलीप कहता है .... तो मेंने तब उसे ही देखा था ।

हां पिताजी आपने ठीक कहा .... शायद आप ठीक कह रहे थे आपने उसे ही देखा होगा ... पूनम जवाब देती है ।

ये सुनकर चंदा कहती हैं .... हे भगवान ये सब क्या हो रहा है आज ही हमारे घर पर हमारा पोता आया है और आज ही ये सब होने लगा ।

ये सब आपका वहम है .... कुछ नहीं बस आप सबका दिमाग खराब हो गया है ।

में कविता के पास जा रहा हूं और जब वो बच्ची फिर आए तो मुझे बुला लेना ।

ये कहकर रवि गुस्से में आकर वहां से चला जाता है ।

रवि कविता के पास जाता है और उसे और अपने बच्चे को देखता है .... कविता रवि से पुछती है रवि बाहर क्या हो रहा था और पूनम क्यूं चिल्ला रही थी ।

रवि ये सुनकर सोचता है कि कविता को ये सब बताना ठीक नहीं कही वो भी उसके परिवार की तरह ही उटपटांग बातें न सोचने लगे ।

वो कविता को कहता है की पूनम ने किचन में चूहा देख लिया और वो चीख मारने लगी ।

ये सुनकर कविता हंसने लगती है और उसे देखकर रवि भी ।

समय बीतता है पूनम चिंटू को लिए सोफे पर बैठी रहती है और दलीप भी उसके पास ही रहता है और चंदा बचा हुआ खाना बनाती है ।

कुछ देर बाद सभी खाना खाते हैं और चंदा पूनम को कहती हैं बेटी अब रात बहुत हुई देख चिंटू भी तेरी गोद में ही सो गया अब तू भी हो जा ।

ये सुनकर पूनम कहती हैं .... नहीं मां मुझे बहुत डर लग रहा है आप दोनों मेरे पास ही रहो ।

ये सुनकर चंदा कुछ देर सोचती है और दलीप से कहती हैं ठीक है तो आप अंदर सो जाओ मैं पूनम के साथ यही हॉल में ही बिस्तर डालकर हो जाते हैं ।

फिर वो रवि को आवाज देकर बुलाती है और रवि वहां आता है और कहता है हां मां ।

" बेटा में यही पूनम के साथ सो रही हूं वो तेरे पिताजी को कमरे में छोड़ आ ।

" क्या हुआ आप यहां क्यूं सो रहे हो कमरे में क्यूं नहीं हो रहे ।

" पूनम अब तक डरी हुई है और अकेले नहीं सोना चाहती तो मैं इसके पास यही पर सो रही हूं तू चिता मत कर हम आराम से यही सो जाएंगे ।

फिर रवि अपने पिताजी को उसके कज्ञरे में लेकर जाता है और सहारा देकर उसे बेड पर लेटा देता है ।

लेटने के बाद .... दलीप रवि को कहता है ... बेटा कहीं ये सब सच तो नहीं है ना ।

ये सुनकर ... रवि वहां खड़ा बस सोचता रहता है और अपने पिताजी से कहता है आराम करीए पिताजी ।

और ये कहकर वहां से चला जाता है ।

रात का एक बजे का टाइम था ..... सब सो रहे थे की अचानक से रवि और कविता का बेटा जो उनके पास एक झूले में सो रहा था रोने लगता है ।

उसकी रोने की आवाज सुनकर जब-तक रवि और कविता जगते उससे पहले ही वो बच्ची जिसे पूनम और दलीप ने देखा था वो उस बच्चे के पास आती है और उसके होंठों पर अपनी उंगली रखकर कहती हैं ... शशशशशससस.....!

वो बच्चा अचानक से चुप हो जाता है और उस बच्ची को देखकर मुस्कुराने लगता है और कुछ देर बाद फिर से सो जाता है ।

और वो बच्ची उसके पास से सीधे पूनम और चंदा के पास जाती है और उन्हें देखती है ।

वो चंदा के पास जाकर उसके कान में कहती हैं उठ जाओ ।

कि तभी चंदा की आंखें खुलती हैं और वो अपने आस पास देखती हैं पर उसे कोई दिखाई नहीं देता ।

वो मन ही मन सोचती है की उसे किसने आवाज दी वो ये वहम मानकर फिर से सोने लगती है कि उसे प्यास लगती है वो पास रखें पानी के जंग को उठाती है पर वो खाली होता है ।

वो उसे लेती है और किचन की और जाती है और किचन में पहले पानी पीती हो और उसके बाद उस जगह में पानी भरकर फिर से वापस अपनी सोने की जगह पर आती है ....और पानी जगह पर लेट जाती है .... कि तभी वो बच्ची अचानक से उसे पास आती है और लेटी हुई चंदा की छाती पर बैठ जाती है ।

ये देखकर चंदा की सांसें फूल जाती है और उसके मुंह से एक लफ्ज़ भी नहीं निकलता ..... डर के मारे उसके माथे पर पसीना आ जाता है ।

वो बच्ची चंदा के चेहरे के पास अपना चेहरा लाती है और और अपने मुंह से अपनी जीभ को निकालती है जो आम लोगों से कहीं लम्बी थी और चंदा के चेहरे पर घुमाती है ।

चंदा इतनी डरी हुई थी की वो अपने पास सोई हुई पूनम को भी आवाज देकर जगा नहीं पा रही थी ।

और वो बच्ची मानो उसके साथ खेल रही हो ।

अचानक से वो बच्ची रूकती है और चंदा की आंखों में देखती है और चंदा उसकी आंखों में ..... और अचानक से वो बच्ची चंदा की गर्दन को अपने दातो में जकड़ लेती है और .... और चंदा का दर्द चीख बनकर उसके गले से बाहर निकलता है ।

अचानक चंदा घबराकर नींद से उठती है और उठकर अपने चेहरे के ऊपर से पसीना पोंछती है और कहती हैं .... ये सपना ... इतना डरावना सपना हे भगवान हमारे परिवार के साथ ये सब हो क्या रहा है ।

वो वापस अपने बिस्तर पर लेटती है और सुबह होने का इंतजार करती रहती है ।

सुबह होती है ....पूनम उबासी लेकर उठती है और देखती है की चंदा उसके पास बैठी है .... वो अपनी मां से कहती हैं .... अरे मां आप जंग गई ।

ये सुनकर चंदा जवाब देती है ... अरे मैं सोई ही कहा ।

' क्या हुआ आप सोई नहीं ।

' नहीं बेटी रात को मुझे एक डरावना सपना आया और मेंने उस सपने में एक बच्ची को देखा जो इंसान तो नहीं थी ... उसने मुझपर हमला किया और मेरी नींद टूट जाती है ।

' ये बात थी तो आप मुझे जगा देते ।

' नहीं बेटी में तेरी नींद खराब नहीं करना चाहतीं थीं ।

' मां मुझे अब भी डर लग रहा है .... रवि तो इन बातों पर ध्यान नहीं देगा ... तो अब हमें ही कुछ करना होगा ।

' हां बेटी तुमने ठीक कहा ।

' तो ठीक है मैं चिंटू के पापा को यहां बुलाती हूं वो कोई समाधान जरूर निकालेंगे ।

फिर पूनम अपने पति को फोन करके .... सारी बात बताती है और वो उसे कहता है की तुम सब चिंता मत करो मैं जल्द से जल्द कुछ करता हूं ।

समय बीतता है और कुछ घंटों के बाद पूनम का पति राकेश वहां आता है लेकिन वो अकेला नहीं था उसके साथ एक और शख्स था ।

जिसने बिल्कुल काले रंग के कपड़े पहने थे और देखने में कोई तांत्रिक लग रहा उसकी आंखें इतनी बड़ी और डरावनी थी कि कोई भी उससे आंखें न मिला सके ।

राकेश को देखकर पूनम कहती हैं .... अरे आप आ गए ।

और चिंटू भागकर राकेश के पास चला जाता है और राकेश उसे गोद में उठा कर उसे कहता है ... कैसा मेरा बच्चा ।

चिंटू जवाब देता है .... ठीक हूं पापा ..... क्या आप हमें लेने आए हैं ।

' हां हां हम जल्द ही अपने घर चलेंगे पर अभी नहीं अब जाओ अंदर नानाजी के साथ खेलों ।

नही में दीदी के साथ खेलूंगा .... ये कहकर वो वहां से भाग जाता है ।

ये सुनकर वहां मौजूद सभी के चेहरे थे पर अजीब सा डर घर कर जाता है ।

और राकेश पूनम से कहता है .... कहीं हमारा बेटा उसी की बात तो नहीं कर रहा जिसकी तुम कर रही थी ।

पूनम जवाब देती है .... में नहीं .... अब आप ही हमें इस मुशिबत से छूटकारा दिला सकते हो ।

चिंटू जिस और गया था राकेश उसी और जाने की कोशिश करता है पर वो तांत्रिक उसे रोक लेता है और कहता है ... सब मुझपर छोड़ दो ।

कि तभी चंदा वहां आती है और वो राकेश और उस तांत्रिक को वहां देखती है और राकेश उसे देखते ही ... उसके पैर छूता है और चंदा उसे आशीर्वाद देती है ।

वो चंदा को तांत्रिक के बारे में बताता है और फिर चंदा तांत्रिक से कहती हैं अब आप ही कुछ करे बाबा यहां जरूर कुछ तो है ।

ये सुनकर तांत्रिक चंदा से कहता है कि आप चिंता मत करे बस आप एक हरी मिर्च लेकर आए .... आपकी सभी चिंता दूर हो जाएगी ।

ये सुनकर चंदा एक हरी मिर्च लेने किचन में जाती है और तभी वहां रवि आ जाता है वो राकेश को देखकर कहता है .... अरे जीजा जी आप अचानक यहां सब ठीक तो है ना ....!

और रवि की नजर तांत्रिक पर भी पड़ती है और वो कहता है ये कौन है ।

राकेश कहता हैं .... ये जाने माने तांत्रिक गजराज है ।

तांत्रिक का घर आना रवि के मन में शंका पैदा कर देता है और वो पूनम की और देखकर कहता है ... क्या तुमने जीजाजी को भी वो बात बता दी ।

पूनम जवाब देती है ...हां रवि .... राकेश को मेंने सब बता दिया ।

ये सुनकर रवि के चेहरे पर गुस्सा आ जाता है और वो कहता है .... ये सब क्या हो रहा है इस घर में क्या आप सब लोगों का दिमाग खराब तो नही हो गया ।

मां कहां है ....!

कि तभी चंदा वहां आती है और कहती हैं ... लो बाबा जी हरी मिर्च ।

ये सुनकर रवि गुस्से में कहता है ..... मां ये क्या हो रहा है आप भी ।

' हां बेटा ... कल रात वो बच्ची मेरे सपने में आई और मुझपर हमला किया ।

ये सुनकर रवि ज़ोर से कहता है .... वो सपना था मां सपने सच नहीं होते समझने की कोशिश करो ।

पर रवि उस बच्ची का पिताजी को दिखना फिर मुझे और सपने में मां को ये कोई इत्तेफ़ाक तो नहीं हो सकता .... पूनम जवाब देती है ।

ठीक है जैसा आप समझें में कोई तमाशा खड़ा नहीं करना चाहता ... में इसमें आपका साथ नहीं दूंगा ..... ये कहकर रवि वहां से अपनी बीवी के पास अपने कमरे में चला जाता है ।

रवि के चेहरे पर गुस्सा देखकर कविता उससे कहती हैं ... क्या हुआ जी आप इतने गुस्से में कहा से आ रहे हो ।

कुछ नहीं बस आज मुड़ खराब है ....रवि जवाब देता है ।

फिर कविता कहती हैं .... अब हम तो आपका मुड़ भी ठीक नहीं कर सकते हमारी तो कंडीशन ही कुछ ऐसी है ।

ये सुनकर रवि कविता के करीब जाता है और कहता है .... तुम बस अपने लफ़्ज़ों से यूं ही बातें करती रहो मेरा मुड़ अपने आप ठीक हो जाएंगा ।

दूसरी तरफ ... तांत्रिक चंदा से वो हरी मिर्च लेता है और उसे अपनी मुट्ठी में जकड़कर उसमें एक मंत्र फूंकता है और उस मिर्च को जमीन पर फेंक देता है ।

मिर्च जमीन पर गिरती है और अचानक कुछ ही देर बाद वो मिर्च एक जोंक में तब्दील हो जाती हैं ।

ऐसा होते देख वहां मौजूद सभी लोग डर जाते हैं और तांत्रिक उन्हें कहता है

आप का शक सही था .... इस घर में कोई काली शक्ति मौजूद हैं ।

ये सुनते ही पूनम को चिंटू की चिंता होती है और वो उसी और जाने की कोशिश करती है जिस और चिंटू गया था ।

पर तांत्रिक उस अपने हाथ से इशारा करके रोक देता है और खुद अपने कदम उस और बढ़ाता है जिस और चिंटू होता है और राकेश पूनम और चंदा भी बाबा के पीछे पीछे जाते हैं ।

और जींस कमरे में चिंटू खेल रहा था उस कमरे में पहुंचते हैं .... चिंटू खेलते हुए उन सबको देखता है ।

तांत्रिक उसके पास जाता है और उसे कहता बेटा तुम्हारी दीदी कहां है ।

ये सुनकर चिंटू उस तांत्रिक की और मुस्कुराता है और अचानक से चिंटू का रूप उस बच्ची में तब्दील हो जाता जो सबको दिखाई दे रही थी ।

ये देखकर सभी डर जाते हैं और चिंटू उस तांत्रिक को अपने हाथ से हल्का सा धक्का देता है और वो तांत्रिक हवा में उड़ता हुआ कमरे की दीवार पर जा लगता है

और फिर जमीन पर इतनी जोर से गिरता है की उसके सिर पर चोट लग जाती है ।

फिर वो बच्ची अपनी जगह से उठती है और उस तांत्रिक की और अपने कदम बढ़ाती है ...... ये देखकर जख्मी पड़ा तांत्रिक अपना हाथ उस बच्ची की और दिखाता है और अपने मुंह से कुछ मंत्रो का उच्चारण करता है .... पर उन मंत्रो का उस बच्ची पर कोई असर नहीं होता ।

ये देखकर वो तांत्रिक उन सभी को कहता है .... यहां से भागों ।

पर वो सभी इतने डर चुके थे की उन्हें तांत्रिक की बाते सुनाई ही नहीं दी । उनकी डरी हुई आंखें बस उस बच्ची को ही देखें जा रही थी ।

वो बच्ची उस तांत्रिक के पास पहुंचती है और उसकी और देखती है और वो जमीन पर पड़ा हुआ उस बच्ची की और .....!

वो बच्ची अपना एक पैर हवा में उठाती है और जोर से उस तांत्रिक के सिर पर दे मारती है जिससे उसका सिर किसी तरबूज की तरह फट जाता है ।

ये देखकर चंदा और पूनम बहुत जोर की चीख मारते हैं जो रवि को सुनाई देती है और वो कविता से कहता है यही रहना इस कमरे से मत जाना ‌।

और वो उस कमरे का दरवाजा बाहर से बंद करके उनकी और भागता है ।

पूनम ये सब देखकर बेहोश होकर जमीन पर गिर जाती है और राकेश उसे संभालता है ।

तांत्रिक का खून बहता हुआ वहां सुन्न खड़ी चंदा के पैरों तक पहुंचता है और उसके पैर खून में शन जाते हैं .... उसके पूरे शरीर में कंपकंपी छूट रही थी ।

कि तभी वहां रवि भागते हुए आता है और देखता है की पूनम बेहोश पड़ी थी और राकेश उसे होश में लाने की कोशिश कर रहा था चंदा बड़ी कांप रही और तांत्रिक की लाश से खून निकलकर कमरे में फैल रहा था ।

और फिर रवि को दिखाईं देती है वो बच्ची जो अपनी खतरनाक आंखों से उसे देखे जा रही थी ।

वो ये सब देखकर कुछ समझ नहीं पा रहा था .... कि आखिर कार में सब हो क्या रहा है .... वो गुस्से में उसी कमरे में रखी एक लकड़ी की कुर्सी उठाता है और उस बच्ची को मारने उसकी और भागता है .... पर अचानक से उसकी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगता है और वो उस बच्ची के कदमों में जागिरता है और बेहोश हो जाता है ।

रवि कि आंखें खुलती हैं .... वो अपने चारों और देखता है और अपने सिर को पकड़ कर खड़ा होता है उसका सिर फटा जा रहा था ।

वो देखता है है की पूरे कमरे में खून ही खून है और तांत्रिक अभी भी वहीं मरा पड़ा है ।

उसे सारी बातें फिर से याद आती है कि वो कैसे बेहोश हुआ था ।

वो अपने चारों और पूनम राकेश और अपनी मां चंदा को ढूंढता है पर कमरे में कोई नहीं था वो उन्हें पुकारने की कोशिश करता है पर उसकी उसके मुंह से नहीं निकल पाती वो अपने पर हाथ लगाकर देखता है तो उसे कुछ अजीब महसूस होता है वो भागकर उस कमरे में लगे आईने के सामने जाता है और अपने आप को देखकर चौंक जाता है क्योंकि उसके चेहरे पर मुंह ही नहीं था ।

तभी वो बच्ची उस कमरे के दरवाजे के सामने से हंसते हुए भागती है । रवि पीछे मुड़कर देखता है अब उसे भी डर लग रहा था पर उसे अपने परिवार को भी बचाना था । वो उसके पीछे भागता है और घर के ड्राइंग रूम तक पहुंच जाता है । घर की खिड़कीयो से देखने पर उसे पता चलता है की दिन से रात हो चुकी है ।

उसकी आंखें अपने परिवार को ढूंढती है पर उसे कोई भी नजर नहीं आता ।

फिर वो घर से बाहर जाने की सोचता है पर जब वो दरवाजा के करीब पहुंचने वाला होता है तो घर के दरवाजे और खिड़कियां अपने आप बंद हो जाती है । वो अपनी पुरी ताकत से उन्हें खोलने का प्रयास करता है पर खोल नहीं पाता .... वो थक हार कर रोते हुए उस दरवाजे के पास ही बैठ जाता है ।

तभी उसे कविता की याद आती है और वो उस और भागता है पर उसके रास्ते में लड़खता हुआ राकेश आता है जिसके पीला पड़ चुका था और उसे रोते हुए कहता है हमें बचा लो रवि और जमीन पर धड़ाम से गिर जाता है ।

राकेश के गिरते ही रवि को राकेश की पीठ पर किसी जोंक की तरह वो बच्ची चिपकी हुई दिखाई देती है जो जिसने अपने दांत राकेश की पीठ पर गाड़ रखे थे और वो उसका खून चूस रही थी ।

रवि और उस बच्ची की फिर से आंखें मिलती है मगर अब रवि भी उससे डर रहा था ।

वो क्या करे उसे समझ नहीं आ रहा था .... वो फिर से हिम्मत करता है और उसकी और बढ़ता है ।

ये देखकर वो बच्ची उसकी और चिखती है और उसकी चिख इतनी तेज थी की रवि हवा में उठकर दिवार पर जा लगता है उसकी पीठ में चोट लगती है वो दर्द से तड़पता है और देखता है की वो बच्ची गायब हो चुकी है वो लड़खड़ाते हुए राकेश के पास जाता है और उसकी सांसों को चैक करता है राकेश मर चुका था ।

रवि उसके पास से खड़ा होता है और कविता और अपने बच्चे की और जाता है और उस कमरे का दरवाजा खोलता है और देखता है की कविता अपने बच्चे के पास आंखें बंद करके लेटी हुई है वो उसके पास भागकर जाता है और उसे जगाने की कोशिश करता है कविता की आंखें खुलती हैं और वो रवि की और देखकर कहती हैं ..... क्या हुआ जी ।

रवि उसकी आवाज सुनते ही उसे गले लगा लेता है और उसके मुंह से आवाज आती है कुछ अजीब हो रहा है कविता ।

वो अपनी ही आवाज सुनकर चौंक जाता है और अपने चेहरे को छूकर देखता है तो उसके चेहरे पर मुंह था ।

कविता उसकी अजीब हरकतें देखकर कहती हैं क्या हुआ है आपको ।

ये सुनकर रवि जवाब देता है .... कुछ देर पहले मेरे चेहरे पर मुंह नहीं था कविता ।

' ये कैसी अजीबोगरीब बातें कर रहे हैं आप मुंह नहीं था ।

' हां कविता हमारे घर में एक शैतानी ताकत है जिसने कुछ देर पहले राकेश को मौत के घाट उतार दिया और हमारे पूनम मां पिताजी और चिंटू का कौई अता पता नहीं है हमें जल्द से जल्द यहां से भागना होगा ।

कविता रवि की कुछ भी बातें समझ नहीं पा रही थी कि तभी उन दोनों को चंदा की आवाज सुनाई देती है जो रवि को पुकारते हुए ये कह रही थी की रवि चाय बन गई है आकर पी लो ।

रवि आवाज सुनता है और कहता है .. मां ।

' हां मां पर आप तो अभी अभी ये कह रहे थे की कोई बच्ची सबको मार रही है कोई कभी अपने परिवार के लोगों के नाम पर ऐसा मजाक करता है क्या ।

' में मज़ाक नहीं कर रहा कविता मेरी बात मानो प्लीज़ । ये उसी की कोई चाल है ।

' ये बात है तो मैं उसे देखना चाहती हूं ।

ये कहकर कविता अपनी जगह से उठने की कोशिश करती है । रवि उसे उठते देख कहता है .... क्या कर रही हो ।

' बाहर जाकर में देखना चाहती हूं की आखिर कार बात क्या है ।

' नहीं नहीं मैं तुम्हें बाहर नहीं जाने दूंगा तुम यहीं सैफ हो मुझे लगता है वो इस कमरे में नहीं आ सकती । तुम यहीं रहो प्लीज़ में जाकर देखता हूं ।

कविता रवि की बात मान जाती है और रवि फिर से बाहर जाने की सोचता है ।

लेकिन उसे तभी कविता के पास अपना मोबाइल रखा दिखाई देता है और वो उसे उठाकर पुलिस को कॉल करता है पर फोन लगता उसमे नेटवर्क ही नहीं था ।

रवि उस फोन को कविता को देता है और कहता है .... नेटवर्क आते ही पुलिस को फोन करो । और हमारे बेटे की रक्षा करो ।

कविता को रवि की बातों से महसूस हो जाता है की कुछ तो बात है ।

रवि फिर से उस कमरे के बाहर जाता है और उसका दरवाजा बंद करता है और आगे बढ़ता है और देखता है की ड्राइंगरुम में राकेश पूनम चिंटू और उसके पिता बेठे है और चंदा चाय लेकर किचन से आती है वो सबको फिर से देखकर चौंक जाता है और अपना सिर पकड़ कर सोचता है आखिर कार ये क्या हो रहा है ।

चिंटू रवि को देखता है और उसकी और भागकर उसकी गोद में चढ़ जाता है रवि भी उसे गले लगा लेता है ।

फिर चंदा उससे कहती हैं तुझे कितनी देर से पुकार रही हूं इतनी देर से क्यूं नहीं आ रहा था ।

ये सुनकर रवि कहता है आप कुछ देर पहले घटी घटना को भुल गए हैं क्या ।

सभी उसकी और देखकर कहते हैं ... कौनसी घटना ।

रवि को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था ... कि उसकी बाहों में मौजूद चिंटू की आवाज आती है और वो कहता है ..... तुम भी तो भुल चुके हो ।

लेकिन ये आवाज़ चिंटू की नहीं थी ।

रवि धीरे-धीरे अपनी नजरों को चिंटू की और करता है और उसे देखता है ...मगर उसकी गोद में चिंटू नहीं वहीं बच्ची थी जो उसे देखे जा रही थी ।


रवि उस बच्ची को दूर फेंक देता है और वो हवा में उड़ती हुई दीवार पर जा चिपकती है ..... और दीवार पर चिपक कर अपने हाथों और पैरों से चलने लगती है और दीवार से होते हुए कमरे की छत तक पहुंच जाती है ।

रवि उसे देखता रहता है और अपनी फेमिली से कहता है हमें कुछ तो करना होगा नहीं तो ये डायन हमें मार देगी ।

लेकिन उसके सवाल का कोई जवाब नहीं आता और वो पीछे मुड़कर देखता है तो वहां कोई नहीं था ना ही पूनम ना राकेश और ना ही उसके माता पिता ।

ये देखकर उसे बेचैनी होती है और को अपने सिर के बालों को अपने हाथों से पकड़कर नोंचता है .... और चिल्लाते हुए उस बच्ची को कहता है तुम चाहती क्या हो ।

बच्ची जवाब देती है ..... तुम सबकी मौत ।

रवि रोते हुए कहता .... हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है मेरे परिवार को छोड़ दो प्लीज़

वो उसकी बातो पर ध्यान नहीं देती और रवि को कहती हैं देखो तुम्हारा परि तुमसे कुछ कहना चाहता है ।

फिर वहां पूनम और उसके माता-पिता आते हैं और एक लाइन में खड़े हो जाते हैं ।

सभी की आंखें पहले से बड़ी और किसी बुत की तरह खड़े थे मानो किसी के गुलाम हो और आदेश की प्रतिक्षा कर रहे हो ।

तभी पूनम आगे बढ़ती है और रवि के करीब पहुंचती है और उसे कहती हैं .... हमने पाप किया भाई और हम इसी लायक ...... ये कहकर वो अपनी गर्दन अपने हाथों से पकड़ती है और अपनी गर्दन को खुद ही तोड़ लेती है और जमीन पर गिर जाती है ।

रवि जमीन पर पड़ी पूनम को हिलाते हुए पूनम पूनम करता रहता है पर वो अपने प्राणों को त्याग चुकी थी ।

तभी उसके पिता दलीप विलचैयर पर बैठा उससे कहता है मैंने तुम्हें तब मना किया रवि ... में जानता था कि एक ना एक दिन हमें सजा जरूर मिलेगी पर इतनी जल्दी ये नहीं जानता था ।

फिर रवि को दलीप के हाथों में एक चाकू दिखाई देता है और दलीप रवि को कहता हम नहीं बच सकते ।

और वो अपने पास खड़ी चंदा के पेट में उस चाकू को घोंपता है और फिर निकाल लेता है .... चंदा के पेट से खून की धार पानी की तरह बह रही थी वो रवि और देखते हुए जमीन पर गिरती है और तड़पते हुए अपनी जान दे देती है ।

और इसके बाद दलीप भी उस चाकू से अपने गले को काट लेता है और वही पर बैठा बैठा मर जाता है ।

रवि उस बच्ची के आगे अपने आप को कमजोर देखकर अपने सिर को अपने हाथों से पिटता हुआ रोता है और वो बच्ची छत से जमीन पर आती है और रवि की और देखकर मुस्कुराती है ।

तभी रवि वो एक चीख सुनाई देती है जो किसी और की नहीं कविता की .... वो कमरे से निकलकर बाहर ये देखने आई थी की आखिरकार चल क्या रहा है ।

वो अपनी नजरों के सामने एक शैतानी आत्मा और अपने परिवार की लाशों को देख रही थी और रोते हुए रवि को भी ।

वो रवि को कहती हैं .... ये सब क्या हो रहा है रवि ।

' सब खत्म हो गया कविता इसने सबको मार दिया मैं किसी को बचा नहीं पाया ।

ये सुनकर कविता की आंखों में भी आंसू आ जाते हैं और वो रवि को गले लगा लेती है और उस बच्ची कि और देखकर कहती हैं ..... कौन हो तुम डायन ।

बच्ची जवाब देती है .... में आपकी बेटी हूं ।

ये सुनकर कविता और रवि दोनों चौंक जाते हैं ..... और कविता उस बच्ची को कहती हैं..... नहीं ये नहीं हो सकता । मेरी कोई बेटी नहीं है ।

रवि ये सुनकर ख़ामोश था और कुछ देर बाद को अपनी चुप्पी तोड़ता है और कहता है .... ये सच कह रही है कविता अब में सब कुछ समझ चुका हूं ये हमें हमारे पापों की सजा देने आई है ..... पर तुम जानती हो इसमें कविता का कोई दोष नहीं है ।

ये सुनकर कविता कहती हैं तुम किस बारे में बात कर रहे हो रवि मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा ।

में आपको बताती हूं मां .... जब मैं आंखें पैंट में थी तब एक दिन बुआजी और भुफाजी घर पर आए और दादाजी और दादीजी को कहा ।

' कविता का चौथा महीना चल रहा है मां बहुत जल्द रवि बाप बनने बाला है और मैं आपको पहले ही बता दूं कि मुझे बच्चा होने पर नेग में सोने का हार और कंगन चाहिए और उसके साथ और सामान रह गया वो अलग !

ये सुनकर चंदा जवाब देती है हां पर लड़का तो ही तुझे ये सब मिल सकेगा लड़की हुई तो भुल जाओ ।

' ये क्या बात हुई मां मुझे तो ये चाहिए चाहे लड़की हो या लड़का ।

ये सुनकर चंदा जवाब देती है .... सिर्फ लड़का ... अब कोई बहस बाजी नहीं ।

तो क्यूं ना मां हम .... ये पता कर लें कि कविता के पैंट में लड़का है या लड़की ।

' ऐसा हो सकता है ... चंदा पूनम से कहती हैं ।

' हां मां हमने चिंटू के पैदा होने से पहले ही ये चेक करवा लिया था की लड़का है या लड़की ।

' इस काम में कोई समस्या तो नहीं है ना ।

' नहीं मां बस हम सबकी हां होनी चाहिए .... आगे का काम राकेश सम्भाल लेगा इनकी जान पहचान का एक डॉक्टर है ।

ये सुनकर वहां बैठा राकेश कहता है अरे वो तो रवि का दोस्त है वो कभी साथ में पढ़ते थे ।

कोई दिक्कत नहीं होगी .... बस आप रवि और कविता को इस बारे में समझा लो ।

और ये काम बस आप कर सकती है मां ।

दलीप सबको कहता है ..... ये इलिगल है .... तुम होश में तो हो सब ।

' आपको तो बस हर चीज में नाक अड़ानी आती है आप तो बस चुप रहो ... चंदा दलीप से कहती हैं ।

रात को रवि काम से घर पर आता है और देखता है की घर पर पूनम और राकेश आए हुए हैं .... वो सबसे मिलता है ।

रात को खाना खाने के बाद कविता अपने कमरे में चली जाती है और रवि पूनम राकेश और चंदा से बाते करता है ।

चंदा बातों बातो में मौका पाकर रवि से कहती हैं .... बेटा रवि एक बात है ।

' हां कहो ना मां ।

' राकेश और पूनम ने हमें ये बताया की हम ये जान सकते हैं कि कविता के पेट में लड़का है या लड़की .... इसमें तुम्हें क्या कहना है ।

' इसमें कहना क्या है मां .... और हमें ये जानना ही क्यूं है ये कानून अपराध है ।

तभी राकेश रवि को कहता है .... हम जानते हैं रवि कि ये कानूनी अपराध है पर एक बार चेक कराने से क्या दिक्कत है हम सबको तसल्ली मिल जाएगी बस ।

इसमें कोई पैसें भी नहीं लगेंगे ।

' ये काम और फ्री में .... ।

' हां फ्री में तुम मेरे दोस्त रमन को तो जानते ही हो जो कभी तुम्हारे साथ पढ़ता था

' हां जानता हूं वो कभी मेरा भी दोस्त था .... वो अपने हाॅस्पिटल में ऐसे इलिगल काम करता है ।

' हां .... समय के साथ चलना पड़ता है .... राकेश कहता है ।

' अगर ये बात है तो मुझे कोई एतराज़ नहीं पर कविता ।

' तुम कविता की चिंता मत करो भाई उसे इस बात की भनक भी नहीं लगेगी ये बात बस हमारे बीच ही रहेगी .... उसे बस आपको ये कहना हे की ये सब बस नोर्मल टेस्ट है । आगे डॉक्टर रमन अपने आप सम्भाल लेगा ।

फिर रवि इस बात की हामी भर देता है और सब खुश हो जाते हैं ।

अगले दिन राकेश रवि और कविता के साथ रमन के हॉस्पिटल जाता है ।

कविता इन सब बातों से अनजान थी । और राकेश ने रमन को फोन करके सब बात पहले ही समझा दी थी ।

हॉस्पिटल में रवि रमन से मिलता है और अपने पुराने दिनों को याद करता है ।

और कुछ देर बाद वो जिस काम से हॉस्पिटल आए थे वो हो जाता है और कविता को इस बात की भनक तक नहीं लगती .... वो सभी टेस्टों को नोर्मल लेती है ।

राकेश रवि को कहता है की तुम कविता को लेकर घर जाओ कुछ देर बाद मैं पुरी डिटेल लेकर घर आता हूं ।

फिर रवि कविता को लेकर घर चला जाता है और राकेश वहीं हॉस्पिटल में रहता है

कुछ देर बाद रमन राकेश को अपने केबिन में बुलाया है और कहता है .... राकेश रवि की पत्नी के पेट में एक लड़की पर रही है ।

ये सुनकर राकेश का चेहरा उतर जाता है ....रमन ये देखकर कहता है तुम चिंता क्यूं कर रहे हो तुम तो जानते ही हो ना की मेरे पास इसका भी शलूशन है ।

राकेश जवाब देता है .... हां मैं जानता हूं पर इसमें मां बाप की हामी तो होनी चाहिए ।

रमन राकेश को कहता है .... तो उन्हें समझाओ अभी टाइम है अगर ज्यादा समय हो गया तो हम कुछ नहीं कर सकेंगे ।

मैं कोशिश करूंगा .... ये कहकर राकेश रमन के पास से घर की और निकल जाता है ।

घर पर सभी रिपोर्ट का वेट कर रहे थे की राकेश उदासी भरा चेहरा लेकर घर आता है । रवि राकेश को कहता है काम हो गया ।

राकेश जवाब देता है ......हां ।

कविता कहा है .... राकेश सबसे पुछता है ।

रवि जवाब देता है ..... वो अपने कमरे में है आराम कर रही है .... बताओ क्या हुआ ।

राकेश जवाब देता है .... लड़की है ।

ये सुनकर पूनम और चंदा के चेहरे का रंग उड़ जाता है और वो निराश होकर वहीं सोफे पर बैठ जाती है ।

चंदा अपने माथे पर हाथ रखकर कहती हैं हे भगवान ये क्या हो गया ।

दलीप कहता है .... तुम सब निराश क्यूं हो रहे हो लड़की भी तो देवी का रूप होती है ।

चंदा दलीप को गुस्से से देखती है और दलीप उसकी आंखों से ही समझ जाता है की उसका ज्यादा बोलना ठीक नहीं है वो चुप होकर बैठा रहता है ।

राकेश सबको कहता है .... इसका समाधान भी है अगर आप लोग चाहे तो ।

रवि कहता है ....क्या ।

राकेश जवाब देता है ...अवाॅशन ।

ये सुनकर सब चौंक जाते हैं और दलीप ये कहकर वहां से चला जाता है की तुम सब पागल हो चुके हो ।

चंदा कहती हैं ..... नहीं बेटा हम ये नहीं कर सकते ।

लेकिन राकेश कहता है ..... आप सब सोच लो आने वाले समय में महंगाई बिगड़ती संस्कृति तुम सब आज कल की लड़कियों को देख ही रहे हो ना । और उसके ऊपर होने वाला खर्चा शादी का खर्चा एक बार आगे की सोचकर देखो ।

अब वक्त है कुछ पैसों में इसका समाधान हो सकता है रमन ने कहा है की जैसे आज कविता को इस बारे में पता नहीं चला ऐसे ही उस बारे में भी उसको भनक तक नहीं लगेगी ।

सब रवि की और देख रहे थे .... और रवि खामोश बैठा राकेश की बातें सुन रहा था

चंदा उसे कहती हैं ... ये तुम्हारा फैसला होगा रवि हां या ना तुम चाहोगे वहीं होगा ।

रवि ये सुनकर कुछ देर सोचता है और सभी को कहता है मुझे इस बारे में कुछ समय चाहिए ।

ये सुनकर राकेश कहता है .... जल्दी सोचना रवि कहीं देर ना हो जाए ।

उसी रात - रवि कविता के पास आता है और उसके लेटकर उसे अपनी बाहों में लेकर कहता है .... कविता मुझे तुमसे एक बात करनी थी ।

' हां कहो क्या बात है ।

' अगर हमें लड़की हुई तो ।

' तो ....क्या मैं तो चाहती ही लड़की हूं मुझे लड़कियां बहुत पसंद है ।

' मुझे भी ...रवि जवाब देता है ।

' क्या हुआ कुछ बात है क्या ।

' नहीं बस में ये जानना चाहता था की तुम लड़का लड़की मैं कोई भेदभाव तो नहीं करोगी ।

' तो अब अब आपको क्या लगता है ।

' मुझे मेरे सवाल का जवाब मिल गया । अच्छा एक और बात तुम बच्चे का नाम क्या रखोगी ।

' अगर लड़की हुई तो नाम मेरी पसंद का होगा और लड़का हुआ तो आप या मां जी जो चाहे वो रख सकती है ।

और मेरी बच्ची का नाम होगा " परी " ।

अगले दिन रवि अपने परिवार के पास आता है ... सभी को रवि के जवाब का इंतजार था ।

और वो कहता है मैं तैयार हूं राकेश ।

ये सुनकर राकेश पूनम और चंदा के चेहरे पर खुशी आ जाती है और राकेश कहता है । हमें रमन के पास चलना होगा ।

फिर राकेश और रवि रमन के पास जाते हैं और रमन रवि को कहता है तुम चिंता मत करो भाभी को कुछ भी पता नहीं चलेगा ।

रमन रवि को कुछ टेबलेट देता है और कहता है ये टेबलेट भाभी को देनी होंगी ।

और कुछ दिनो के बाद उन्हें कुछ तकलीफ़ होगी और तुम उन्हें मेरे पास लेकर आओगे .... और आगे में सब सम्भाल लूंगा ।

रवि रमन से कहता है इसमें कविता को तो कोई खतरा नहीं है ना ।

' नहीं भाभी को कुछ नहीं होगा । तुम चिंता मत करो ।

इस दिन के बाद रवि कविता को वो टेबलेट दूध में मिलाकर देता रहता है और कुछ दिनो के बाद कविता को तकलीफ़ होने लगती है और रवि उससे कहता है हमें रमन से इस बारे में सलाह लेनी होगी ।

पर कविता मना कर देती है और कहती हैं शायद प्रेगनेंसी में ये होता होगा ....।

पर एक दिन कविता की तबीयत ज्यादा खराब हो जाती है और रवि उसे लेकर रमन के हॉस्पिटल में जाता है ।

रमन चिंतित रवि को कहता है ...चिंता मत करो मैं सब सम्भाल लूंगा ।

और वो बेहोश कविता का फायदा उठाते हैं और उसके पेट में पल रही बच्ची को गिरा देते हैं ।

कविता होश में आती है और देखती है की ..... चंदा और पूनम मगरमच्छ के आंसू दिल उसके पास खड़े थे ।

वो सबको कहती हैं क्या हुआ ....!

ये सुनकर रवि कहता है ... कविता अब हम माता पिता नहीं बन सकते हमारा बच्चा हमें छोड़कर जा चुका है ।

ये सुनकर कविता अपने पेट की और देखती है .... उसे ऐसा अहसास होता है की मानो उसकी आत्मा उसके शरीर से निकल गई हो ।

उसकी आंखों में आसूं आ जाते हैं ।

रवि कहता है हमारा बच्चा तुम्हारे पेट में ही मर चुका था जिसके चलते तुम्हारी तबीयत बिगड़ी ... और रमन ने बताया की तुम म्हारी जान खतरे में है और उस बच्चे को निकालना पड़ा ।

मासूम कविता उन दरिंदों की बातों में आ चुकी थी और इस झूठ को सच मान बैठी

और कुछ दिनो के बाद सब नोर्मल हो गया सब लोग इस बात को भूल चुके थे ।

और दो साल बाद .... कविता ने एक बेटे को जन्म दिया ।

पर अबकी बार भी .... रवि ने रमन से ये जान लिया था की कविता के पेट में लड़का है या लड़की ।

ये सब सुनकर कविता रवि की और देखती है और कहती हैं आप सबने मेरे और मेरी बच्ची के साथ इतना बड़ा विश्वासघात ।

मुझे माफ़ कर दो कविता ... रवि कविता से कहता है ।

ये सुनकर वहां खड़ी वो बच्ची कविता से कहती हैं ..... माफ़ी नहीं इसकी बस एक ही सजा है और वो है मौत ।

और ये सजा आपको ही देनी होगी ।

ये सुनकर कविता कहती हैं .... नहीं में ये नहीं करूंगी ।

तभी उस बच्ची के हाथों में अचानक से कविता का बेटा आ जाता है और कविता ये देखकर चौंक जाती है ।

वो बच्ची फिर कहती हैं .... आपको ये करना ही होगा .... मुजरिम या बेगुनाह आपको एक को चुनना है ।

फिर वो कविता के पास चाकू फैकती है और कहती रही मेरी मुक्ति है मां ।

रवि भी कविता को कहता है ..... तुम्हें ये करना ही होगा कविता मेरी यही सजा है

कविता रोते हुए कहती हैं ..... में ये नहीं कर सकती ।

वो बच्ची उस बच्चे के गले को अपने हाथ से पकड़ती है जिसे वो रोने लगता है ।

रवि चिल्लाकर कहता है कविता तुम्हें ये करना ही होगा ।

ये सुनकर कविता उस चाकू को उठाती है और अपनी आंखें बंद करके उस चाकू को रवि के सीने में उतार देती है ।

जिससे एक बहुत तेज रोशनी उत्पन होती है ....और ...?


रवि अचानक से नींद से जागता है और अपनी छाती हाथ फेरकर देखता है ।

वो बिस्तर से उठता है और डरते हुए कमरे से बाहर आता है कि तभी उसके सामने चंदा आती और उसे दैखकर कहती हैं ।

अरे बेटा तू उठ गया मैं अभी तुझे ही जगाने आ रही थी .... जल्दी तैयार होकर खाना खा ले आज तुझे बहू को हाॅस्पिटल से घर लाना है ना ।

ये कहकर चंदा वहां से चली जाती है ....और रवि वहीं सोच में डूबा खड़ा रहता है ।

वो कुछ समझ नहीं पा रहा था की ये सब क्या हो रहा है .... उसे अहसास होता है की ये पूरी कहानी एक बुरा सपना थी । पर वो ये भी जानता था की कहानी सच के आधार पर थी ।

उसे अजीब सा लग रहा था और उसके दिमाग में अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे

वो नहा धोकर तैयार होता है और खाना खाने के बाद हाॅस्पिटल के लिए अपनी गाड़ी में बैठता है ...... लेकिन अब भी वो परेशान था सपने में हुई घटनाएं उसे परेशान कर रही थी ।

की तभी उसे गाड़ी की पिछली सीट से एक आवाज आती है जो और किसी की नहीं उसी बच्ची की थी ।

वो कहती हैं .....आपकी परेशानी में समझ सकती हूं पापा माना की ये सब सपना था पर मैं हकिकत हूं ।

ये देखकर रवि खामोश था ..... और कुछ देर बाद को कहता है क्या जो मेने देखा वो सच में होने वाला है ।

'में नहीं जानती इस सवाल का जवाब आपके पास ही है ।

' में कुछ समझ नहीं पा रहा .... मुझे पता है हमने कितना बड़ा पाप किया है पर इसका कोई प्रायश्चित नहीं है तुम जानती हो कविता को मेरी जरूरत है ।

' हां जानती हूं पर आप भी जानते हो ..... मुझे ये करना ही होगा ।

' तुम मुझे मार दो ....सब मेरी गलती है ।

' सोचकर बतातीं हूं .... ये कहकर वो अचानक से गायब हो जाती है ।

और रवि निराशा लेकर हॉस्पिटल की और निकल पड़ता है । और पुरे रास्ते उसके ज़हन में बस यही बात चलती रहती है कि अब क्या होगा उसका सपना सच होगा या ये सब उसके मन की कल्पना है वो कुछ भी समझ नहीं पा रहा था ।

रास्ते में रेड लाइट सिग्नल पर वो अपनी गाड़ी को रोकता है और उदासी लिए वेट करता है कि तभी एक बच्ची जिसके हाथों में पानी की कुछ बोतलें थी उसकी गाड़ी की विंडो खटखटाती है और रवि उसकी और देखता है और विंडो के कांच को नीचे करता है ।

वो बच्ची रवि से कहती हैं .... अंकल पानी की बोतल चाहिए आपको ।

रवि उसकी और देखता ही रहता है और उसे कहता है ..... उसे उस बच्ची के चेहरे में अपनी बेटी का चेहरा दिखाई देता है ।

क्यूंकि रवि के मन में अपनी बेटी का चेहरा ही घूम रहा जिसे वो भूल नहीं पा रहा था ।

रवि उसे कहता है .... तुम्हारा नाम क्या है बेटा ....!

वो कहती हैं परी और ये कहकर वो दूसरी गाड़ियों के पास भाग जाती है । क्योंकि वो समझ चुकी थी की रवि पानी की बोतल नहीं खरीदने वाला ।

रवि उसे कुछ कहता उससे पहले ही वो उसकी नज़रों से ओझल हो जाती है और सिग्नल ग्रीन हो जाता है जिसकी वजह से उसे अपनी गाड़ी आगे बढ़ानी पड़ती है ।

वो हॉस्पिटल पहुंचता है और कविता के कमरे में जाता है जहां कविता के साथ पूनम और उसका बेटा भी होता है .....!

वो सभी को कहता है घर चलने का वक्त आ चुका है । पर वो कविता से नजरें नहीं मिला पा रहा था और ये बात कविता भी देख लेती है ।

कुछ देर बाद वो सब गाड़ी में सवार होकर घर की और निकलते हैं और लेकिन अब भी रवि का चेहरा मुरझाया हुआ था वो करता भी तो क्या करता ।

वो सब घर पहुंचते हैं और घर की दहलीज पर चंदा पूजा की थाली लिए खडी थी वो कविता और उसके बेटे की आरती उतारती है और उन्हें कज्ञती है अंदर आओ ।

सभी अंदर चले जाते हैं पर रवि अभी भी बाहर ही खड़ा था उसने जो सपने में देखा वो सब सच्च हो रहा था उसकी घर के अंदर जाने की हिम्मत नहीं होती वो बाहर से ही अपनी गाड़ी की और बढ़ता है और उसमें बैठकर कहीं जाने लगता है ।

उस गाड़ी में अचानक से उसकी बेटी आ जाती है जिसे वो देखता है और कहता है मुझे पता है मैं मरने वाला हूं पर मुझे कविता के लिए कुछ करना है ।

वो बच्ची उसे कुछ नहीं कहती वो बस उसके साथ वाली सीट पर बैठी रहती है ।

रवि उस सिग्नल पर पहुंचता है जहां उसने उस बौतल वाली बच्ची को देखा था और उस बच्ची को ढूंढता है । कुछ देर बाद उसे वो दिखाई देती है और वो उसके पास जाता है ..... जहां वो अपनी कमाएं हुए पैसे गिन रही थी ।

रवि उसे कहता है ... क्या तुमने सारी बोतल बेच दी ।

वो जवाब देती है ... हां अंकल ... अरे आप तो वहीं है जो कुछ देर पहले मुझे मिले थे क्या आपको पानी की बोतल चाहिए ।

रवि कहता है .... नहीं मुझे बस तुमसे कुछ बात करनी है ।

वो कहती हैं .... हां तो करो क्या बात करनी है आपको ।

रवि उससे पूछता है .... तुम यहां क्यूं पानी बेचती हो क्या तुम स्कूल नहीं जाती तुम्हारे मम्मी पापा क्या करते हैं ।

वो जवाब देती है .... मम्मी पापा नहीं ... चाचा चाची के घर पर रहती हूं पानी की बोतल बेचती हूं तभी रात को खाना मिलता है चाचा के और भी बच्चे हैं हम सब यही पानी की बोतलें बेचते हैं उनके पास इतने पैसे नहीं हैं की हमें पढ़ा सके ।

मुझे स्कूल पसंद में उनके अंदर जाना चाहती हूं पर कभी जा नहीं पाई ।

रवि उसे कहता है क्या तुम मुझे अपने घर लेकर चल सकती हो ....!

ये सुनकर वो बच्ची कुछ देर सोचती है और रवि को कहती हैं आप मुझे गाड़ी में लेकर चलेंगे ।

रवि कहता है हां ...!

वो कहती हैं .... में अकेले आपके साथ नहीं चल सकती ।

फिर वो वहां पर अपने चाचा के बच्चों को बुलाती है जो वहां पानी ही बेच रहे थे और उन्हें सारी बात बताती है ।

वो रवि को कहते हैं ... हम सब आपके साथ चलेंगे ।

रवि हामी भर देता है और सभी गाड़ी में सवार हो जातें हैं ....रवि की बेटी पहले से ही गाड़ी में मोजूद थी पर वो किसी को दिखाई नही दे रही थी ये रवि जान चुका था

रवि सबके साथ उस बच्ची के घर पहुंचता है जो रेल की पटरियों के पास एक झुग्गी होता है और वहां पर उसके चाचा चाची से मिलता है । उसका चाचा .... देखने पर बीमार लग रहा था ।

वो बच्ची अपने चाचा से कहती हैं ये अंकल आपसे मिलना चाहते हैं ।

उसका चाचा रवि से कहता है .... हां कहिए शाहब क्या हमारे बच्चों से कोई गलती हो गई क्या ।

रवि कहता है .... नहीं नहीं इनसे कोई गलती नहीं हुई ।

में बस आपसे ये कहना चाह रहा हूं कि मैं परी को गोद लेना चाहता हूं क्या आप इस बात से सहमत हैं ।

मैं सुनकर परी के चाचा चाची आपस में बातें करते हैं और कुछ देर बाद रवि से कहते हैं .... साहब भाईया भाभी के मरने के बाद परी की सारी जिम्मेवारी हमपर है और हम जितना हो सके उतना कर भी रहे हैं पर हम परी को अपने आप से दूर नहीं कर सकते । हम गरीब जरूर है पर हम रिश्तों का सोदा नहीं करते ।

ये सुनकर रवि उनसे कहता है .... में आपकी भावना को समझ सकता हूं .... पर एक बार मेरी बात सुनें आगे आपको जो ठीक लगे वो मुझे मंजूर है ।

और मैं आपको पैसों का लालच देकर आपके स्वाभिमान को भी ठेस पहुंचाना नहीं चाहता ।

कुछ साल पहले मुझसे एक ऐसी गलती हो गई जिसकी वजह से में अपनी बेटी को खो बैठा मैंने एक बेटी को उसकी मां और मां को उसकी बेटी से अलग कर दिया ।

लेकिन मुझे आज ये मौका मिला है जिससे मैं अपने पापो को कुछ कम कर सकता हूं और खुद से नजरें मिलाने लायक हो सकूं ।

आज जब मैंने परी को देखा तो .... मुझे अपनी बेटी का चेहरा परी के चेहरे में दिखाई दिया मैं समझ गया कि ये ही मेरी बेटी बन सकती है ।

ये सुनकर परी के चाचा चाची कुछ देर इस बारे में सोचते हैं और अकेले में कुछ देर बात करते हैं और बाद में रवि से कहते हैं ।

हम जानते हैं शाहब हम परी वो चीजें नहीं दे सकते जिनकी उसे जरूरत है पर आपको हमसे एक वादा करना होगा ।

कि हमारा जब मन करेगा हम परी से मिल सकेंगे ।

' में आपसे वादा करता हूं आपका जब मन करे तब आप परी से मिल सकते हैं ।

' तो ये कब होगा ।

' आज ही ।

' आज .... आज कैसे ।

' आप चिंता मत करिए रजिस्टार आॅफिस में मेरी जान पहचान है आपको कुछ तकलीफ़ नहीं होगी ।

फिर परी के चाचा चाची उसके पास आते हैं और उसे कहते हैं .... तुम जानती हो बेटी ये सब तुम्हारी भलाई के लिए है ।

ये सुनकर परी अपनी गर्दन को हिलाते हुए हां का इशारा करती है ।

फिर वो सभी रजिस्टार आॅफिस जाते हैं और रवि परि को गोद ले लेता है ।

और परी को लेकर अपने घर की और निकल पड़ता है और कुछ देर बाद वो घर पहुंचता है ।

जब वो घर के अंदर परी के साथ जाता है तो घर के दरवाजे के पास रवि को अपनी बच्ची दिखाई देती है जो रवि कहती हैं .... मुझे पता है आप क्या कर रहे हैं .... ये सब होने के बाद आप बाहर आइएगा .... में नहीं चाहती मैं मां के सामने आपको सजा दूं ।

ये सुनकर रवि अपनी गर्दन हिला देता है ।

और परी को लेकर अपने घर के अंदर चला जाता है रास्ते में उसे चंदा और पूनम मिलते हैं जो उसके साथी परी को देखकर कहते हैं । ये बच्ची कौन है रवि ।

रवि उन्हें कहता है .... मेरी बेटी और कविता के कमरे की बढ़ जाता है ।

ये सुनकर चंदा और पूनम चौंक जाती है और उसके साथ वो चल देती है वो जानना चाहती थी की आखिरकार ये हो क्या रहा है ।

रवि कविता के कमरे के पास पहुंचता है और परि को बाहर ही खड़ा कर देता है और कहता है मैं जब कहूं तब तुम आ आ जाना ।

रवि कमरे के अंदर जाता है जहां कविता अपने बेटे के साथ खेल रही थी ।

कविता रवि को देखती है और उसे कहती हैं आप अचानक कहां चले थे सब ठीक तो है ना ....आप कुछ उदास भी लग रहे थे ।

रवि जवाब देता है अब सब ठीक पहले सब ग़लत था .... में तुमसे कुछ कहना चाहता हूं कविता ।

' तो कहो क्या बात है ! मुझे अजीब सा लग रहा है ।

तभी वहां चंदा पूनम भी आ जाते हैं ।

' कविता मैने तुम्हारे साथ एक ऐसा विश्वासघात किया है जिसके लिए कोई भी सजा कम है ।

' क्या बात है खुलकर बताओ रवि ।

' दो साल पहले हमारा पहला तुम्हारे पेट में भरा नहीं था उसे मारा गया था साजिश के तहत और साजिश करने वाले और कोई नहीं हम सब थे मैं मां पूनम राकेश ...

वो एक बच्ची थी कविता .... इसी लिए हमने उसे जन्म से पहले ही मार डाला ।

में इसके लिए तुमसे माफी मांगने के काबिल भी नहीं हूं ।

जब कविता ये सुनती है तो उसकी आंखों में आसूं आ जाते हैं और वो अपने बेटे को बेड पर लेटाती है और रवि की और बढ़ती है और उसके गाल पर जौर से एक थप्पड़ मारती है और रोते हुए उससे कहती हैं तुमने ये क्यूं किया रवि ।

रवि के पास कोई जवाब नहीं था ।

फिर वो चंदा और पूनम से कहती हैं कि आप सब मेरी नजरों से गिर चूके हैं ।

ये सुनने के बाद चंदा और पूनम कविता से अपनी आंखें तक नहीं मिला पाते ।

फिर रवि परि को देकर कमरे के अंदर बुलाया है और वो वहां आती है ।

रवि कविता से कहता है .... मैंने इस बच्ची को गोद लिया है कविता में नहीं जानता इससे मेरे पाप कम होंगे या नहीं पर मैं जानता हूं इससे में तुम्हारे दर्द को कुछ कम कर सकता हूं ।

कविता .... मासूम परी को देखती है और उसके पास जाकर उसके सामने घुटनों पर बैठ जाती है और उसे कहती हैं .... तुम्हारा नाम क्या है बेटी ।

परी जवाब देती है ....." परी " ।

ये सुनते ही कविता उसे गले लगा लेती है ।

ये देखने के बाद रवि मौका पाकर बाहर चला जाता है जहां उसकी बेटी उसका इंतज़ार कर रही थी ।

रवि उसे कहता है .... अब मैं तैयार हूं मुझे क्या करना है ।

उसकी बेटी उसे कहती हैं ..... मेरे साथ साथ आओ ।

और वो दोनों एक सुनसान जगह पर जाते हैं .... रवि उसे कहता है क्या तुम मेरे परिवार को भी खत्म करोगी ।

उसकी बेटी जवाब देती है .... शायद हां शायद ना अभी मेंने सोचा नहीं है ।

वो रवि को घुटनों पर बैठने के लिए कहती हैं और रवि घुटनों पर बैठ जाता है ।

फिर वो एक चाकू लेकर रवि की और बढ़ती है और उसके पास जाकर उस चाकू को रवि के दिल पर रख देती है और उसे कहती हैं ... क्या आप तैयार हो ।

रवि इस बात पर हामी भरता है ।

और अपनी आंखें बंद करके उसे कहता है .... हो सके तो मुझे मरने से पहले माफ़ कर देना बेटी ।

फिर उसकी बेटी उसे कहती हैं ..... अपनी आंखों ।

और रवि अपनी आंखें खोलता है .....और उसकी बेटी उसे कहती हैं .... मैंने आपको बहुत देर पहले ही माफ़ कर दिया था ।

और कोई भी बेटी अपने पिता को कभी भी निराश नहीं करती तो मैं कैसे आपको निराश कर सकती हूं ।

ये कहकर वो उस चाकू को गिराती है और रवि के गले लग जाती है और रवि भी उसे अपनी बाहों में भर लेता है ।

और कुछ पल के अंदर ही वो बहुत सारी बटरफ्लाई नमे बदल जाती है जो धीरे-धीरे आसमान की और चढ़ जाती हैं ।

रवि वहीं अपनी आंखों में आसूं लिए घुटनों पर बैठा रहता है ।


(उसी रात डॉक्टर रमन अपनी गाड़ी में बैठकर खाने सुनता हुआ था रहा और खुद भी गाने गुनगुना रहा था कि उसे गाड़ी की पिछली सीट से किसी और की भी आवाज सुनाई देती है जो उसके साथ ही गाने गुनगुना रही थी ।

वो पीछे मुड़कर देखता है कि पिछली सीट पर बहुत सारी बच्चीयो की टोली बैठी है जो उसकी और देखें जा रही थी ।

ये देखकर रमन कहता है ..... तुम सब कौन हो ।

वो सब हंसकर जवाब देती है .... तुम्हारी दोस्त ।

और ये कहकर वो सभी भयानक रूप ले लेती है और रमन पर टुट पड़ती है गाड़ी में बस रमन की चीखे सुनाई देती है और उसके खून के छिटे गाड़ी की खिड़कियों पर लग जाते हैं । )




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